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Yamuna Nagar News: कलेसर में जंगल सफारी शुरू पर शपथपत्र तक सिमटी सुरक्षा व्यवस्था
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प्रतापनगर, यमुनानगर। प्रदेश के सबसे बड़े पार्क राष्ट्रीय उद्यान कलेसर में पर्यटकों को लुभाने के लिए जंगल सफारी तो शुरू कर दी गई, लेकिन यहां पर सुरक्षा के इंतजाम नदारद हैं। दरअसल, वन्य जीव प्राणी विभाग ने केवल जंगल सफारी गाड़ी के चालकों से एफिडेविट लेकर सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगर कोई जंगली जीव जंतु पर्यटकों पर हमला करता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।
उल्लेखनीय है साल 2020 में कोरोना काल के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के बाद कलेसर राष्ट्रीय उद्यान में जंगल सफारी को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। तब से जंगल सफारी बंद पड़ी थी। ढाई साल बाद बीते शनिवार 23 दिसंबर को सफारी को शुरू कर दिया गया है। यहां पर्यटक आने भी शुरू हो गए हैं, लेकिन सुरक्षा संबंधी आवश्यक इंतजाम नहीं किए गए हैं। दरअसल, नियमानुसार गाइड और ड्राइवर को सफारी के दौरान जानवरों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक ट्रेनिंग दी जाती है, लेकिन कलेसर राष्ट्रीय उद्यान में फिलहाल ऐसा कुछ नहीं किया गया। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा राम भरोसे है।
इस संबंध में वन्य जीव प्राणी विभाग के निरीक्षक जयविंद्र नेहरा का कहना है कि सरकारी नियमानुसार ही जंगल सफारी शुरू की गई है। जंगल सफारी में जिन लोगों की गाड़ियां लगाई गई हैं। उन लोगों ने सुरक्षा को लेकर बाकायदा एफिडेविट दे रखा है। किसी भी स्थिति के लिए गाड़ी के चालक जिम्मेदार होंगे। सुरक्षा को लेकर पूछने पर इंस्पेक्टर ने बताया कि जंगल में सिक्योरिटी गार्ड आदि को लेकर किसी प्रकार का कोई इंतजाम करने की जरूरत नहीं है। पर्यटकों को हिदायत दी गई है कि वह गाड़ी से बाहर न निकलें।
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रविवार को छुट्टी के दिन पहुंचे 50 पर्यटकविदित हो कि 11570 एकड़ में फैले कलेसर जंगल में 14 का एरिया घूमने योग्य जंगल है। इस जंगल में दुर्लभ प्राणी भी देखने को मिलते हैं। इसमें तेंदुए, सांबर, बिल्ली, चित्तल, नीलगाय, भालू, जंगली धब्बेदार बिल्ली, हाथी, लंगूर, बंदर, जंगली मुर्गे, सुअर जैसे अन्य जानवरों की प्रजातियां हैं, जिन्हें देखने के लिए दूरदराज से पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन वन्य जीव प्राणी विभाग की तरफ से बिना पुख्ता इंतजाम के प्राइवेट गाड़ियों के माध्यम से पर्यटकों को जंगल में घूमने के लिए जंगल सफारी तो शुरू कर दी गई लेकिन उनके साथ न कोई सुरक्षा गार्ड है और नहीं कोई अन्य इंतजाम। पहले दिन छह से सात लोगों ने जंगल का भ्रमण किया वहीं रविवार को यह संख्या बढ़कर 50 हो गई।
सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक कर सकेंगे भ्रमण
वन्य जीव प्राणी विभाग के सुमित कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय उद्यान में कुल 14 किलोमीटर का रूट बनाया गया है। यहां पर पर्यटक सुबह छह बजे से 11 बजे तक और फिर दोपहर दो बजे से शाम को पांच बजे तक जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे। सफारी में एक जीप का किराया 1100 रुपये होगा, जिसमें पांच वयस्क व दो बच्चे बैठ सकेंगे। इस दौरान वह एक घंटे तक इसका आनंद ले सकेंगे। जंगल सफारी के लिए भारतीय नागरिक को प्रवेश शुल्क 50 रुपये व बच्चों को 30 रुपये देने होंगे। जबकि विदेशी नागरिक को 200 रुपये शुल्क देना होगा।
छत्तीसगढ़ में हो चुका है हादसा
