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Yamuna Nagar News: धरने पर आंगनबाड़ी वर्कर, बच्चों को परोसा जा रहा कच्चा राशन
Thu, 17 Sep 2026 03:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 17 Sep 2026 03:16 AM IST
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सीडीपीओ कार्यालय में धरने पर बैठी आंगनबाड़ी वर्कर। संवाद
यमुनानगर। जीपीएस व्यवस्था लागू करने के विरोध में आंगनबाड़ी वर्कर-हेल्पर यूनियन का सीडीपीओ कार्यालय के बाहर धरना बुधवार को भी जारी रहा। धरने पर बैठी वर्करों ने विभाग पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाने और विभिन्न मदों का भुगतान लंबे समय से लंबित रखने के आरोप लगाए।
वर्करों का कहना है कि वर्ष 2023 से सिलिंडर के पैसे नहीं मिले हैं। ऐसे में केंद्रों पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए खाना तैयार करने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है जब से धरना चल रहा है तब से गर्भवतियों व बच्चों को कच्चा ही राशन दिया जा रहा है।
जिला उपप्रधान अंग्रेजो देवी, जगाधरी ब्लॉक प्रधान सुनीता, रीटा कत्याल और जिला प्रेस प्रवक्ता रितु गुप्ता ने कहा कि एक ओर विभाग वर्करों पर समय की पाबंदी और जीपीएस व्यवस्था लागू करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। वर्करों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से सिलिंडर की राशि लंबित है। केंद्रों पर भोजन तैयार करने के लिए गैस की जरूरत होती है। भुगतान नहीं मिलने के कारण कई बार वर्करों को अपने स्तर पर व्यवस्था करनी पड़ती है। वर्करों के अनुसार किराये पर चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों का मासिक किराया करीब तीन से चार हजार रुपये है। करीब डेढ़ वर्ष से कई केंद्रों का किराया नहीं मिला है।
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सुनीता देवी ने सवाल उठाया कि जब वर्कर अपनी जेब से किराया भरती हैं तो विभाग किराये की राशि सीधे भवन मालिकों के खाते में क्यों नहीं भेजता। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कई आंगनबाड़ी केंद्रों में स्टेशनरी, फर्नीचर, टेबल और कुर्सियों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कुछ वर्कर घर से फर्नीचर लाकर केंद्रों पर काम चला रही हैं। विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए कई भवन क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन उनकी मरम्मत के लिए राशि नहीं मिल रही। मौके पर कुसुम, सुरजीत, पायल, सिमरन, कमलेश, रेनू बाला, माधुरी, ज्योति, सुरूचि, वंदना, निर्मल, सुधा, रूमन, आशा, श्वेता, आरती, सुमित, राजरानी, गुलशन, अनीता और रवि मौजूद रहे।
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वर्करों का कहना है कि वर्ष 2023 से सिलिंडर के पैसे नहीं मिले हैं। ऐसे में केंद्रों पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए खाना तैयार करने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है जब से धरना चल रहा है तब से गर्भवतियों व बच्चों को कच्चा ही राशन दिया जा रहा है।
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जिला उपप्रधान अंग्रेजो देवी, जगाधरी ब्लॉक प्रधान सुनीता, रीटा कत्याल और जिला प्रेस प्रवक्ता रितु गुप्ता ने कहा कि एक ओर विभाग वर्करों पर समय की पाबंदी और जीपीएस व्यवस्था लागू करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। वर्करों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से सिलिंडर की राशि लंबित है। केंद्रों पर भोजन तैयार करने के लिए गैस की जरूरत होती है। भुगतान नहीं मिलने के कारण कई बार वर्करों को अपने स्तर पर व्यवस्था करनी पड़ती है। वर्करों के अनुसार किराये पर चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों का मासिक किराया करीब तीन से चार हजार रुपये है। करीब डेढ़ वर्ष से कई केंद्रों का किराया नहीं मिला है।
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सुनीता देवी ने सवाल उठाया कि जब वर्कर अपनी जेब से किराया भरती हैं तो विभाग किराये की राशि सीधे भवन मालिकों के खाते में क्यों नहीं भेजता। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कई आंगनबाड़ी केंद्रों में स्टेशनरी, फर्नीचर, टेबल और कुर्सियों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कुछ वर्कर घर से फर्नीचर लाकर केंद्रों पर काम चला रही हैं। विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए कई भवन क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन उनकी मरम्मत के लिए राशि नहीं मिल रही। मौके पर कुसुम, सुरजीत, पायल, सिमरन, कमलेश, रेनू बाला, माधुरी, ज्योति, सुरूचि, वंदना, निर्मल, सुधा, रूमन, आशा, श्वेता, आरती, सुमित, राजरानी, गुलशन, अनीता और रवि मौजूद रहे।