{"_id":"6702ebd01c90b6cc1d096fa5","slug":"devotees-worshiped-mother-kushmanda-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1020-126481-2024-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: भक्तों ने की मां कुष्मांडा की पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: भक्तों ने की मां कुष्मांडा की पूजा
Mon, 07 Oct 2024 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 07 Oct 2024 01:28 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। शारदीय नवरात्र में रविवार को मां के चतुर्थ स्वरूप कुष्मांडा की पूजा की गई। इस दौरान जय माता दी के जयकारों के साथ मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंदिरों में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था।
मंदिरों में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने मां की प्रतिमा के सम्मुख माता टेका। मां को धूप, दीप, पुष्प, फल, नवैद्य, मिष्ठान इत्यादि अर्पित कर पूजा की। भक्तों ने पूजा कर मां से सुख-समृद्धि का वरदान मांगा। इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ माता रानी के मंदिर के अलावा प्राचीन, ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिरों में देखने को मिली।
नवरात्र के कारण दिनभर मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है। वहीं, प्रात: व संध्या आरती में भारी भीड़ उमड़ रही है। मंदिरों में चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की गई। पुजारियों के अनुसार मां का यह रूप ममता व करुणा का प्रतीक है। मंदिरों के अलावा घरों, दुकानों, कार्यालयों व प्रतिष्ठानों पर भी भक्तों ने मां की पूजा की।
विज्ञापन
इस दौरान जगाधरी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर में देवी भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित श्रीमूर्ति देवी मंदिर, पातालेश्वर महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मठ मंदिर, भंभौली स्थित स्वयं-भू महादेव मंदिर, आदिबद्री केदारनाथ मंदिर, अमादलपुर स्थित सूर्यकुंड मंदिर में भारी भीड़ रही।
पंडित एवं ज्योतिषाचार्य रमन शर्मा ने बताया कि नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवती पुराण में कहा गया है कि नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा करने से ज्ञान व शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मां ज्ञान, इच्छाशक्ति, और कर्म का मिश्रण हैं। जब शिव तत्व का शक्ति के साथ मिलन होता है तो स्कंद यानी कि कार्तिकेय का जन्म होता है।
मां का स्वरूप बेहद ममतामयी है। मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली देवी हैं जो कि स्वामी कार्तिकेय को गोद में लेकर शेर पर विराजमान हैं। मां के दोनों हाथों में कमल शोभायमान हैं। इस रूप में मां समस्त ज्ञान, विज्ञान, धर्म, कर्म और कृषि उद्योग सहित पंच आवरणों से समाहित विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहलाती हैं।
ज्योतिषाचार्य रमन शर्मा ने बताया कि स्कंद माता को पीले रंग की वस्तुएं सबसे प्रिय हैं। उनके भोग में पीले फल और पीली मिठाई अर्पित की जाती है। आप इस दिन केसर की खीर का भोग भी मां के लिए बना सकते हैं। विद्या और बल के लिए मां को पांच हरी इलाइची अर्पित करें और साथ में लौंग का एक जोड़ा भी चढ़ाएं। स्कंदमाता की पूजा में पीले या फिर सुनहरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां का शृंगार पीले फूल से करें और मां को सुनहरे रंग के वस्त्र अर्पित करें और पीले फल चढ़ाएं।
विज्ञापन
जगाधरी। शारदीय नवरात्र में रविवार को मां के चतुर्थ स्वरूप कुष्मांडा की पूजा की गई। इस दौरान जय माता दी के जयकारों के साथ मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंदिरों में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था।
मंदिरों में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने मां की प्रतिमा के सम्मुख माता टेका। मां को धूप, दीप, पुष्प, फल, नवैद्य, मिष्ठान इत्यादि अर्पित कर पूजा की। भक्तों ने पूजा कर मां से सुख-समृद्धि का वरदान मांगा। इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ माता रानी के मंदिर के अलावा प्राचीन, ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिरों में देखने को मिली।
विज्ञापन
नवरात्र के कारण दिनभर मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है। वहीं, प्रात: व संध्या आरती में भारी भीड़ उमड़ रही है। मंदिरों में चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की गई। पुजारियों के अनुसार मां का यह रूप ममता व करुणा का प्रतीक है। मंदिरों के अलावा घरों, दुकानों, कार्यालयों व प्रतिष्ठानों पर भी भक्तों ने मां की पूजा की।
विज्ञापन
इस दौरान जगाधरी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर में देवी भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित श्रीमूर्ति देवी मंदिर, पातालेश्वर महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मठ मंदिर, भंभौली स्थित स्वयं-भू महादेव मंदिर, आदिबद्री केदारनाथ मंदिर, अमादलपुर स्थित सूर्यकुंड मंदिर में भारी भीड़ रही।
पंडित एवं ज्योतिषाचार्य रमन शर्मा ने बताया कि नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवती पुराण में कहा गया है कि नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा करने से ज्ञान व शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मां ज्ञान, इच्छाशक्ति, और कर्म का मिश्रण हैं। जब शिव तत्व का शक्ति के साथ मिलन होता है तो स्कंद यानी कि कार्तिकेय का जन्म होता है।
मां का स्वरूप बेहद ममतामयी है। मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली देवी हैं जो कि स्वामी कार्तिकेय को गोद में लेकर शेर पर विराजमान हैं। मां के दोनों हाथों में कमल शोभायमान हैं। इस रूप में मां समस्त ज्ञान, विज्ञान, धर्म, कर्म और कृषि उद्योग सहित पंच आवरणों से समाहित विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहलाती हैं।
ज्योतिषाचार्य रमन शर्मा ने बताया कि स्कंद माता को पीले रंग की वस्तुएं सबसे प्रिय हैं। उनके भोग में पीले फल और पीली मिठाई अर्पित की जाती है। आप इस दिन केसर की खीर का भोग भी मां के लिए बना सकते हैं। विद्या और बल के लिए मां को पांच हरी इलाइची अर्पित करें और साथ में लौंग का एक जोड़ा भी चढ़ाएं। स्कंदमाता की पूजा में पीले या फिर सुनहरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। मां का शृंगार पीले फूल से करें और मां को सुनहरे रंग के वस्त्र अर्पित करें और पीले फल चढ़ाएं।