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खतरे में कुषाण काल की अमूल्य धरोहरें, चोरी कर बेची जा रही सामग्री
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हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड व पुरातत्व विभाग को मिली प्राचीन वस्तुएं।
- फोटो : Yamuna Nagar
सुरेश सैनी
यमुनानगर। जिले के गांव संधाए में निकली चौथी से छठी शताब्दी कुषाण काल की अमूल्य धरोहर खतरे में हैं। यह धरोहर सरस्वती नदी के किनारे मौजूद हैं। इस जगह पर करोड़ों साल पुरानी ऐतिहासिक सामग्री समाई हुई है। जिसे निकालकर लोग बेच रहे हैं। इसलिए पुरातत्व विभाग ने डीसी को पत्र लिखकर इस साइट की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
उधर, हरियाणा सरस्वती बोर्ड व पुरातत्व विभाग की ओर यहां शोधकार्य भी जारी है। शोध के दौरान यहां कई अमूल्य वस्तुएं निकलकर सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं कई चीजें ऐसी भी हैं, जिनका उल्लेख किताबों में भी नहीं मिलता। मगर आज यह ऐतिहासिक धरोहर खतरे में पड़ती जा रही है। दरअसल, शोधकर्ताओं के मुताबिक कुछ लोग इस जगह से इन वस्तुओं को चोरी छिपे निकालकर महंगे दामों पर बेच रहे हैं। इसके लिए लोगों ने साइट पर खुद से ही कई जगहें चोरी से खोद डाली हैं।
हरियाणा सरस्वती बोर्ड व पुरातत्व विभाग ने गांव संधाए में निकली अमूल्य धरोहर की सुरक्षा के लिए डीसी पार्थ गुप्ता को पत्र लिखा है। पत्र के जरिए अवगत कराया गया है कि इस धरोहर को अब कुछ लोगों से खतरा है। बहुत से लोग यहां से वस्तुओं को निकाल रहे हैं। ऐसे में अगर यहां की सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई तो धरोहर के लिए संकट खड़ा हो सकता है। चूंकि यहां से निकलने वाली ऐतिहासिक चीजों की बाहर काफी कीमत है। ऐसे में स्वार्थ की भावना रखते हुए इसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है। चूंकि यहां कुषाण काल की अमूल्य वस्तुएं हैं। संवाद
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पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच व पुरातत्व विभाग की उप निदेशक बनानी भट्टाचार्य ने बताया कि यह साइट सरस्वती के किनारे प्राचीन कुषाण काल की है। अब इस जगह को हरियाणा सरस्वती बोर्ड व पुरातत्व विभाग इसको पर्यटन के लिए तैयार करेगा। इस दिशा में काफी तेजी से काम शुरू भी कर दिया गया है। यहां अब तक कुषाण काल के मृद भांड, प्राचीन मूर्तियां व सिक्के मिल चुके हैं। यहां से निकल रही सरस्वती नदी हरियाणा की सबसे प्राचीन नदी है। इस नदी से लोगों को पीने का पानी मिलता था जिसके कारण इस नदी के किनारे ही लोग बसते थे। इसलिए प्राचीन ग्रंथों में सरस्वती नदीं को सभ्यता, शिक्षा व संस्कारों की जन्नी कहा जाता है।
कुषाण और गुर्जर प्रतिहार के समय का होगी सामग्री
उधर, पुरातत्व विभाग की उप निदेशक बनानी भट्टाचार्य के मुताबिक गांव संधाए में अब जो प्राचीन सामग्री मिल रही है। वह कुषाण काल व गुर्जर प्रतिहार के समय की हो सकती है, क्योंकि उस दौरान कुषाण काल व गुर्जर प्रतिहार का ही समय था। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग की टीम ने सफाई करके व जांच करने के बाद ही जो सिक्के निकाले, उससे पता लग जाएगा वह किस समय के रहे होंगे। बनानी भट्टाचार्य के अनुसार गांव संधाएं में सिक्कों व प्राचीन समान के मिलने के बाद जल्द ही पुरातत्व विभाग इस बारे में आगे काम करेगा। जल्द ही इस क्षेत्र का नाम ऐतिहासिक दृष्टि से उभरेगा।
