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Yamuna Nagar News: आज भी याद है ब्लैक आउट का पहला दिन, घरों में दुबके थे लोग
Thu, 07 May 2026 03:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 07 May 2026 03:04 AM IST
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बलकार सिंह
जगाधरी। सात मई का दिन इतिहास में साहस की अमिट इबारत के रूप में दर्ज है। एक साल पहले जब ऑपरेशन सिंदूर के जरिए दुश्मनों को करारा जवाब दिया गया, तो सीमा पर ही नहीं, बल्कि देश के हर कोने में देशभक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा था। उस युद्ध की गूंज ऐसी थी कि जिले में ब्लैक आउट रहा और सायरन की आवाज ने लोगों को सतर्क कर दिया। उस नाजुक घड़ी में हमारे पूर्व सैनिकों ने अपनी वर्दी की आन को फिर से जीवंत कर दिया। उम्र की परवाह किए बिना वे न केवल मोर्चे पर लोहा लेने को तैयार थे, बल्कि समाज के लिए सुरक्षा कवच भी बन गए। कहीं वे लोगों को सुरक्षित ठिकानों की जानकारी दे रहे थे, तो कहीं युद्धकालीन स्थितियों में जीने का हौसला बढ़ा रहे थे।
पूर्व सैनिकों के साथ व्यापारी भी इसमें सहयोग कर रहे थे। सायरन बजते ही बाजार बाजार बंद हो जाते थे। प्रशासन के आदेशानुसार व्यापारियों ने निर्धारित समय तक दुकानें खोलीं। यही नहीं दुकानदारों ने लोगों व प्रशासन के साथ पूरा सहयोग किया। इस दौरान दुकानदारों ने लोगों को आवश्यक सामग्री की आपूर्ति के लिए विशेष टीम बनाई थी। वहीं, अस्पताल के पास दूध, बिस्किट सहित अन्य सामग्री का प्रबंध कर दिया था, ताकि दिक्कत हो। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर लोग वह समय याद कर अपने अनुभव सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं।
आज भी सीमा पर जाने को तैयार : बलकार सिंह
ग्राम सचिव एवं पूर्व सैनिक गांव रत्तूवाला निवासी बलकार सिंह का कहना है कि एक साल पहले जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध जैसी स्थिति बनी थी, तब माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण था, लेकिन देशभक्ति का जज्बा भी चरम पर था। अगर जरूरत पड़ी तो हम फिर से सीमा पर जाकर देश की रक्षा के लिए तैयार हैं। उस समय गांवों में ब्लैकआउट और सायरन से लोगों में डर जरूर था, लेकिन हमने लोगों को संयम बनाए रखने और सुरक्षा उपायों का पालन करने के लिए जागरूक कर रहे थे।
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चारों तरफ अनिश्चितता का माहौल था : जरनैल सिंह
गांव शाहपुर 302 के सरपंच एवं पूर्व सैनिक जरनैल सिंह का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के समय जो हालात बने थे, वे हम सभी के लिए एक परीक्षा की घड़ी थी। चारों तरफ अनिश्चितता थी, लेकिन हमारे अंदर देश की रक्षा का जज्बा और मजबूत हो गया था। पूर्व सैनिक होने के नाते हमने प्रशासन के साथ मिलकर लोगों को सतर्क रहने, ब्लैकआउट के नियमों का पालन करने और आपात स्थिति में क्या करना है, इसकी जानकारी दी। हमने यह भी सुनिश्चित किया कि गांव में कोई अफवाह न फैले। उस समय हर व्यक्ति एकजुट नजर आ रहा था। आज भी वही भावना कायम है।
वर्षगांठ हर भारतीय के लिए जीत का उत्सव : मित्तल
उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष संजय मित्तल ने बताया कि कारगिल युद्ध के 26 वर्ष बाद ऐसा समय उन्होंने देखा था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सूरज डूबने के साथ कारोबारी दुकानें बंद करने लग जाते थे। सात मई को दिन ढलने के साथ ही लोग घरों में दुबक गए थे। व्यापारी हर स्थिति पर नजर बनाए हुए थे, ताकि आवश्यकता पर जरूरी वस्तुएं पहुंचाई जा सके। दिन ढलने के साथ ही बाजार की लाइटें बंद हो जाती थी। शाम को बाजार बंद होने लगते थे, आठ बजे के बाद शहर के बाजार सुनसान हो जाते थे। यह मंजर हमेशा याद रहेगा। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ हर भारतीय के लिए जीत का उत्सव है।
कारोबारियों ने किया बराबर सहयोग : बिहानी
