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यमुना के पानी से डूबी 1000 एकड़ फसल, सब्जी की फसल पूरी तरह से हुई बर्बाद
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यमुना में गढ़मिरकपुर के पास पानी में डूबी फसल।
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। यमुना में हथिनीकुंड़ बैराज से छोड़ा गया 8.28 लाख क्यूसेक पानी किसानों की खून पसीने से उगाई फसल को डुबाकर आगे निकल गया। यमुना के पानी में करीब 1000 एकड़ फसल डूब गई थी। जिससे सब्जी की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। अन्य फसलों में भी 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है। जल्द ही खेतों से पानी निकासी नहीं हुई तो फसल में भी 100 प्रतिशत नुकसान का अंदेशा बना हुआ है। यमुना के पानी के चलते किसानों को प्रति एकड़ 10000 से 30000 रुपये तक का नुकसान हुआ है। यमुना का जलस्तर एक मीटर तक कम होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। फिलहाल बाढ़ का खतरा टल गया और पानी दिल्ली की सीमा में प्रवेश कर गया है।
जिले की सीमा से गुजर रही यमुना में हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 8.28 लाख क्यूसेक पानी आखिरकार दिल्ली की तरफ निकल गया। जिससे तीन दिन के संकट के बाद आखिर यमुना के किनारे बसे गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली। यमुना का पानी बुधवार सुबह से ही कम होना शुरू हो गया था। प्रशासन की मुस्तैदी व ग्रामीणों के पहले से इंतजाम किए जाने के कारण कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। हालांकि जलभराव के कारण काफी फसल बर्बाद होने का अंदेशा है। यमुना के पानी में करीब एक हजार एकड़ फसल डूब गई थी। जिसमें सब्जी की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई और अन्य फसलों को भी 50 फीसदी तक नुकसान है। अभी भी खेतों में पानी भरा हुआ है। जिसकी जल्द निकासी नहीं होने की स्थिति में यह फसल भी बर्बाद होने की आशंका है। वहीं डूबने से बर्बाद हुई फसलों की जानकारी के लिए गिरदावारी का काम शुरू हो गया। कृषि विभाग करीब 700 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित होने की बात कह रहा है वहीं राजस्व विभाग के अधिकारियों ने 400 से 500 एकड़ फसल में नुकसान की बात कही है। हालांकि उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति गिरदावरी के बाद ही पता चल सकेगी।
गांवों में वापस लौटना शुरू हुए लोग
यमुना में छोड़े गए पानी के चलते बाढ़ के अंदेशे से गांव खेड़ी असदपुर, नंगला व टोकी से विस्थापित ग्रामीणों ने अपने घरों में लौटना शुरू कर दिया है। ज्यादातर ग्रामीण बुधवार शाम तक अपने घरों में लौट आए थे और मवेशियों को भी वापस लाया गया था। दूसरे दिन भी ग्रामीण डूबी फसलों के बीच सब्जियां बचाने का प्रयास करते रहे।
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एक मीटर कम हुआ जलस्तर
मंगलवार रात तक 216 मीटर से ऊपर पहुंचा चुका यमुना का जलस्तर बुधवार को घटकर 215 मीटर रह गया। वह लगातार कम हो रहा है। गढ़ मिरकपुर के पास यमुना में बने गेज पर अंकित पैमाने पर जलस्तर मंगलवार रात तक लगातार बढ़ रहा था और 216 मीटर से ऊपर जा चुका था, लेकिन बुधवार सुबह से फिर जलस्तर घटना शुरू हो गया। अब करीब 8 लाख क्यूसेक पानी दिल्ली की ओर चला गया है, जिससे दिल्ली में बाढ़ संकट खड़ा हो गया है।
सब्जी में सबसे अधिक नुकसान
किसानों की माने तो सब्जी की फसल में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। हालांकि अन्य फसल भी पानी के चलते काफी प्रभावित हुई हैं। अगर जल्द ही फसल में भरे पानी की निकासी नहीं हुई तो अन्य फसल भी बर्बाद होने का खतरा बना हुआ है। किसानों को प्रति एकड़ दस हजार से तीस हजार रुपये तक के नुकसान का अंदेशा है।
यमुना का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। यमुना में पानी लगातार आगे बढ़ रहा है। हालांकि, खेतों से पानी की पूरी तरह निकासी में अभी समय लगेगा। पहले से किए गए पुख्ता प्रबंधों के कारण ज्यादा नुकसान से बचा जा सका है।