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यमुनानगर। जिले के गांव संधाए में निकली चौथी से छठी शताब्दी कुषाण काल की अमूल्य धरोहर खतरे में हैं। यह धरोहर सरस्वती नदी के किनारे मौजूद हैं। इस जगह पर करोड़ों साल पुरानी ऐतिहासिक सामग्री समाई हुई है। जिसे निकालकर लोग बेच रहे हैं। इसलिए पुरातत्व विभाग ने डीसी को पत्र लिखकर इस साइट की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
उधर, हरियाणा सरस्वती बोर्ड व पुरातत्व विभाग की ओर यहां शोधकार्य भी जारी है। शोध के दौरान यहां कई अमूल्य वस्तुएं निकलकर सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं कई चीजें ऐसी भी हैं, जिनका उल्लेख किताबों में भी नहीं मिलता। मगर आज यह ऐतिहासिक धरोहर खतरे में पड़ती जा रही है। दरअसल, शोधकर्ताओं के मुताबिक कुछ लोग इस जगह से इन वस्तुओं को चोरी छिपे निकालकर महंगे दामों पर बेच रहे हैं। इसके लिए लोगों ने साइट पर खुद से ही कई जगहें चोरी से खोद डाली हैं।
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हरियाणा सरस्वती बोर्ड व पुरातत्व विभाग ने गांव संधाए में निकली अमूल्य धरोहर की सुरक्षा के लिए डीसी पार्थ गुप्ता को पत्र लिखा है। पत्र के जरिए अवगत कराया गया है कि इस धरोहर को अब कुछ लोगों से खतरा है। बहुत से लोग यहां से वस्तुओं को निकाल रहे हैं। ऐसे में अगर यहां की सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई तो धरोहर के लिए संकट खड़ा हो सकता है। चूंकि यहां से निकलने वाली ऐतिहासिक चीजों की बाहर काफी कीमत है। ऐसे में स्वार्थ की भावना रखते हुए इसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है। चूंकि यहां कुषाण काल की अमूल्य वस्तुएं हैं। संवाद
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पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच व पुरातत्व विभाग की उप निदेशक बनानी भट्टाचार्य ने बताया कि यह साइट सरस्वती के किनारे प्राचीन कुषाण काल की है। अब इस जगह को हरियाणा सरस्वती बोर्ड व पुरातत्व विभाग इसको पर्यटन के लिए तैयार करेगा। इस दिशा में काफी तेजी से काम शुरू भी कर दिया गया है। यहां अब तक कुषाण काल के मृद भांड, प्राचीन मूर्तियां व सिक्के मिल चुके हैं। यहां से निकल रही सरस्वती नदी हरियाणा की सबसे प्राचीन नदी है। इस नदी से लोगों को पीने का पानी मिलता था जिसके कारण इस नदी के किनारे ही लोग बसते थे। इसलिए प्राचीन ग्रंथों में सरस्वती नदीं को सभ्यता, शिक्षा व संस्कारों की जन्नी कहा जाता है।
कुषाण और गुर्जर प्रतिहार के समय का होगी सामग्री
उधर, पुरातत्व विभाग की उप निदेशक बनानी भट्टाचार्य के मुताबिक गांव संधाए में अब जो प्राचीन सामग्री मिल रही है। वह कुषाण काल व गुर्जर प्रतिहार के समय की हो सकती है, क्योंकि उस दौरान कुषाण काल व गुर्जर प्रतिहार का ही समय था। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग की टीम ने सफाई करके व जांच करने के बाद ही जो सिक्के निकाले, उससे पता लग जाएगा वह किस समय के रहे होंगे। बनानी भट्टाचार्य के अनुसार गांव संधाएं में सिक्कों व प्राचीन समान के मिलने के बाद जल्द ही पुरातत्व विभाग इस बारे में आगे काम करेगा। जल्द ही इस क्षेत्र का नाम ऐतिहासिक दृष्टि से उभरेगा।