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शहर में भारी वाहनों की नो-एंट्री, बाहर से ऑवरलोड होकर निकल रहे नॉन स्टॉप
Updated Sat, 30 Sep 2017 01:02 AM IST
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नो-एंट्री के बीच नॉन स्टॉप दौड़ रहे भारी वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। बीते दिनों जिला प्रशासन ने शहर में भारी वाहनों पर सुबह आठ से रात आठ बजे के बीच नो-एंट्री लगा दी। इसके लिए एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) के विश्वकर्मा चौक से बस स्टैंड चौक तक सुबह से रात तक नो एंट्री जोन घोषित किया गया, मगर इस आदेश का पालन नहीं हो रहा है। एनएच-73 और 73 ए से बे-रोकटोक भारी वाहन निकल रहे हैं। बता दें कि इस पर पुलिस और आरटीए विभाग दोनों ही कार्रवाई कर सकते हैं।
शहर से बाहर भारी वाहन ओवरलोड होकर चल रहे हैं, इसका उदाहरण शुक्रवार को उस वक्त देखने को मिला, जब जम्मू कॉलोनी के पास स्टेट हाईवे (कुरुक्षेत्र-सहारनपुर) पर सुबह साढ़े आठ बजे पेट्रोल पंप के पास लकड़ी से भरी ओवरलोड टैक्टर-ट्रॉली के नटबोल्ट टूट गए। रास्ता संकरा होने से लकड़ी से लदी दूसरी ओवरलोड ट्रैक्टर ट्रॉली भी अड़ गई। इससे एक तरफ का मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम से बचने को दूसरे तरफ के मार्ग से ही वाहन चालक आने-जाने लगे। हाईवे वन-वे हो जाने से वाहनों की आधा किलोमीटर तक लंबी कतारें लग गईं और करीब तीन घंटे तक वाहन चालक जाम में फंसे रहे। इस बीच कई रोडवेज बसों के अलावा निकल रहे बारातियों की गाड़ियां भी जाम में फंसी रहीं। उधर, जाम खुलवाने में लगे पुलिस कर्मचारियों के दिनभर पसीने छूटते रहे, करीब दोपहर 12 बजे दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को मार्ग से हटाने के बाद यातायात सुचारू हो पाया।
पुलिस के सामने से निकलती हैं ओवरलोड ट्रॉलियां, कार्रवाई शून्य
गांव मंडोली स्थित लकड़ मंडी से ही सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ऑवरलोड होकर एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर चलती हैं, जबकि नियमानुसार छह फीट ऊंचाई तक सामान लादा जा सकता है, किंतु आलम ये है कि अधिकांश ट्रैक्टर ट्रॉलियाें में ज्यादा ऊंचाई तक सामान लदा होता है। यही नहीं पीछे डाला खोलकर करीब तीन फीट बाहर तक लकड़ी का हिस्सा लटका होता है। सभी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मंडी से विभिन्न चौक से पुलिस के सामने से होकर प्लाई फैक्ट्रियों तक पहुंचती हैं, बावजूद इसके इन पर कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही।
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पहुंचना था जल्दी, जाम में हुए लेट
जाम में कई रोडवेज बसें व बारातियों की गाड़ियां भी फंसी रही। इनमें सफर कर रहे यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई। यात्री विजय शर्मा ने बताया कि वह बिजनेसमैन हैं और उन्हें काम के सिलसिले में दिल्ली जल्दी पहुंचना था, लेकिन यहां जाम में फंसने से देरी हो गई है। इससे उन्हें खासा नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसी तरह संभालखां निवासी बुजुर्ग शिव कुमार ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ पौंटा साहिब आए थे, जहां से घर वापसी में यहां कई घंटे से जाम में फंस हैं। इसी तरह बसों में बैठे अन्य यात्रियों को भी गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई वहीं, जाम खुलने के इंतजार में बसों में उनके गर्मी के मारे पसीने छूटते रहे।
हाईवे किनारे लगे खंभे, एक वक्त में नहीं निकल पाते दो चारपहिया वाहन
घटनास्थल के पास जूस कॉर्नर के संचालक दीपक कुमार व जम्मू कॉलोनी के शमशेर सिंह ने बताया कि स्टेट हाईवे (कुरुक्षेत्र-सहारनपुर) मार्ग किनारे कई खंभे हैं, जो हाईवे की ओर झुके हुए हैं और जर्जर हालात हैं। इस कारण एक वक्त में दो चारपहिया वाहन नहीं निकल पाते हैं। कई बार वाहन खंभों और तारों से टकराकर निकलते हैं, इससे कई बार क्षेत्र की बिजली गुल हो जाती है और हर वक्त हादसे की भी संभावना रहती है।
शहर में रोक पर, हाईवे से गुजर रहे बे-रोकटोक
हाईवे किनारे ऑक्सीजन सिलेंडर की शॉप कर रहे राकेश कुमार, टीवी शोरूम संचालक आज्ञापाल सिंह मक्कड ने कहा कि प्रशासन की ओर से शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर सुबह आठ से रात आठ बजे तक रोक लगा दी गई है, लेकिन हाईवे से दिन-रात भारी वाहन ओवरलोड होकर बे-रोकटोक गुजर रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि ओवरलोड वाहनों पर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि इनसे लगने वाले जाम और हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।
शहर में भारी वाहनों की नो-एंट्री के तहत अब तक करीब 35 चालान किए हैं। ओवरलोड में आरटीए कार्रवाई करता है। पुलिस भी ऐसे वाहनों के दिखने पर कार्रवाई करती है।
