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Yamuna Nagar News: हनुमानजी ने जलाई लंका, गूंजा जय श्रीराम
Tue, 30 Sep 2025 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 30 Sep 2025 01:59 AM IST
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व्यासपुर में आयोजित रामलीला में अभियन करते कलाकार। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। श्री वेद व्यास रामलीला एवं दशहरा कमेटी की ओर से काली माता मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला में रविवार रात सीता-हनुमान मिलन और लंका दहन का मंचन किया गया। लंका दहन होते ही परिसर जय श्रीराम से गूंज उठा।
कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि भगवान श्रीराम जी की सेना समुद्र के किनारे पहुंच जाती है। प्रभु श्रीराम अपने भक्त हनुमानजी को रावण को अंतिम चेतावनी देने व सीता जी का हाल जानने के लिए भेजते हैं। हनुमानजी समुद्र के ऊपर से जा रहे होते हैं तो आगे बढ़ने पर सुरसा हनुमानजी का रास्ता रोक लेती है। सुरसा उनकी बुद्धि की प्रशंसा करने के साथ ही रामकाज पूर्ण करने का आशीर्वाद देती है।
हनुमानजी को रेस मच्छर रूप धारण कर लंका में प्रवेश करते ही सुरक्षा में तैनात लंकिनी उनका रास्ता रोकती हैं। हनुमानजी के एक वार से ही लंकिनी मुख से खून उगल देती है। कुटिया से राम-राम की आवाज सुन हनुमानजी अंदर जाते हैं और सामने विभीषण को पाते हैं। ब्राह्मण वेष हनुमानजी का परिचय पाते ही विभीषण प्रणाम करते हैं और माता सीता का पता बताते हैं।
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सीता की खोज में निकले है। हनुमानजी ने विभीषण से सीता का पता जानकर अशोक वाटिका में प्रवेश किया। जहां सीता को श्रीराम की दी हुई मुद्रिका देकर अपना परिचय दिया। फिर सीता की आज्ञा से अशोक वाटिका के फल खाने के बहाने हनुमानजी ने वृक्षों को तोड़ना शुरू कर दिया और राक्षकों को मारकर भगा दिया।
ये सुनकर रावण अपने पुत्र अक्षय कुमार को सैनिकों के साथ वहां भेजते है। हनुमानजी उसका वध कर देते हैं। रावण ज्येष्ठ पुत्र मेघनाद को भेजता है। श्रीराम का कार्य करने की इच्छा से हनुमानजी स्वयं को मेघनाद के बंधन में स्वीकार कर रावण के समक्ष पहुंचते हैं। रावण के आदेश से हनुमानजी की पूंछ में तेल युक्त कपड़े बांधकर आग लगा दी जाती है। हनुमानजी इससे लंका को जला डालते हैं। इस मौके पर प्रदीप शर्मा, मुकेश बंसल, चंद्रमोहन कटारिया, प्रमोद वर्मा, राजेश शर्मा, मेघनाथ शर्मा, अरूण ढंडाल, विपिन सिंगला, सूरजभान सैनी, सचिन ढंडाल मौजूद रहे।
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व्यासपुर। श्री वेद व्यास रामलीला एवं दशहरा कमेटी की ओर से काली माता मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला में रविवार रात सीता-हनुमान मिलन और लंका दहन का मंचन किया गया। लंका दहन होते ही परिसर जय श्रीराम से गूंज उठा।
कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि भगवान श्रीराम जी की सेना समुद्र के किनारे पहुंच जाती है। प्रभु श्रीराम अपने भक्त हनुमानजी को रावण को अंतिम चेतावनी देने व सीता जी का हाल जानने के लिए भेजते हैं। हनुमानजी समुद्र के ऊपर से जा रहे होते हैं तो आगे बढ़ने पर सुरसा हनुमानजी का रास्ता रोक लेती है। सुरसा उनकी बुद्धि की प्रशंसा करने के साथ ही रामकाज पूर्ण करने का आशीर्वाद देती है।
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हनुमानजी को रेस मच्छर रूप धारण कर लंका में प्रवेश करते ही सुरक्षा में तैनात लंकिनी उनका रास्ता रोकती हैं। हनुमानजी के एक वार से ही लंकिनी मुख से खून उगल देती है। कुटिया से राम-राम की आवाज सुन हनुमानजी अंदर जाते हैं और सामने विभीषण को पाते हैं। ब्राह्मण वेष हनुमानजी का परिचय पाते ही विभीषण प्रणाम करते हैं और माता सीता का पता बताते हैं।
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सीता की खोज में निकले है। हनुमानजी ने विभीषण से सीता का पता जानकर अशोक वाटिका में प्रवेश किया। जहां सीता को श्रीराम की दी हुई मुद्रिका देकर अपना परिचय दिया। फिर सीता की आज्ञा से अशोक वाटिका के फल खाने के बहाने हनुमानजी ने वृक्षों को तोड़ना शुरू कर दिया और राक्षकों को मारकर भगा दिया।
ये सुनकर रावण अपने पुत्र अक्षय कुमार को सैनिकों के साथ वहां भेजते है। हनुमानजी उसका वध कर देते हैं। रावण ज्येष्ठ पुत्र मेघनाद को भेजता है। श्रीराम का कार्य करने की इच्छा से हनुमानजी स्वयं को मेघनाद के बंधन में स्वीकार कर रावण के समक्ष पहुंचते हैं। रावण के आदेश से हनुमानजी की पूंछ में तेल युक्त कपड़े बांधकर आग लगा दी जाती है। हनुमानजी इससे लंका को जला डालते हैं। इस मौके पर प्रदीप शर्मा, मुकेश बंसल, चंद्रमोहन कटारिया, प्रमोद वर्मा, राजेश शर्मा, मेघनाथ शर्मा, अरूण ढंडाल, विपिन सिंगला, सूरजभान सैनी, सचिन ढंडाल मौजूद रहे।