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Yamuna Nagar News: किसानों ने पकड़े दूसरे राज्यों के चावल से भरे तीन ट्रक
Tue, 28 Oct 2025 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 28 Oct 2025 01:29 AM IST
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साढौरा में किसानों की ओर से पकड़ा गया चावल से भरा ट्रक। भाकियू
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर/साढौरा। दूसरे राज्यों से सस्ता चावल लाकर फर्जीवाड़ा करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के सदस्यों ने रविवार रात पहरा देकर साढौरा से चावल से भरे तीन ट्रक पकड़े। ट्रकों में भरा चावल उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश से लाया गया था। इस दौरान एक ट्रक का चालक ट्रक को वहीं छोड़ कर भाग गया।
भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव सैनी ने बताया कि साढौरा, रसूलपुर मंडियों में दूसरे प्रदेश से आ रहे धान की आवक रोकने के लिए रविवार रात को उनकी टीम ने दोसड़का चौक पर पहरा दे रखा था। इस टीम में बलबीर सैनी, राम जसपाल, रामकुमार, सुरेंद्र सैनी, सुखविंद्र व गुरुचरण सिंह ढिल्लो शामिल रहे।
टीम ने रात नौ बजे एक ट्रक को एक कोल्ड स्टोर में खड़ा हुआ पाकर उसकी जांच की तो उसमें चावल लदा हुआ था। उन्हें देखते ही चालक ट्रक छोड़ कर फरार हो गया। चालक का सहायक चावल के कोई कागजात दिखाने से आनाकानी करने लगा। किसानों ने ट्रक को वहीं रोक कर पहरेदारी शुरु कर दी। टीम ने सुबह पांच बजे सरांवा में बराड़ा की तरफ से आए एक ट्रक को रोका तो उसमें भी चावल लदा हुआ था।
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ट्रक चालक की ओर से दिखाए गए कागजात के अनुसार यह चावल यूपी से आया था। इसके बाद कनीपला गांव के पास तीसरे ट्रक को रोका गया तो उसमें भी चावल लदा हुआ था। चालक ने बताया कि यह ट्रक उत्तराखंड से आया था। किसानों ने तीनों ट्रक रोक कर पुलिस व खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को सूचित कर दिया।
ऐसे किया जाता है फर्जीवाड़ा
बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में धान का दाम हरियाणा के मुकाबले कम है।वहां धान व चावल सस्ती दर पर आसानी से मिल जाता है। इसी का फायदा कुछ राइस मिलर उठाते हैं। वह सस्ता चावल मंगवा कर इसे एफसीआई को सप्लाई कर देते हैं। ऐसा करने से राइस मिल संचालक बड़े स्तर पर मुनाफा कमाते हैं। वहीं सरकार से कुटाई के लिए जो धान दिया जाता है उसमें से जो 67 प्रतिशत चावल लौटाना होता है, वह सारा बच जाता है। इस चावल को मशीनों से बारीक करके उसे बाजार में या फिर बड़े व्यापारियों को बेच दिया जाता है। इसके अलावा बाकी बचे 33 प्रतिशत में से जो टूटा हुआ चावल (कनकी) है, उसकी बचत अलग से है।
अधिकारियों की मिलीभगत : मंदीप सिंह
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के निदेशक मंदीप सिंह रोड छप्पर ने बताया कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के यह काम नहीं हो सकता। इसलिए न जांच हो रही है और न ही कार्रवाई। क्योंकि गत सप्ताह भी किसानों ने कलानौर बॉर्डर पर यूपी, बिहार व उत्तराखंड से आए धान व चावल से भरे 150 से ज्यादा ट्रकों को पकड़ा था। परंतु खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने इन ट्रकों को बिना जांच के छोड़ दिया। वह भी तब जब चावल से भरे ट्रकों से मिले बिल जिले की अलग-अलग राइस मिलों के नाम पर कटे हुए थे।
साढौरा में पकड़े गए तीनों ट्रकों के कागजात कब्जे में लेकर उन्हें मंडी परिसर में खड़ा करवा दिया है। ट्रकों से मिले कागजात को संबंधित विभागों को भेजकर जांच करवाई जा रही है। जांच के आधार आगामी कार्रवाई की जाएगी। - विकास कुमार, निरीक्षक, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।
