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Yamunanagar: टोपरा कलां गांव में तैयार होगी भारत की पहली व ऐतिहासिक काठ और पुली, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

Tue, 04 Jul 2023 09:23 AM IST
नवीन दलाल सुरेश सैनी, यमुनानगर (हरियाणा)
सुरेश सैनी, यमुनानगर (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Tue, 04 Jul 2023 09:23 AM IST
सार

अशोक स्तंभ को फिरोजशाह तुगलक 14वीं शताब्दी में दिल्ली ले गया था। अब हरियाणा में यमुनानगर के गांव टोपरा कलां में काठ (रेहड़ा) और पुली बनाई जाएगी, जिसके माध्यम से फिरोजशाह अशोक स्तंभ को उखाड़ कर लेकर गया था।

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India first and historical wood, pulley will ready in Topra Kalan village of Yamunanagar, tourism will boost
काठ व पुली का 3 डी डिजाइन जो इस प्रकार से बगेंगे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

14वीं शताब्दी में जिस अशोक स्तंभ को फिरोजशाह तुगलक उखाड़ कर काठ (रेहड़ा) और पुली के माध्यम से दिल्ली ले गया था। उसी तर्ज पर भारत की पहली काठ और पुली हरियाणा के यमुनानगर जिले के ब्लॉक रादौर के गांव टोपरा कलां में बनेगी। दोनों देखने में कैसी होंगी, इसका 3-डी डिजाइन फोटो भी तैयार कर लिया गया है। करीब 40 लाख रुपये की लागत से अशोका पार्क डेवलपमेंट ट्रस्ट की ओर से इसका निर्माण किया जाना है।

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800 साल पहले फिरोजशाह तुगलक इसी के माध्यम से अशोक स्तंभ को उखाड़कर ले जाया गया था दिल्ली
विदित हो कि दिल्ली लोकसभा में भी चित्रण लगा हुआ है, जिसमें दर्शाया गया है कि 14वीं शताब्दी में किस प्रकार काठ और पुली के बाद नाव के माध्यम से अशोक स्तंभ को ले जाया गया था। अब 800 साल बाद उसी तर्ज पर यमुनानगर जिले के ब्लाॅक रादौर गांव टोपरा कलां में काठ और पुली का निर्माण किया जाना है। इसे गांव के पार्क में ही कारीगरों द्वारा खास लकड़ी से बनाया जाएगा।
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पुली के पिलर भी वैसे ही बनाए जाएंगे
इस काठ व पुली का आकार भी वैसा ही होगा, जैसे 800 साल पहले था। काठ के 10 पहिये भी पहले जैसे काठ की तरह, वहीं पुली के पिलर भी वैसे ही बनाए जाएंगे, जैसे 3-डी डिजाइन फोटो में बने हैं। माना जा रहा है कि इससे न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दोनों ऐतिहासिक चीजें उस दौरान की यादों को भी तरोताजा करेंगी।
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काठ को आठ हजार लोगों ने खींचा था, अब दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में है अशोक स्तंभ
गांव टोपरा कलां से अशोक स्तंभ को यमुना नदी तक ले जाने के लिए पहले सावधानी पूर्वक सूती रेशम से लपेटा गया था और कच्चे रेशम से बने ईख के बिस्तर पर रखा गया था। उसके बाद उसे यमुना नदी तक ले जाने के लिए 42 पहियों की विशाल काठ तैयार की गई थी, जिसे आठ हजार लोगों ने खींचा था। अशोक स्तंभ जो अब दिल्ली के फिरोजशाह कोटला के अंदर है। उसे पहली बार सम्राट अशोक द्वारा 273 और 236 ईसा पूर्व के बीच टोपरा कलां में बनवाया गया था, लेकिन 1453 में फिरोजशाह तुगलक जब टोपरा कलां में शिकार के लिए आया, तब उसकी नजर इस स्तंभ पर पड़ी। पहले वे इसे तोड़ना चाहता था, लेकिन बाद में इसे उखाड़ कर अपने साथ दिल्ली ले गया था।

इस तरह से पड़ा टोपरा कलां नाम

टोपरा कलां गांव का नाम अरेबिक भाषा में टोप से चलता है। इसी नाम से अफ़गानिस्तान में एक जगह भी है, जो स्तूप था, वह गुंबद के आकार का होता था। गांव टोपरा कलां में भी उस जमाने में बौद्ध स्तूप गुंबद की तरह था, इसलिए इस गांव का नाम टोपरा कलां रखा गया था। गांव में रामकुंडी जगह पर आज भी ऐतिहासिक चीजें निकलती रहती हैं। विदित हो कि गांव टोपरा कलां से मौर्य काल के प्राचीन बर्तन के अवशेष पहले प्राप्त हुए हैं। गांव के अलग-अलग स्थानों और तालाब के पास से भी प्राचीन ईंटें निकलती हैं, जो ये स्पष्ट करता है कि इस पूरे गांव में छोटे-बड़े कई स्तूप रहे होंगे।

फाउंडर के अनुसार
फिरोजशाह तुगलक जिस काठ और पुली के माध्यम से अशोक स्तंभ को टोपरा कलां से लेकर गया था। उसी तर्ज पर भारत में पहली बार काठ व पुली का निर्माण किया जाएगा। इसका प्रपोजल तैयार कर लिया गया है। इसे अशोक पार्क में भी कारीगरों द्वारा तैयार किया जाएगा। इस पर 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही ऐतिहासिक धरोहर भी संरक्षित हो सकेगी। -सिद्धार्थ गौरी, फाउंडर, अशोका पार्क डेवलपमेंट ट्रस्ट।

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