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फाइनेंसरों का मामला सुलझा नहीं, अब एक चिट फंड कंपनी के खिलाफ खड़े हुए लोग

Wed, 30 Jan 2019 12:44 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jan 2019 12:44 AM IST
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फाइनेंसरों का मामला सुलझा नहीं, अब एक चिट फंड कंपनी के खिलाफ खड़े हुए लोग

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फाइनेंसरों का मामला सुलझा नहीं, अब एक चिट फंड कंपनी के दो अधिकारियों पर 62 लाख रुपये हड़पने का आरोप

पुलिस ने मामले में कोलकाता की कंपनी के अधिकारियों पर किया धोखाधड़ी का केस दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर।
चिटफंड कंपनी में अधिक ब्याज के लिए पैसा लगाने वालों का करोड़ों रुपये लेकर फरार हुए फाइनेंसरों का कोई सुराग नहीं लगा। हालांकि फाइनेंसरों के खिलाफ खड़े हुए लोग अब शांत हो चुके है। लेकिन ऐसा ही एक और मामला सामने आया है। जिसमें कंपनी ने लोगों को अधिक ब्याज देने का लालच देकर लाखों रुपये हड़प लिए। आरोप कोलकाता की ग्रीन टच प्रोजेक्ट लिमिटेड व जी टच प्रोड्यूसर कॉर्पोरेशन लिमिटिड कंपनी के अधिकारियों पर है। जिन्होंने शहर के लोगों को पैसों का अधिक ब्याज देने का लालच देकर करीब 62 लाख रुपये हड़प लिए। कंपनी में करीब सौ-डेढ़ सौ लोगों ने अपना पैसा इनवेस्ट किया हुआ है। अभी आठ लोग सामने आए है। जिन्होंने फर्कपुर थाना पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने मामले में कंपनी व उनके अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।
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कंपनी के अधिकारियों के जाल में ऐसे फंसना शुरू हुए लोग :
रणजीत गार्डन कालोनी निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि उसे अपनी बुआ के लड़के नरेश कुमार से कोलकाता की ग्रीनटच प्रोजेक्ट लिमिटेड कंपनी के बारे में पता चला था। इस कंपनी में मार्केटिंग डेवलेपमेंट ऑफिसर दीपक पोल, सफीकुल इस्लाम मंडल, चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर श्याम सुंदर डे, निदेशक स्नेहाशीश सरकार थे। उसकी बुआ के लड़के धमौली निवासी नरेश ने कंपनी में 2012 में एक हजार रुपये की एक आरडी प्रति माह के लिए 12 माह के लिए बनाई थी। जो कि 2013 में ब्याज समेत 13300 रुपये के साथ वापस मिल गई। जिसके बाद उसने अपनी बुआ के लड़के नरेश के साथ मिलकर कंपनी के अधिकारी दीपक पोल व सफीकुल इस्लाम मंडल से बातचीत की। आरोपियों ने उन्हें कहा कि हमारी कंपनी पूरी सुरक्षित एनसीडी (नॉन कन्वर्टेबल डेबेंचर) लेकर आई है। जिसके लिए इस कंपनी के चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर ने अपनी प्रॉपर्टी को निगर्मित करने की एमसीए से स्वीकृति ली है। इससे लोगों का पैसा बिल्कुल सुरक्षित है। इसी संबंध में दोनों आरोपियों ने उन्हें स्कीम में अधिक ब्याज पर अपनी कंपनी में पैसा इनवेस्टमेंट करने का लालच दिया। उन्होंने आरोपियों की बातों में आकर अपना पैसा निवेश करना शुरू कर दिया। जिसके बाद उनके साथ, अशोक विहार कॉलोनी निवासी गुलफाम अली, कोट निवासी नीलम कुमार, मलिकपुर बांगर निवासी सतपाल धीमान, अशोक विहार कॉलोनी निवासी मोहम्मद महमूद, वीना नगर कैंप निवासी मेहरबान, गोल्डनपुरी कॉलोनी निवासी निर्मल देवी, बैंक कॉलोनी निवासी सुनीता, सरस्वती कॉलोनी निवासी सुरेंद्रा देवी आरोपियों के संपर्क में आए।
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पहले खुद फंसे, फिर रिश्तेदार और जानकार भी फंसे :