निर्मल सिंह, प्रभारी, यातायात पुलिस।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। बीते दिनों जिला प्रशासन ने शहर में भारी वाहनों पर सुबह आठ से रात आठ बजे के बीच नो-एंट्री लगा दी। इसके लिए एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) के विश्वकर्मा चौक से बस स्टैंड चौक तक सुबह से रात तक नो एंट्री जोन घोषित किया गया, मगर इस आदेश का पालन नहीं हो रहा है। एनएच-73 और 73 ए से बे-रोकटोक भारी वाहन निकल रहे हैं। बता दें कि इस पर पुलिस और आरटीए विभाग दोनों ही कार्रवाई कर सकते हैं।
शहर से बाहर भारी वाहन ओवरलोड होकर चल रहे हैं, इसका उदाहरण शुक्रवार को उस वक्त देखने को मिला, जब जम्मू कॉलोनी के पास स्टेट हाईवे (कुरुक्षेत्र-सहारनपुर) पर सुबह साढ़े आठ बजे पेट्रोल पंप के पास लकड़ी से भरी ओवरलोड टैक्टर-ट्रॉली के नटबोल्ट टूट गए। रास्ता संकरा होने से लकड़ी से लदी दूसरी ओवरलोड ट्रैक्टर ट्रॉली भी अड़ गई। इससे एक तरफ का मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम से बचने को दूसरे तरफ के मार्ग से ही वाहन चालक आने-जाने लगे। हाईवे वन-वे हो जाने से वाहनों की आधा किलोमीटर तक लंबी कतारें लग गईं और करीब तीन घंटे तक वाहन चालक जाम में फंसे रहे। इस बीच कई रोडवेज बसों के अलावा निकल रहे बारातियों की गाड़ियां भी जाम में फंसी रहीं। उधर, जाम खुलवाने में लगे पुलिस कर्मचारियों के दिनभर पसीने छूटते रहे, करीब दोपहर 12 बजे दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को मार्ग से हटाने के बाद यातायात सुचारू हो पाया।
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पुलिस के सामने से निकलती हैं ओवरलोड ट्रॉलियां, कार्रवाई शून्य
गांव मंडोली स्थित लकड़ मंडी से ही सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ऑवरलोड होकर एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर चलती हैं, जबकि नियमानुसार छह फीट ऊंचाई तक सामान लादा जा सकता है, किंतु आलम ये है कि अधिकांश ट्रैक्टर ट्रॉलियाें में ज्यादा ऊंचाई तक सामान लदा होता है। यही नहीं पीछे डाला खोलकर करीब तीन फीट बाहर तक लकड़ी का हिस्सा लटका होता है। सभी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मंडी से विभिन्न चौक से पुलिस के सामने से होकर प्लाई फैक्ट्रियों तक पहुंचती हैं, बावजूद इसके इन पर कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही।
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पहुंचना था जल्दी, जाम में हुए लेट
जाम में कई रोडवेज बसें व बारातियों की गाड़ियां भी फंसी रही। इनमें सफर कर रहे यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई। यात्री विजय शर्मा ने बताया कि वह बिजनेसमैन हैं और उन्हें काम के सिलसिले में दिल्ली जल्दी पहुंचना था, लेकिन यहां जाम में फंसने से देरी हो गई है। इससे उन्हें खासा नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसी तरह संभालखां निवासी बुजुर्ग शिव कुमार ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ पौंटा साहिब आए थे, जहां से घर वापसी में यहां कई घंटे से जाम में फंस हैं। इसी तरह बसों में बैठे अन्य यात्रियों को भी गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई वहीं, जाम खुलने के इंतजार में बसों में उनके गर्मी के मारे पसीने छूटते रहे।
हाईवे किनारे लगे खंभे, एक वक्त में नहीं निकल पाते दो चारपहिया वाहन
घटनास्थल के पास जूस कॉर्नर के संचालक दीपक कुमार व जम्मू कॉलोनी के शमशेर सिंह ने बताया कि स्टेट हाईवे (कुरुक्षेत्र-सहारनपुर) मार्ग किनारे कई खंभे हैं, जो हाईवे की ओर झुके हुए हैं और जर्जर हालात हैं। इस कारण एक वक्त में दो चारपहिया वाहन नहीं निकल पाते हैं। कई बार वाहन खंभों और तारों से टकराकर निकलते हैं, इससे कई बार क्षेत्र की बिजली गुल हो जाती है और हर वक्त हादसे की भी संभावना रहती है।
शहर में रोक पर, हाईवे से गुजर रहे बे-रोकटोक
हाईवे किनारे ऑक्सीजन सिलेंडर की शॉप कर रहे राकेश कुमार, टीवी शोरूम संचालक आज्ञापाल सिंह मक्कड ने कहा कि प्रशासन की ओर से शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर सुबह आठ से रात आठ बजे तक रोक लगा दी गई है, लेकिन हाईवे से दिन-रात भारी वाहन ओवरलोड होकर बे-रोकटोक गुजर रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि ओवरलोड वाहनों पर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि इनसे लगने वाले जाम और हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।
शहर में भारी वाहनों की नो-एंट्री के तहत अब तक करीब 35 चालान किए हैं। ओवरलोड में आरटीए कार्रवाई करता है। पुलिस भी ऐसे वाहनों के दिखने पर कार्रवाई करती है।
निर्मल सिंह, प्रभारी, यातायात पुलिस।