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Yamuna Nagar News: बदलते मौसम में निमोनिया की चपेट में आ रहे बच्चे
Fri, 31 Oct 2025 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 31 Oct 2025 01:14 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मौसम में उतार-चढ़ाव का बच्चों के स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। छोटे बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। नवजात शिशु और बच्चे अधिक संख्या में सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी से ग्रस्त हो रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर, उप जिला अस्पताल जगाधरी के अलावा निजी अस्पतालों में उपचार के लिए बड़ी संख्या में बच्चे पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल की शिशु रोग ओपीडी भी रोजाना 60 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं। ओपीडी के बाहर बच्चों का उपचार करवाने के लिए परिजनों की लाइनें लग रही हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. संजीव कुमार के अनुसार सर्दियों में श्वसन तंत्र संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। खासकर छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं में। सर्दी-खांसी जैसे मामूली लक्षणों की अनदेखी करने पर बच्चे निमोनिया की चपेट में आ सकते हैं, जो कि जानलेवा साबित हो सकता है।
संक्रमित व्यक्ति खांसता व छींकता है तो वायरस व बैक्टीरिया सांस से फेफड़ों तक पहुंच कर सामने बैठे व्यक्ति को संक्रमित कर देते हैं। निमोनिया का प्रभाव बच्चों पर ज्यादा होता है। खासतौर पर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया होने पर उन्हें सांस लेने और दूध पीने में दिक्कत होती है।
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निमोनिया के प्रमुख लक्षण
तेज सांस लेना, कफ की आवाज आना भी निमोनिया का संकेत हो सकते हैं। सामान्य से अधिक तेज सांस या सांस लेने में परेशानी, सांस लेते या खांसते समय छाती में दर्द, खांसी के साथ पीले, बलगम, बुखार, कंपकंपी या ठंड लगना, पसीना आना, होंठ या नाखून नीले होना, उल्टी होना, पेट या सीने के निचले हिस्से में दर्द होना, कंपकंपी, शरीर में दर्द, मांसपेशियों में दर्द भी निमोनिया के लक्षण हैं।
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यमुनानगर। मौसम में उतार-चढ़ाव का बच्चों के स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। छोटे बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। नवजात शिशु और बच्चे अधिक संख्या में सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी से ग्रस्त हो रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर, उप जिला अस्पताल जगाधरी के अलावा निजी अस्पतालों में उपचार के लिए बड़ी संख्या में बच्चे पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल की शिशु रोग ओपीडी भी रोजाना 60 से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं। ओपीडी के बाहर बच्चों का उपचार करवाने के लिए परिजनों की लाइनें लग रही हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. संजीव कुमार के अनुसार सर्दियों में श्वसन तंत्र संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। खासकर छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं में। सर्दी-खांसी जैसे मामूली लक्षणों की अनदेखी करने पर बच्चे निमोनिया की चपेट में आ सकते हैं, जो कि जानलेवा साबित हो सकता है।
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संक्रमित व्यक्ति खांसता व छींकता है तो वायरस व बैक्टीरिया सांस से फेफड़ों तक पहुंच कर सामने बैठे व्यक्ति को संक्रमित कर देते हैं। निमोनिया का प्रभाव बच्चों पर ज्यादा होता है। खासतौर पर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया होने पर उन्हें सांस लेने और दूध पीने में दिक्कत होती है।
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निमोनिया के प्रमुख लक्षण
तेज सांस लेना, कफ की आवाज आना भी निमोनिया का संकेत हो सकते हैं। सामान्य से अधिक तेज सांस या सांस लेने में परेशानी, सांस लेते या खांसते समय छाती में दर्द, खांसी के साथ पीले, बलगम, बुखार, कंपकंपी या ठंड लगना, पसीना आना, होंठ या नाखून नीले होना, उल्टी होना, पेट या सीने के निचले हिस्से में दर्द होना, कंपकंपी, शरीर में दर्द, मांसपेशियों में दर्द भी निमोनिया के लक्षण हैं।