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Yamuna Nagar News: 1972 में रामलीला का मंचन देखने ट्रॉलियों से पहुंचते थे दर्शक
Sat, 28 Sep 2024 04:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 28 Sep 2024 04:53 AM IST
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राहुल शर्मा
जगाधरी।
घरों से चुनरियां, चादरें व अन्य सामान जुटाया गया। स्टेज से लेकर कलाकारों के पोशाक व हथियार तैयार हुए, तब जगाधरी के गोशाला ग्राउंड में डॉ. जुगल किशोर और प्रेम बावरा ने साथियों के साथ मिलकर पहली बार रामलीला का मंचन किया। उस दौरान रामलीला देखने के लिए दर्शक ट्रालियों में बैठकर पहुंचे थे। यह बात 1972 की रामलीला की है। इनमें डॉ. जुगल किशोर के देहांत के बाद जनरल डायरेक्टर प्रेम बावरा अब भी लगातार 53 वर्षों से रामलीला का मंचन करवा रहे हैं।
प्रेम बावरा रामलीला मंचन की स्मृतियों को याद कर बताते हैं कि 40-50 साल पहले रामलीला मंचन के लिए संसाधन कम थे। उस दौरान जब टीवी-मोबाइल नहीं थे, तब मंचन देखने लोग ट्रालियों में भरकर पहुंचते थे। अब मंचन के संसाधन बढ़े हैं, पर दर्शक पहले की तुलना में घटे हैं। शुरुआत में दो से ढाई हजार तक लोग पहुंचते थे, वहीं अब आबादी बढ़ने के बावजूद संख्या एक हजार से 1500 तक रहती है। पहले दर्शक जमीन पर बैठकर मंचन देखते थे, पर अब उनके लिए सोफे-कुर्सियां लगाई जाती हैं।
कुर्सियां शुरुआत में 500 और कुछ दिन में दर्शक बढ़ने पर एक हजार तक हो जाती हैं। पहले देर रात दो से तीन बजे तक मंचन चलता था, वहीं अब रात 11 साढ़े 11 बजे तक चलता है। बावरा ने बताया कि मंचन का उद्देश्य रामलीला के संदेश को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचाने का है, इसलिए इसकी शुरुआत की थी। हर वर्ष साथ जुड़े सहयोगियों के साथ श्री शारदा रामलीला ड्रामेटिक कमेटी का गठन किया गया। इसमें कुल 213 सदस्य हैं। प्रेम बावरा प्रसिद्ध पेंटर हैं, वे अपने यहां रामलीला के मंचन के साथ ही शहर की अन्य रामलीला के मंचन के लिए भी स्टेज तैयार कराते हैं। खुद भी कई बार अलग-अलग किरदार में मंचन कर चुके हैं और कई वर्षों से कलाकारों को रिहर्सल से लेकर मंचन करवा रहे हैं। माह भर चली रिहर्सल के बाद अब कलाकार मंचन के तैयार हैं।
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पहले गोशाला ग्राउंड, अब पुराना अनाज मंडी में मंचन-
पहले कमेटी की ओर से रामलीला मंचन जगाधरी के गोशाला ग्राउंड में कराया जाता था, पर गत दस वर्षों से पुरानी अनाज मंडी (जड़ौदा गेट) में कराया जा रहा है। स्टेज पर अभिनय और उसे देखने वाली लगातार दूसरी-तीसरी पीढ़ी है, जिसे मंचन से जोड़े रखने के लिए हर वर्ष कमेटी की ओर से कुछ नया किया जा रहा है। इस बार तीन अक्तूबर को राम विवाह व 12 अक्तूबर को दशहरा पर शोभायात्रा निकाली जा रही है। साथ ही 13 अक्तूबर को श्री श्याम महोत्सव, 15 अक्तूबर को श्रीराम राज्याभिषेक कार्यक्रम होंगे। 26 सितंबर को ध्वजारोहण और 27 सितंबर को नारद मोह लीला से मंचन का आगाज कर दिया गया है। शनिवार (आज) सीता जन्म, पृथ्वी पुकार व राम जन्म संवाद का मंचन होगा। इस बार भी गत वर्ष की तरह 32 फीट चौड़ी थ्री इन वन स्टेज है। इस पर तीन पर्दे हैं, जिसकी मदद से बिना रोके एक के बाद दूसरा संवाद दिखाया जा सकेगा। साथ ही तीन स्टेज होने से सामने पंडाल में कोने कोने तक बैठे दर्शक को मंचन देखने में आसानी होगी।