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यमुनानगर/साढौरा। दूसरे राज्यों से सस्ता चावल लाकर फर्जीवाड़ा करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के सदस्यों ने रविवार रात पहरा देकर साढौरा से चावल से भरे तीन ट्रक पकड़े। ट्रकों में भरा चावल उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश से लाया गया था। इस दौरान एक ट्रक का चालक ट्रक को वहीं छोड़ कर भाग गया।
भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव सैनी ने बताया कि साढौरा, रसूलपुर मंडियों में दूसरे प्रदेश से आ रहे धान की आवक रोकने के लिए रविवार रात को उनकी टीम ने दोसड़का चौक पर पहरा दे रखा था। इस टीम में बलबीर सैनी, राम जसपाल, रामकुमार, सुरेंद्र सैनी, सुखविंद्र व गुरुचरण सिंह ढिल्लो शामिल रहे।
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टीम ने रात नौ बजे एक ट्रक को एक कोल्ड स्टोर में खड़ा हुआ पाकर उसकी जांच की तो उसमें चावल लदा हुआ था। उन्हें देखते ही चालक ट्रक छोड़ कर फरार हो गया। चालक का सहायक चावल के कोई कागजात दिखाने से आनाकानी करने लगा। किसानों ने ट्रक को वहीं रोक कर पहरेदारी शुरु कर दी। टीम ने सुबह पांच बजे सरांवा में बराड़ा की तरफ से आए एक ट्रक को रोका तो उसमें भी चावल लदा हुआ था।
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ट्रक चालक की ओर से दिखाए गए कागजात के अनुसार यह चावल यूपी से आया था। इसके बाद कनीपला गांव के पास तीसरे ट्रक को रोका गया तो उसमें भी चावल लदा हुआ था। चालक ने बताया कि यह ट्रक उत्तराखंड से आया था। किसानों ने तीनों ट्रक रोक कर पुलिस व खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को सूचित कर दिया।
ऐसे किया जाता है फर्जीवाड़ा
बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में धान का दाम हरियाणा के मुकाबले कम है।वहां धान व चावल सस्ती दर पर आसानी से मिल जाता है। इसी का फायदा कुछ राइस मिलर उठाते हैं। वह सस्ता चावल मंगवा कर इसे एफसीआई को सप्लाई कर देते हैं। ऐसा करने से राइस मिल संचालक बड़े स्तर पर मुनाफा कमाते हैं। वहीं सरकार से कुटाई के लिए जो धान दिया जाता है उसमें से जो 67 प्रतिशत चावल लौटाना होता है, वह सारा बच जाता है। इस चावल को मशीनों से बारीक करके उसे बाजार में या फिर बड़े व्यापारियों को बेच दिया जाता है। इसके अलावा बाकी बचे 33 प्रतिशत में से जो टूटा हुआ चावल (कनकी) है, उसकी बचत अलग से है।
अधिकारियों की मिलीभगत : मंदीप सिंह
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के निदेशक मंदीप सिंह रोड छप्पर ने बताया कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के यह काम नहीं हो सकता। इसलिए न जांच हो रही है और न ही कार्रवाई। क्योंकि गत सप्ताह भी किसानों ने कलानौर बॉर्डर पर यूपी, बिहार व उत्तराखंड से आए धान व चावल से भरे 150 से ज्यादा ट्रकों को पकड़ा था। परंतु खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने इन ट्रकों को बिना जांच के छोड़ दिया। वह भी तब जब चावल से भरे ट्रकों से मिले बिल जिले की अलग-अलग राइस मिलों के नाम पर कटे हुए थे।
साढौरा में पकड़े गए तीनों ट्रकों के कागजात कब्जे में लेकर उन्हें मंडी परिसर में खड़ा करवा दिया है। ट्रकों से मिले कागजात को संबंधित विभागों को भेजकर जांच करवाई जा रही है। जांच के आधार आगामी कार्रवाई की जाएगी। - विकास कुमार, निरीक्षक, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।