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Yamuna Nagar News: जिंदगी बचाने के बजाय धूल फांक रहे वेंटिलेटर
Wed, 24 Jul 2024 06:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 24 Jul 2024 06:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होकर लोग तड़प रहे हैं। वहीं जीवन रक्षक कहे जाने वाले वेंटिलेटर स्वास्थ्य विभाग के स्टोर में धूल फांक रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार से जिले में स्वास्थ्य विभाग को 40 वेंटिलेटर मिले थे। साढ़े चार साल में आज तक एक भी वेंटिलेटर का इस्तेमाल नहीं किया। इसका खामियाजा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज भुगत रहे हैं।
मार्च 2020 में जब कोरोना महामारी ने पूरी तरह से पांव पसार लिए थे, तब हर किसी को अपनों के खोने का डर सता रहा था। सांस लेने में दिक्कत और हालत में सुधार नहीं होने पर मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों के वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था। भविष्य में भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए केंद्र सरकार ने पीएम केयर फंड से जिले में 40 वेंटिलेटर भेजे थे। स्वास्थ्य विभाग ने तब से इन्हें एक बार भी चलाकर नहीं देखा गया। कोरोना महामारी के दौरान केवल सात वेंटिलेटर को ही चलाया गया था। 31 वेंटिलेटर तो केवल मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में रखे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनमें से केवल 25 वेंटिलेटर ही चल रहे हैं। बाकी की देखरेख न किए जाने के कारण खराब हो गए।
एक वेंटिलेटरकी कीमत आठ से 10 लाख रुपये बताई जा रही है। पीएम केयर फंड से जो वेंटिलेटर मिले थे यदि वह खराब हो जाते हैं तो उन्हें ठीक करने की जिम्मेदारी इन्हें बनाने वाली कंपनी की थी। इनकी गारंटी एक साल की थी। इनकी गारंटी और वारंटी अस्पताल के स्टोर में पड़े-पड़े ही निकल गई। जब यह वेंटिलेटर आए थे तब भी इन्हें चलाकर नहीं देखा गया। गाड़ी से उतारते ही सीधे इन्हें स्टोर में रखवा दिया गया। ऐसे में जो वेंटिलेटर खराब हैं, अब उन्हें अपने स्तर पर ही स्वास्थ्य विभाग को ठीक करवाना पड़ेगा।
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गुणवत्ता पर भी उठ रहे सवाल
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वेंटिलेटर की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। इनका सॉफ्टवेयर भी अपडेट नहीं हुआ। 10 से 12 वेंटिलेटर तो ऐसे हैं जो न तो बच्चों को लगाए जा सकते हैं और न ही बड़ों को। वहीं जो वेंटिलेटर ठीक हैं, उन्हें भी कभी चलाया नहीं गया। वेंटिलेटर का इस्तेमाल न होने के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
पीएम केयर फंड से जो वेंटिलेटर आए थे, उनका इस्तेमाल कोरोना महामारी के दौरान किया गया था। छह वेंटिलेटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब जरूरत कम पड़ती है, इसलिए वेंटिलेटर नहीं चलाए जा रहे हैं। - डॉ. मंजीत सिंह, सिविल सर्जन यमुनानगर।
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यमुनानगर। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होकर लोग तड़प रहे हैं। वहीं जीवन रक्षक कहे जाने वाले वेंटिलेटर स्वास्थ्य विभाग के स्टोर में धूल फांक रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान केंद्र सरकार से जिले में स्वास्थ्य विभाग को 40 वेंटिलेटर मिले थे। साढ़े चार साल में आज तक एक भी वेंटिलेटर का इस्तेमाल नहीं किया। इसका खामियाजा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज भुगत रहे हैं।
मार्च 2020 में जब कोरोना महामारी ने पूरी तरह से पांव पसार लिए थे, तब हर किसी को अपनों के खोने का डर सता रहा था। सांस लेने में दिक्कत और हालत में सुधार नहीं होने पर मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों के वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था। भविष्य में भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए केंद्र सरकार ने पीएम केयर फंड से जिले में 40 वेंटिलेटर भेजे थे। स्वास्थ्य विभाग ने तब से इन्हें एक बार भी चलाकर नहीं देखा गया। कोरोना महामारी के दौरान केवल सात वेंटिलेटर को ही चलाया गया था। 31 वेंटिलेटर तो केवल मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में रखे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनमें से केवल 25 वेंटिलेटर ही चल रहे हैं। बाकी की देखरेख न किए जाने के कारण खराब हो गए।
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एक वेंटिलेटरकी कीमत आठ से 10 लाख रुपये बताई जा रही है। पीएम केयर फंड से जो वेंटिलेटर मिले थे यदि वह खराब हो जाते हैं तो उन्हें ठीक करने की जिम्मेदारी इन्हें बनाने वाली कंपनी की थी। इनकी गारंटी एक साल की थी। इनकी गारंटी और वारंटी अस्पताल के स्टोर में पड़े-पड़े ही निकल गई। जब यह वेंटिलेटर आए थे तब भी इन्हें चलाकर नहीं देखा गया। गाड़ी से उतारते ही सीधे इन्हें स्टोर में रखवा दिया गया। ऐसे में जो वेंटिलेटर खराब हैं, अब उन्हें अपने स्तर पर ही स्वास्थ्य विभाग को ठीक करवाना पड़ेगा।
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गुणवत्ता पर भी उठ रहे सवाल
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वेंटिलेटर की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। इनका सॉफ्टवेयर भी अपडेट नहीं हुआ। 10 से 12 वेंटिलेटर तो ऐसे हैं जो न तो बच्चों को लगाए जा सकते हैं और न ही बड़ों को। वहीं जो वेंटिलेटर ठीक हैं, उन्हें भी कभी चलाया नहीं गया। वेंटिलेटर का इस्तेमाल न होने के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
पीएम केयर फंड से जो वेंटिलेटर आए थे, उनका इस्तेमाल कोरोना महामारी के दौरान किया गया था। छह वेंटिलेटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब जरूरत कम पड़ती है, इसलिए वेंटिलेटर नहीं चलाए जा रहे हैं। - डॉ. मंजीत सिंह, सिविल सर्जन यमुनानगर।