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डिजिटल अरेस्ट से घबराए नहीं, 1930 पर करें शिकायत दर्ज : राजीव देसवाल
Sun, 20 Apr 2025 02:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 20 Apr 2025 02:53 AM IST
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यमुनानगर। यदि आपके बेटे या बेटी का नाम लेकर कहा जाए कि वह कहा है और अगले ही पल पर कहा जाए कि मैं नारकोटिक्स विभाग, सीबीआई या पुलिस से बोल रहा हूं और वह हमारी हिरासत में है। ड्रग्स या अन्य किसी गतिविधि में शामिल होने की वजह से उसे पकड़ा गया है। इसके अलावा आपके नाम विदेश से पार्सल आया और उसमें आपत्तिजनक वस्तु होने की बात कही जाए तो तुरंत सतर्क हो जाए। यह साइबर ठगों का काम हो सकता है। साइबर ठग आपको डिजिटल अरेस्ट कर ठगी का शिकार बना सकते है। इस बारे पुलिस अधीक्षक राजीव देसवाल ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि ऐसे हालात में घबराएं नहीं, सचेत रहे और साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करे। क्योंकि पुलिस या किसी विभाग की तरफ से आपके पास ऐसे कॉल नहीं आते है। यह साइबर ठगों का कार्य है।
पुलिस अधीक्षक देसवाल ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगों द्वारा अपनाया जाने वाला ठगी का नया तरीका है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग किसी सरकारी एजेंसी का अफसर या पुलिस अफसर बनकर वीडियो कॉल करते है। वीडियो कॉल के बैकग्राउंड को किसी पुलिस स्टेशन की तरह बना लिया जाता है। जिसे देखने वाला हर व्यक्ति डर जाता है और उनकी बातों में आ जाता है। इसमें पीड़ित को फोन कर झूठे मामले में पहले काफी डराया जाता है। कहा जाता है कि ऊपर मामला दर्ज किया जा रहा है, जिससे वह डर जाता है। इसमें वीडियो कॉलिंग द्वारा पीड़ित को घर में बंधक बना लिया जाता है। ठगों द्वारा व्यक्ति को 24 घंटे उनके संपर्क में रहने के लिए सर्विलांस पर फोन या वेबसाइट के जरिये नजर रखने की बात कही जाती है। अपराधी इस दौरान आपको वीडियो कॉल से हटने भी नहीं देता है और न ही किसी को कॉल करने देते है। लंबी सजा और बड़े जुर्माने व समाज में अपमान होने के डर से पीड़ित ठगों द्वारा कही हर बात को फॉलो करता है। इस दौरान ठग केस को रफा-दफा करने के लिए पीड़ित से पैसे मांगता है और पीड़ित उसे रकम भी दे देता है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट में पीड़ित को स्काइप के माध्यम से निगरानी में रखा जाता है और ठगी करने के बाद ही उसे मुक्त किया जाता है। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर डिजिटल अरेस्ट की शिकायतों में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स विभाग, सीबीआई विभाग, आरबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों के अधिकारी बताकर धमकी, ब्लैकमेल, जबरन वसूली और डिजिटल अरेस्ट जैसी वारदातों को अंजाम देते है। ऐसे जालसाजों से बचकर रहें और तुरंत शिकायत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करे। संवाद
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