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भक्ति मानव जीवन का परम धर्म : चैतन्य महाराज
Mon, 13 May 2024 05:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 13 May 2024 05:10 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हरि यमुना सहयोग समिति के तत्वाधान में श्री लाल द्वारा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रकाश चैतन्य महाराज ने बताया कि नारद जी को उनके पिता ब्रह्मा ने व ब्रह्मा को भगवान नारायण ने भागवत का उपदेश दिया। भगवान की भक्ति करना ही मानव जीवन का परम धर्म है।
भक्ति ही हमारे अंतकरण में ज्ञान वैराग्य को जन्म देती है, क्योंकि भक्ति ज्ञान बैरागी की जननी है। जब तक जीव भागवत सेवा नहीं करेगा, भगवान की भक्ति नहीं करेगा, तब तक जीवन में किसी प्रकार से कल्याण नहीं होगा। श्री मद् भागवत गीता के जरिए व्यक्ति जीवन की कई समस्याओं का हल खोज सकता है।
गीता में महाभारत युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण ने जो उपदेश दिए थे, वह सभी गीता में बताए गए हैं। श्रीमद्भागवत गीता पवित्र ग्रंथों में से एक हैं। गीता में ज्ञान, भक्ति व कर्म योग को अच्छे ढंग से समझाया गया है। राजा परीक्षित के कारण भागवत कथा पृथ्वी के लोगों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। समाज द्वारा बनाए नियम गलत हो सकते हैं, पर भगवान के नियम न गलत हो सकते हैं और न बदले जा सकते हैं।
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यमुनानगर। हरि यमुना सहयोग समिति के तत्वाधान में श्री लाल द्वारा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रकाश चैतन्य महाराज ने बताया कि नारद जी को उनके पिता ब्रह्मा ने व ब्रह्मा को भगवान नारायण ने भागवत का उपदेश दिया। भगवान की भक्ति करना ही मानव जीवन का परम धर्म है।
भक्ति ही हमारे अंतकरण में ज्ञान वैराग्य को जन्म देती है, क्योंकि भक्ति ज्ञान बैरागी की जननी है। जब तक जीव भागवत सेवा नहीं करेगा, भगवान की भक्ति नहीं करेगा, तब तक जीवन में किसी प्रकार से कल्याण नहीं होगा। श्री मद् भागवत गीता के जरिए व्यक्ति जीवन की कई समस्याओं का हल खोज सकता है।
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गीता में महाभारत युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण ने जो उपदेश दिए थे, वह सभी गीता में बताए गए हैं। श्रीमद्भागवत गीता पवित्र ग्रंथों में से एक हैं। गीता में ज्ञान, भक्ति व कर्म योग को अच्छे ढंग से समझाया गया है। राजा परीक्षित के कारण भागवत कथा पृथ्वी के लोगों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। समाज द्वारा बनाए नियम गलत हो सकते हैं, पर भगवान के नियम न गलत हो सकते हैं और न बदले जा सकते हैं।
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