कंपनी ने प्रदीप व गुलफाम को एजेंट बना दिया। जिसके बाद उन्होंने अपने रिश्तेदारों व जानकारों को कंपनी से जोड़ कर एजेंट बना दिया। अपनी आरडी एफडी व एमआईएस का काम शुरू करवा दिया। फिर जैसे जैसे काम बढ़ा उन्होंने कमानी चौक के पास 19 अप्रैल 2014 को कंपनी का एक दफ्तर भी खोल लिया। दफतर में उसकी पत्नी रजनेश को कलेरिकल काम के लिए कंपनी ने नौकरी पर रखा और कंप्यूटर कार्य के लिए कबीर को नौकरी दी। दफतर खुलने के बाद कंपनी के दोनों अधिकारी अक्तूबर 2014 में यहां आए और उनकी मीटिंग ली।
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दो साल वापस आया पैसा, नवंबर 2016 में मैच्योरिटी आनी हुई बंद :
प्रदीप ने शिकायत में बताया कि कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सेबी ने उनकी कंपनी को 11 सदस्यों से अधिक लोगों को जारी करने पर रोक लगा दी है। जिसके कारण उन्होंने नई कंपनी बनाई है। जो जीटैच प्रोड्यूसर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नाम से खोली गई है। उन्होंने बताया कि नई कंपनी की खासियत है कि जिन लोगों का इस कंपनी में पैसा लगता है वो लोग अकेले कंपनी के मेंबर बनते है ओर फिर उसके बाद वो उसी कंपनी में अपना पैसा लगाते है। इसके बाद नवंबर 2014 में उन द्वारा लगाए हुए पैसे वापस आना शुरू हो गए और उन्हें आरोपियों की बातों पर यकीन हो गया। इसके बाद कंपनी ने नेटवर्क तैयार दिया। इस दौरान उन्होंने लाखों रुपये कंपनी में इनवेस्टमेंट कर दिए। मगर नवंबर 2016 के बाद उनकी मैच्योरिटी आनी बंद हो गई।
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नंबर ब्लॉक होने के बाद दी शिकायत, पुलिस ने की एफआईआर दर्ज :
उन्होंने इस बारे में कंपनी के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने दो-तीन महीने में मैच्योरिटी देने का आश्वासन दिया। मगर इसके बाद भी मैच्योरिटी आनी शुरू नहीं हुई। इस पर वह कंपनी के कोलकाता स्थित कार्यालय में भी गए। उन्होंने दो तीन माह में मैैच्योरिटी शुरू करने का आश्वासन दिया। लेकिन नवंबर 2016 से अब तक उनका पैसा वापस नहीं आया। इसके बाद आरोपियों ने उन सबके नंबर भी ब्लॉक कर दिए है। परेशान होकर उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में दी। पुलिस ने मामले की जांच के बाद ग्रीन टच प्रोजेक्ट लिमिटेड व जी टैच प्रोड्यूसर कॉर्पोरेशन लिमिटेड कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी।
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एक हजार से 25 सौ रुपये देते थे मासिक किस्त :
प्रदीप ने बताया कि कंपनी से लगभग सौ-डेढ़ सौ लोग जुड़े हुए थे। जो 500, 1000, 1500, 2000 व 2500 रुपये तक प्रतिमाह किस्त के रूप में जमा करवाते थे। नेटवर्क सिस्टम के तहत लोग इससे जुड़ते गए। सबसे पहले वे कंपनी से जुड़े थे। फिर धीरे धीरे अन्य लोग संपर्क में आए। लगभग दो साल तक पैसा वापस आने पर लोगों को यकीन हो गया था। जिसके बाद अन्य लोग इससे जुड़े।

वर्जन
अधिक ब्याज लेने के लालच में आकर कुछ लोगों ने कंपनी में पैसा इनवेस्ट किया। अब लोगों ने कंपनी के अधिकारियों पर उनका पैसा हड़पने का आरोप लगाया है। मामले में कंपनी के दोनों अधिकारियों पर धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्जकर लिया गया है। लोगों ने कितना पैसा इनवेस्ट किया और कितना प्राप्त कर लिया, इसकी पता जांच के बाद ही चल पाएगा।
- भूपेंद्र सिंह, इंचार्ज, गांधी नगर चौकी।
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