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जगाधरी।
घरों से चुनरियां, चादरें व अन्य सामान जुटाया गया। स्टेज से लेकर कलाकारों के पोशाक व हथियार तैयार हुए, तब जगाधरी के गोशाला ग्राउंड में डॉ. जुगल किशोर और प्रेम बावरा ने साथियों के साथ मिलकर पहली बार रामलीला का मंचन किया। उस दौरान रामलीला देखने के लिए दर्शक ट्रालियों में बैठकर पहुंचे थे। यह बात 1972 की रामलीला की है। इनमें डॉ. जुगल किशोर के देहांत के बाद जनरल डायरेक्टर प्रेम बावरा अब भी लगातार 53 वर्षों से रामलीला का मंचन करवा रहे हैं।
प्रेम बावरा रामलीला मंचन की स्मृतियों को याद कर बताते हैं कि 40-50 साल पहले रामलीला मंचन के लिए संसाधन कम थे। उस दौरान जब टीवी-मोबाइल नहीं थे, तब मंचन देखने लोग ट्रालियों में भरकर पहुंचते थे। अब मंचन के संसाधन बढ़े हैं, पर दर्शक पहले की तुलना में घटे हैं। शुरुआत में दो से ढाई हजार तक लोग पहुंचते थे, वहीं अब आबादी बढ़ने के बावजूद संख्या एक हजार से 1500 तक रहती है। पहले दर्शक जमीन पर बैठकर मंचन देखते थे, पर अब उनके लिए सोफे-कुर्सियां लगाई जाती हैं।
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कुर्सियां शुरुआत में 500 और कुछ दिन में दर्शक बढ़ने पर एक हजार तक हो जाती हैं। पहले देर रात दो से तीन बजे तक मंचन चलता था, वहीं अब रात 11 साढ़े 11 बजे तक चलता है। बावरा ने बताया कि मंचन का उद्देश्य रामलीला के संदेश को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचाने का है, इसलिए इसकी शुरुआत की थी। हर वर्ष साथ जुड़े सहयोगियों के साथ श्री शारदा रामलीला ड्रामेटिक कमेटी का गठन किया गया। इसमें कुल 213 सदस्य हैं। प्रेम बावरा प्रसिद्ध पेंटर हैं, वे अपने यहां रामलीला के मंचन के साथ ही शहर की अन्य रामलीला के मंचन के लिए भी स्टेज तैयार कराते हैं। खुद भी कई बार अलग-अलग किरदार में मंचन कर चुके हैं और कई वर्षों से कलाकारों को रिहर्सल से लेकर मंचन करवा रहे हैं। माह भर चली रिहर्सल के बाद अब कलाकार मंचन के तैयार हैं।
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पहले गोशाला ग्राउंड, अब पुराना अनाज मंडी में मंचन-
पहले कमेटी की ओर से रामलीला मंचन जगाधरी के गोशाला ग्राउंड में कराया जाता था, पर गत दस वर्षों से पुरानी अनाज मंडी (जड़ौदा गेट) में कराया जा रहा है। स्टेज पर अभिनय और उसे देखने वाली लगातार दूसरी-तीसरी पीढ़ी है, जिसे मंचन से जोड़े रखने के लिए हर वर्ष कमेटी की ओर से कुछ नया किया जा रहा है। इस बार तीन अक्तूबर को राम विवाह व 12 अक्तूबर को दशहरा पर शोभायात्रा निकाली जा रही है। साथ ही 13 अक्तूबर को श्री श्याम महोत्सव, 15 अक्तूबर को श्रीराम राज्याभिषेक कार्यक्रम होंगे। 26 सितंबर को ध्वजारोहण और 27 सितंबर को नारद मोह लीला से मंचन का आगाज कर दिया गया है। शनिवार (आज) सीता जन्म, पृथ्वी पुकार व राम जन्म संवाद का मंचन होगा। इस बार भी गत वर्ष की तरह 32 फीट चौड़ी थ्री इन वन स्टेज है। इस पर तीन पर्दे हैं, जिसकी मदद से बिना रोके एक के बाद दूसरा संवाद दिखाया जा सकेगा। साथ ही तीन स्टेज होने से सामने पंडाल में कोने कोने तक बैठे दर्शक को मंचन देखने में आसानी होगी।