दी हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन प्रधान जेके बिहानी ने बताया कि ब्लैकआउट के दौरान यमुनानगर की सभी औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों में काम पूरी तरह से बंद कर दिया गया। उद्यमियों ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए अपने शोरूम और दुकानों की लाइटें बंद कर दीं, जिससे सुरक्षा अभ्यास को प्रभावी बनाया जा सके। शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र सिटी मॉल पर मॉक ड्रिल की गई, जिसमें उद्यमियों व कारोबारियों ने बराबर सहयोग किया। व्यापारियों ने प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी रात आठ बजे से सुबह पांच बजे तक के ब्लैक आउट का पालन किया।
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पूर्व सैनिकों के साथ व्यापारी भी इसमें सहयोग कर रहे थे। सायरन बजते ही बाजार बाजार बंद हो जाते थे। प्रशासन के आदेशानुसार व्यापारियों ने निर्धारित समय तक दुकानें खोलीं। यही नहीं दुकानदारों ने लोगों व प्रशासन के साथ पूरा सहयोग किया। इस दौरान दुकानदारों ने लोगों को आवश्यक सामग्री की आपूर्ति के लिए विशेष टीम बनाई थी। वहीं, अस्पताल के पास दूध, बिस्किट सहित अन्य सामग्री का प्रबंध कर दिया था, ताकि दिक्कत हो। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर लोग वह समय याद कर अपने अनुभव सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं।
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आज भी सीमा पर जाने को तैयार : बलकार सिंह
ग्राम सचिव एवं पूर्व सैनिक गांव रत्तूवाला निवासी बलकार सिंह का कहना है कि एक साल पहले जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध जैसी स्थिति बनी थी, तब माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण था, लेकिन देशभक्ति का जज्बा भी चरम पर था। अगर जरूरत पड़ी तो हम फिर से सीमा पर जाकर देश की रक्षा के लिए तैयार हैं। उस समय गांवों में ब्लैकआउट और सायरन से लोगों में डर जरूर था, लेकिन हमने लोगों को संयम बनाए रखने और सुरक्षा उपायों का पालन करने के लिए जागरूक कर रहे थे।
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चारों तरफ अनिश्चितता का माहौल था : जरनैल सिंह
गांव शाहपुर 302 के सरपंच एवं पूर्व सैनिक जरनैल सिंह का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के समय जो हालात बने थे, वे हम सभी के लिए एक परीक्षा की घड़ी थी। चारों तरफ अनिश्चितता थी, लेकिन हमारे अंदर देश की रक्षा का जज्बा और मजबूत हो गया था। पूर्व सैनिक होने के नाते हमने प्रशासन के साथ मिलकर लोगों को सतर्क रहने, ब्लैकआउट के नियमों का पालन करने और आपात स्थिति में क्या करना है, इसकी जानकारी दी। हमने यह भी सुनिश्चित किया कि गांव में कोई अफवाह न फैले। उस समय हर व्यक्ति एकजुट नजर आ रहा था। आज भी वही भावना कायम है।
वर्षगांठ हर भारतीय के लिए जीत का उत्सव : मित्तल
उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष संजय मित्तल ने बताया कि कारगिल युद्ध के 26 वर्ष बाद ऐसा समय उन्होंने देखा था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सूरज डूबने के साथ कारोबारी दुकानें बंद करने लग जाते थे। सात मई को दिन ढलने के साथ ही लोग घरों में दुबक गए थे। व्यापारी हर स्थिति पर नजर बनाए हुए थे, ताकि आवश्यकता पर जरूरी वस्तुएं पहुंचाई जा सके। दिन ढलने के साथ ही बाजार की लाइटें बंद हो जाती थी। शाम को बाजार बंद होने लगते थे, आठ बजे के बाद शहर के बाजार सुनसान हो जाते थे। यह मंजर हमेशा याद रहेगा। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ हर भारतीय के लिए जीत का उत्सव है।
कारोबारियों ने किया बराबर सहयोग : बिहानी
दी हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन प्रधान जेके बिहानी ने बताया कि ब्लैकआउट के दौरान यमुनानगर की सभी औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों में काम पूरी तरह से बंद कर दिया गया। उद्यमियों ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए अपने शोरूम और दुकानों की लाइटें बंद कर दीं, जिससे सुरक्षा अभ्यास को प्रभावी बनाया जा सके। शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र सिटी मॉल पर मॉक ड्रिल की गई, जिसमें उद्यमियों व कारोबारियों ने बराबर सहयोग किया। व्यापारियों ने प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी रात आठ बजे से सुबह पांच बजे तक के ब्लैक आउट का पालन किया।

बलकार सिंह

बलकार सिंह

बलकार सिंह