छत्तीसगढ़ के रायपुर में जंगल सफारी के दौरान बाघ ने टूरिस्ट बस का पीछा किया था। इस दौरान जंगल सफारी से लटक रहे पर्दे पर झपट्टा मार कर बाघ ने अपने दांतों में पकड़ लिया था। यह मामला रायपुर के नंदनवन जंगल सफारी का है। इसका वीडियो वायरल होने के बाद सुरक्षा नियमों में अनदेखी करने वाले दो अधिकारियों को बर्खास्त भी किया गया था।
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उल्लेखनीय है साल 2020 में कोरोना काल के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के बाद कलेसर राष्ट्रीय उद्यान में जंगल सफारी को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। तब से जंगल सफारी बंद पड़ी थी। ढाई साल बाद बीते शनिवार 23 दिसंबर को सफारी को शुरू कर दिया गया है। यहां पर्यटक आने भी शुरू हो गए हैं, लेकिन सुरक्षा संबंधी आवश्यक इंतजाम नहीं किए गए हैं। दरअसल, नियमानुसार गाइड और ड्राइवर को सफारी के दौरान जानवरों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक ट्रेनिंग दी जाती है, लेकिन कलेसर राष्ट्रीय उद्यान में फिलहाल ऐसा कुछ नहीं किया गया। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा राम भरोसे है।
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इस संबंध में वन्य जीव प्राणी विभाग के निरीक्षक जयविंद्र नेहरा का कहना है कि सरकारी नियमानुसार ही जंगल सफारी शुरू की गई है। जंगल सफारी में जिन लोगों की गाड़ियां लगाई गई हैं। उन लोगों ने सुरक्षा को लेकर बाकायदा एफिडेविट दे रखा है। किसी भी स्थिति के लिए गाड़ी के चालक जिम्मेदार होंगे। सुरक्षा को लेकर पूछने पर इंस्पेक्टर ने बताया कि जंगल में सिक्योरिटी गार्ड आदि को लेकर किसी प्रकार का कोई इंतजाम करने की जरूरत नहीं है। पर्यटकों को हिदायत दी गई है कि वह गाड़ी से बाहर न निकलें।
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रविवार को छुट्टी के दिन पहुंचे 50 पर्यटकविदित हो कि 11570 एकड़ में फैले कलेसर जंगल में 14 का एरिया घूमने योग्य जंगल है। इस जंगल में दुर्लभ प्राणी भी देखने को मिलते हैं। इसमें तेंदुए, सांबर, बिल्ली, चित्तल, नीलगाय, भालू, जंगली धब्बेदार बिल्ली, हाथी, लंगूर, बंदर, जंगली मुर्गे, सुअर जैसे अन्य जानवरों की प्रजातियां हैं, जिन्हें देखने के लिए दूरदराज से पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन वन्य जीव प्राणी विभाग की तरफ से बिना पुख्ता इंतजाम के प्राइवेट गाड़ियों के माध्यम से पर्यटकों को जंगल में घूमने के लिए जंगल सफारी तो शुरू कर दी गई लेकिन उनके साथ न कोई सुरक्षा गार्ड है और नहीं कोई अन्य इंतजाम। पहले दिन छह से सात लोगों ने जंगल का भ्रमण किया वहीं रविवार को यह संख्या बढ़कर 50 हो गई।
सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक कर सकेंगे भ्रमण
वन्य जीव प्राणी विभाग के सुमित कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय उद्यान में कुल 14 किलोमीटर का रूट बनाया गया है। यहां पर पर्यटक सुबह छह बजे से 11 बजे तक और फिर दोपहर दो बजे से शाम को पांच बजे तक जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे। सफारी में एक जीप का किराया 1100 रुपये होगा, जिसमें पांच वयस्क व दो बच्चे बैठ सकेंगे। इस दौरान वह एक घंटे तक इसका आनंद ले सकेंगे। जंगल सफारी के लिए भारतीय नागरिक को प्रवेश शुल्क 50 रुपये व बच्चों को 30 रुपये देने होंगे। जबकि विदेशी नागरिक को 200 रुपये शुल्क देना होगा।
छत्तीसगढ़ में हो चुका है हादसा
छत्तीसगढ़ के रायपुर में जंगल सफारी के दौरान बाघ ने टूरिस्ट बस का पीछा किया था। इस दौरान जंगल सफारी से लटक रहे पर्दे पर झपट्टा मार कर बाघ ने अपने दांतों में पकड़ लिया था। यह मामला रायपुर के नंदनवन जंगल सफारी का है। इसका वीडियो वायरल होने के बाद सुरक्षा नियमों में अनदेखी करने वाले दो अधिकारियों को बर्खास्त भी किया गया था।