अश्विनी फौगाट, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
सीएम के हवाई सर्वेक्षण के बाद गिरदावरी का काम शुरू कर दिया गया है। फसल के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। गिरदावरी की रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। पानी निकासी के बाद गिरदावारी का काम पूरा हो सकेगा।
ब्रह्मप्रकाश अहलावत, डीआरओ, सोनीपत।
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जिले की सीमा से गुजर रही यमुना में हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 8.28 लाख क्यूसेक पानी आखिरकार दिल्ली की तरफ निकल गया। जिससे तीन दिन के संकट के बाद आखिर यमुना के किनारे बसे गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली। यमुना का पानी बुधवार सुबह से ही कम होना शुरू हो गया था। प्रशासन की मुस्तैदी व ग्रामीणों के पहले से इंतजाम किए जाने के कारण कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। हालांकि जलभराव के कारण काफी फसल बर्बाद होने का अंदेशा है। यमुना के पानी में करीब एक हजार एकड़ फसल डूब गई थी। जिसमें सब्जी की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई और अन्य फसलों को भी 50 फीसदी तक नुकसान है। अभी भी खेतों में पानी भरा हुआ है। जिसकी जल्द निकासी नहीं होने की स्थिति में यह फसल भी बर्बाद होने की आशंका है। वहीं डूबने से बर्बाद हुई फसलों की जानकारी के लिए गिरदावारी का काम शुरू हो गया। कृषि विभाग करीब 700 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित होने की बात कह रहा है वहीं राजस्व विभाग के अधिकारियों ने 400 से 500 एकड़ फसल में नुकसान की बात कही है। हालांकि उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति गिरदावरी के बाद ही पता चल सकेगी।
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गांवों में वापस लौटना शुरू हुए लोग
यमुना में छोड़े गए पानी के चलते बाढ़ के अंदेशे से गांव खेड़ी असदपुर, नंगला व टोकी से विस्थापित ग्रामीणों ने अपने घरों में लौटना शुरू कर दिया है। ज्यादातर ग्रामीण बुधवार शाम तक अपने घरों में लौट आए थे और मवेशियों को भी वापस लाया गया था। दूसरे दिन भी ग्रामीण डूबी फसलों के बीच सब्जियां बचाने का प्रयास करते रहे।
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एक मीटर कम हुआ जलस्तर
मंगलवार रात तक 216 मीटर से ऊपर पहुंचा चुका यमुना का जलस्तर बुधवार को घटकर 215 मीटर रह गया। वह लगातार कम हो रहा है। गढ़ मिरकपुर के पास यमुना में बने गेज पर अंकित पैमाने पर जलस्तर मंगलवार रात तक लगातार बढ़ रहा था और 216 मीटर से ऊपर जा चुका था, लेकिन बुधवार सुबह से फिर जलस्तर घटना शुरू हो गया। अब करीब 8 लाख क्यूसेक पानी दिल्ली की ओर चला गया है, जिससे दिल्ली में बाढ़ संकट खड़ा हो गया है।
सब्जी में सबसे अधिक नुकसान
किसानों की माने तो सब्जी की फसल में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। हालांकि अन्य फसल भी पानी के चलते काफी प्रभावित हुई हैं। अगर जल्द ही फसल में भरे पानी की निकासी नहीं हुई तो अन्य फसल भी बर्बाद होने का खतरा बना हुआ है। किसानों को प्रति एकड़ दस हजार से तीस हजार रुपये तक के नुकसान का अंदेशा है।
यमुना का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। यमुना में पानी लगातार आगे बढ़ रहा है। हालांकि, खेतों से पानी की पूरी तरह निकासी में अभी समय लगेगा। पहले से किए गए पुख्ता प्रबंधों के कारण ज्यादा नुकसान से बचा जा सका है।
अश्विनी फौगाट, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
सीएम के हवाई सर्वेक्षण के बाद गिरदावरी का काम शुरू कर दिया गया है। फसल के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। गिरदावरी की रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। पानी निकासी के बाद गिरदावारी का काम पूरा हो सकेगा।
ब्रह्मप्रकाश अहलावत, डीआरओ, सोनीपत।