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Yamuna Nagar News: सड़कें बनाने में करोड़ों खर्च, गड्ढे भरने में कंजूसी
Mon, 03 Jun 2024 03:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 03 Jun 2024 03:43 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिन सड़कों को बनाने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए, उनके गड्ढे भरने में कंजूसी होती दिख रहीं है। तभी पैचवर्क के बजाय सड़कों के गड्ढों में मिट्टी तो कहीं इंटरलॉक टाइलें भर दी गई। यह नजारा नेहरू पार्क, गोबिंदपुरी, खालसा कॉलेज, व मॉडल टाउन व अन्य रोड पर हैं, वहीं काफी सड़कें पर गड्ढे जस के तस हैं।
यहां पैचवर्क तो दूर उसकी ई-निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं है। इसमें निवर्तमान पार्षद अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आरोप है कि लोकसभा चुनाव व उसकी आचार संहिता का पता होने के बावजूद समय से सड़कों की मरम्मत की ई-निविदा नहीं हुई। इस प्रक्रिया के अधर में होने से लोग गड्ढों पर झटके झेल रहे हैं।
निवर्तमान पार्षदों में वार्ड तीन से हरमीन कोहली, चार से देवेंद्र सिंह, पांच से विनय कांबोज, सात से रामआसरा भारद्वाज, आठ से विनोद मरवाह ने कहा कि निगम क्षेत्र की अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। कई सड़कों पर गड्ढों की भरमार है। खासकर तारकोल की कई सड़कों पर महज बिखरी बिखरी रह गई हैं। अफसर आचार संहिता की वजह से काम न होने की तर्क देते हैं, पर ये हालात पिछले मानसून है।
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दोबारा माह बाद मानसून है, तब भी गड्ढे नहीं भरे गए। कई सड़कों के रिपेयर वर्क के लिए ई निविदा भी लगी थी, पर आचार संहिता लगने से पहले उसकी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। आरोप है कि समय रहते अफसरों ने सड़कों के रिपेयर वर्क के लिए अनुमान तैयार करने से लेकर अन्य औपचारिकताएं पूरी कर ई-निविदा नहीं लगाई।
इसी कारण आचार संहिता लगने से पहले ई-निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसका नुकसान शहर के लोग गड्ढों के झटके झेल कर रहे हैं। यही गड्ढे एक माह बाद मानसून में बारिश के दौरान जलभराव होने पर हादसों की वजह हो सकते हैं। इसलिए मानसून से पहले गड्ढों में मिट्टी व टाइल्स भरने जैसे कामचलाऊ व्यवस्था के बजाय सड़कों पर सही पैचवर्क होना चाहिए।
गड्ढे शरीर के लिए खतरनाक : डॉ. हिमांशु
डॉ. हिमांशु ने बताया कि शरीर रीढ़ की हड्डी पर टिका है। वाहन चलाने पर पूरा दबाव कमर व गर्दन से जुड़ी रीढ़ पर आ जाता है। सड़कों पर अधिक गड्ढे होने पर झटके लगते हैं। इससे रीढ़ पर दबाव पड़ता है। कंधों के जोड़ व कलाई पर भी जोर पड़ता है। यदि गड्ढे अधिक गहरे व चौड़े हों और गाड़ी की रफ्तार तेज हो तो कंधे वाली जोड़ की हड्डी खिसक सकती है। सड़क पर गड्ढे होने का अधिक असर रीढ़ से जुड़े हिस्सों पर होता है। इससे कमर, गर्दन में दर्द शुरू हो जाता है। ऊबड़ खाबड़ सड़कों पर वाहन चलाने से झटका लगने से रीढ़ की हड्डी से डिस्क बाहर निकल आती है व स्पाइनल कॉर्ड दबने लगता है।
जिन सड़कों की मरम्मत ही है, वहां यह कार्य जल्द कराया जाएगा। इसके लिए संबंधित शाखा के अफसरों काे निर्देश देंगे। - आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।
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यमुनानगर। जिन सड़कों को बनाने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए, उनके गड्ढे भरने में कंजूसी होती दिख रहीं है। तभी पैचवर्क के बजाय सड़कों के गड्ढों में मिट्टी तो कहीं इंटरलॉक टाइलें भर दी गई। यह नजारा नेहरू पार्क, गोबिंदपुरी, खालसा कॉलेज, व मॉडल टाउन व अन्य रोड पर हैं, वहीं काफी सड़कें पर गड्ढे जस के तस हैं।
यहां पैचवर्क तो दूर उसकी ई-निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं है। इसमें निवर्तमान पार्षद अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आरोप है कि लोकसभा चुनाव व उसकी आचार संहिता का पता होने के बावजूद समय से सड़कों की मरम्मत की ई-निविदा नहीं हुई। इस प्रक्रिया के अधर में होने से लोग गड्ढों पर झटके झेल रहे हैं।
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निवर्तमान पार्षदों में वार्ड तीन से हरमीन कोहली, चार से देवेंद्र सिंह, पांच से विनय कांबोज, सात से रामआसरा भारद्वाज, आठ से विनोद मरवाह ने कहा कि निगम क्षेत्र की अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। कई सड़कों पर गड्ढों की भरमार है। खासकर तारकोल की कई सड़कों पर महज बिखरी बिखरी रह गई हैं। अफसर आचार संहिता की वजह से काम न होने की तर्क देते हैं, पर ये हालात पिछले मानसून है।
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दोबारा माह बाद मानसून है, तब भी गड्ढे नहीं भरे गए। कई सड़कों के रिपेयर वर्क के लिए ई निविदा भी लगी थी, पर आचार संहिता लगने से पहले उसकी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। आरोप है कि समय रहते अफसरों ने सड़कों के रिपेयर वर्क के लिए अनुमान तैयार करने से लेकर अन्य औपचारिकताएं पूरी कर ई-निविदा नहीं लगाई।
इसी कारण आचार संहिता लगने से पहले ई-निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसका नुकसान शहर के लोग गड्ढों के झटके झेल कर रहे हैं। यही गड्ढे एक माह बाद मानसून में बारिश के दौरान जलभराव होने पर हादसों की वजह हो सकते हैं। इसलिए मानसून से पहले गड्ढों में मिट्टी व टाइल्स भरने जैसे कामचलाऊ व्यवस्था के बजाय सड़कों पर सही पैचवर्क होना चाहिए।
गड्ढे शरीर के लिए खतरनाक : डॉ. हिमांशु
डॉ. हिमांशु ने बताया कि शरीर रीढ़ की हड्डी पर टिका है। वाहन चलाने पर पूरा दबाव कमर व गर्दन से जुड़ी रीढ़ पर आ जाता है। सड़कों पर अधिक गड्ढे होने पर झटके लगते हैं। इससे रीढ़ पर दबाव पड़ता है। कंधों के जोड़ व कलाई पर भी जोर पड़ता है। यदि गड्ढे अधिक गहरे व चौड़े हों और गाड़ी की रफ्तार तेज हो तो कंधे वाली जोड़ की हड्डी खिसक सकती है। सड़क पर गड्ढे होने का अधिक असर रीढ़ से जुड़े हिस्सों पर होता है। इससे कमर, गर्दन में दर्द शुरू हो जाता है। ऊबड़ खाबड़ सड़कों पर वाहन चलाने से झटका लगने से रीढ़ की हड्डी से डिस्क बाहर निकल आती है व स्पाइनल कॉर्ड दबने लगता है।
जिन सड़कों की मरम्मत ही है, वहां यह कार्य जल्द कराया जाएगा। इसके लिए संबंधित शाखा के अफसरों काे निर्देश देंगे। - आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।