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तटबंधों के पास 30 फीट गहराई तक कर डाला खनन
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:03 AM IST
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तटबंधों के पास 30 फीट गहराई तक कर डाला खनन
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/जठलाना। यमुना नदी के घाटों पर रेत के ठेकेदारों की ओर से किए जा रहे अवैध खनन के मामले की जांच करने सिंचाई विभाग के एसडीओ मुनीष देसवाल टीम के साथ मंगलवार को गुमथला घाट पहुंचे। यहां विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदारों की ओर से किए जा रहे खनन की जांच की। इस दौरान विभाग के अधिकारियों ने घाट के साथ लगते तटबंधों की निशानदेही कराई। इस दौरान मौजूद रहे हरियाणा एंटी करप्शन सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष वरयामसिंह ने बताया कि निशानदेही के दौरान पता चला कि रेत के ठेकेदारों ने तटबंधों के साथ 30 फीट से भी अधिक गहराई तक खनन कर डाला है। जिससे यमुना नदी के किनारों पर लगी ठोकराें के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। निशानदेही के दौरान गोताखोरों ने तटबंध के साथ लगते घाटों की गहराई नापी तो पता चला कि नियमों का उल्लघ्ंान करके ठेकेदारों ने 30 से 40 फीट तक खनन किया हुआ है।
बाढ़ में ठोकरों के बहने का खतरा
नियमानुसार यमुनानगर के घाटों पर लाइसेंस वाले क्षेत्र में मात्र दिन के समय 10 फीट तक ही रेत का खनन किया जा सकता है, लेकिन ठेकेदारों ने नियमों का उल्लंघन कर यमुनानदी के किनारों पर लगी ठोकराें को नष्ट करने की कोशिश की है। यदि यमुना में बाढ़ आती है तो किनारों पर लगी करोड़ों रुपये की पत्थरों की ठोकरें पानी में बह जाएगी। उन्होंने बताया कि कई महीनों से इसी प्रकार रात-दिन अवैध खनन चल रहा है, लेकिन अधिकारी शिकायत मिलने के बावजूद मौके पर आना गंवारा तक नहीं समझते।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/जठलाना। यमुना नदी के घाटों पर रेत के ठेकेदारों की ओर से किए जा रहे अवैध खनन के मामले की जांच करने सिंचाई विभाग के एसडीओ मुनीष देसवाल टीम के साथ मंगलवार को गुमथला घाट पहुंचे। यहां विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदारों की ओर से किए जा रहे खनन की जांच की। इस दौरान विभाग के अधिकारियों ने घाट के साथ लगते तटबंधों की निशानदेही कराई। इस दौरान मौजूद रहे हरियाणा एंटी करप्शन सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष वरयामसिंह ने बताया कि निशानदेही के दौरान पता चला कि रेत के ठेकेदारों ने तटबंधों के साथ 30 फीट से भी अधिक गहराई तक खनन कर डाला है। जिससे यमुना नदी के किनारों पर लगी ठोकराें के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। निशानदेही के दौरान गोताखोरों ने तटबंध के साथ लगते घाटों की गहराई नापी तो पता चला कि नियमों का उल्लघ्ंान करके ठेकेदारों ने 30 से 40 फीट तक खनन किया हुआ है।
बाढ़ में ठोकरों के बहने का खतरा
नियमानुसार यमुनानगर के घाटों पर लाइसेंस वाले क्षेत्र में मात्र दिन के समय 10 फीट तक ही रेत का खनन किया जा सकता है, लेकिन ठेकेदारों ने नियमों का उल्लंघन कर यमुनानदी के किनारों पर लगी ठोकराें को नष्ट करने की कोशिश की है। यदि यमुना में बाढ़ आती है तो किनारों पर लगी करोड़ों रुपये की पत्थरों की ठोकरें पानी में बह जाएगी। उन्होंने बताया कि कई महीनों से इसी प्रकार रात-दिन अवैध खनन चल रहा है, लेकिन अधिकारी शिकायत मिलने के बावजूद मौके पर आना गंवारा तक नहीं समझते।
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