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मां ने चोट के बारे में पूछा तो निशा बोलीं - चोट से ज्यादा हार का दर्द
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प्रीतम सिवाच, कोच एवं पूर्व कप्तान, भारतीय महिला हॉकी टीम।...संवाद
- फोटो : Sonipat
विष्णु कुमार
सोनीपत। भारतीय महिला हॉकी टीम शुक्रवार को कांस्य पदक के लिए खेले गए मुकाबले में भले ही ग्रेट ब्रिटेन से हार गई हो, लेकिन टीम के जुझारूपन ने देशवासियों का दिल जीत लिया। पदक न जीत पाने का दर्द मैदान पर खिलाड़ियों की आंखों में झलक रहा था। निशा वारसी की मां मेहरून ने कहा कि बेटियों से पदक की आस थी, जिसके लिए सभी ने कड़ा संघर्ष किया। मैच के बाद बेटी से फोन पर खेल के दौरान लगी चोट के बारे में पूछा तो निशा ने कहा कि चोट से ज्यादा हार का दर्द है। इस पर मेहरून भी अपने आंसू नहीं रोक पाईं। मैच के दौरान निशा को छाती में गेंद लगने के कारण चोट लग गई थी।
वहीं टीम के मैच हारने पर खिलाड़ी नेहा गोयल की मां सावित्री देवी के भी आंसू निकल पड़े। रुंधे स्वर में सावित्री देवी ने कहा कि बेटियों ने लड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अगर भाग्य साथ देता तो कहानी ही कुछ और होती। (संवाद)
मैच के दौरान लड्डू गोपाल को गोद में लिए बैठी रहीं नेहा गोयल की मां
हॉकी खिलाड़ी नेहा गोयल की मां सावित्री देवी ने भी शुक्रवार सुबह मैच से पहले पूजा-अर्चना की थी। मैच के दौरान वह लड्डू गोपाल (श्रीकृष्ण की प्रतिमा) को गोद में लिए बैठी रहीं।
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मोनिका ने फोन तो उठाया, लेकिन कुछ नहीं बोल पाई, बस रोती रही : रामकुंवार
महिला हॉकी टीम की हार के बाद सोनीपत के गांव गामड़ी निवासी खिलाड़ी मोनिका मलिक के चाचा रामकुंवार मलिक ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि टीम कांस्य पदक जीतकर लाएगी। हमारी लाडलियां पदक का सपना तो पूरा नहीं कर पाईं, लेकिन देश में हॉकी को पहचान दिलाने में कामयाब हो गईं। मैच के बाद मोनिका के पास फोन किया था। उसने फोन तो उठाया, लेकिन हार के दुख के बीच कुछ बोल नहीं पाई, बस रोती रही। हमने उसे यही कहा है कि हार-जीत खेल का हिस्सा हैं, आप सभी जी-जान लगाकर खेलीं, यही बहुत बड़ी बात है।
जीत के लिए किया संघर्ष, हार-जीत खेल का हिस्सा : प्रीतम सिवाच
कांस्य पदक के लिए शुक्रवार को खेले गए मुकाबले में पूरी टीम ने कड़ा संघर्ष किया। शुरुआत में 2-0 से पिछड़ने के बाद टीम ने जोरदार वापसी की और विपक्षी टीम पर एक गोल की बढ़त भी बना ली थी, लेकिन टीम बढ़त कायम नहीं रख सकी और 4-3 से मैच हार गई। हार-जीत खेल का हिस्सा है। बड़ी बात यह है कि टीम ने मैच जीतने के लिए पूरा जी-जान लगा दिया था। मैंने पूरा मैच देखा है। एक बेहतर टीम के खिलाफ टीम ने कड़ा संघर्ष किया। कुछ कमियां रही हैं, उन्हें दूर किया जाएगा।
- प्रीतम सिवाच, कोच एवं पूर्व कप्तान, भारतीय महिला हॉकी टीम
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सोनीपत। भारतीय महिला हॉकी टीम शुक्रवार को कांस्य पदक के लिए खेले गए मुकाबले में भले ही ग्रेट ब्रिटेन से हार गई हो, लेकिन टीम के जुझारूपन ने देशवासियों का दिल जीत लिया। पदक न जीत पाने का दर्द मैदान पर खिलाड़ियों की आंखों में झलक रहा था। निशा वारसी की मां मेहरून ने कहा कि बेटियों से पदक की आस थी, जिसके लिए सभी ने कड़ा संघर्ष किया। मैच के बाद बेटी से फोन पर खेल के दौरान लगी चोट के बारे में पूछा तो निशा ने कहा कि चोट से ज्यादा हार का दर्द है। इस पर मेहरून भी अपने आंसू नहीं रोक पाईं। मैच के दौरान निशा को छाती में गेंद लगने के कारण चोट लग गई थी।
वहीं टीम के मैच हारने पर खिलाड़ी नेहा गोयल की मां सावित्री देवी के भी आंसू निकल पड़े। रुंधे स्वर में सावित्री देवी ने कहा कि बेटियों ने लड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अगर भाग्य साथ देता तो कहानी ही कुछ और होती। (संवाद)
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मैच के दौरान लड्डू गोपाल को गोद में लिए बैठी रहीं नेहा गोयल की मां
हॉकी खिलाड़ी नेहा गोयल की मां सावित्री देवी ने भी शुक्रवार सुबह मैच से पहले पूजा-अर्चना की थी। मैच के दौरान वह लड्डू गोपाल (श्रीकृष्ण की प्रतिमा) को गोद में लिए बैठी रहीं।
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मोनिका ने फोन तो उठाया, लेकिन कुछ नहीं बोल पाई, बस रोती रही : रामकुंवार
महिला हॉकी टीम की हार के बाद सोनीपत के गांव गामड़ी निवासी खिलाड़ी मोनिका मलिक के चाचा रामकुंवार मलिक ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि टीम कांस्य पदक जीतकर लाएगी। हमारी लाडलियां पदक का सपना तो पूरा नहीं कर पाईं, लेकिन देश में हॉकी को पहचान दिलाने में कामयाब हो गईं। मैच के बाद मोनिका के पास फोन किया था। उसने फोन तो उठाया, लेकिन हार के दुख के बीच कुछ बोल नहीं पाई, बस रोती रही। हमने उसे यही कहा है कि हार-जीत खेल का हिस्सा हैं, आप सभी जी-जान लगाकर खेलीं, यही बहुत बड़ी बात है।
जीत के लिए किया संघर्ष, हार-जीत खेल का हिस्सा : प्रीतम सिवाच
कांस्य पदक के लिए शुक्रवार को खेले गए मुकाबले में पूरी टीम ने कड़ा संघर्ष किया। शुरुआत में 2-0 से पिछड़ने के बाद टीम ने जोरदार वापसी की और विपक्षी टीम पर एक गोल की बढ़त भी बना ली थी, लेकिन टीम बढ़त कायम नहीं रख सकी और 4-3 से मैच हार गई। हार-जीत खेल का हिस्सा है। बड़ी बात यह है कि टीम ने मैच जीतने के लिए पूरा जी-जान लगा दिया था। मैंने पूरा मैच देखा है। एक बेहतर टीम के खिलाफ टीम ने कड़ा संघर्ष किया। कुछ कमियां रही हैं, उन्हें दूर किया जाएगा।
- प्रीतम सिवाच, कोच एवं पूर्व कप्तान, भारतीय महिला हॉकी टीम

भारतीय महिला हॉकी टीम द्वारा मैच हारने के बाद अपने आंसू पौंछती नेहा गोयल की मां सावित्रि देवी।..- फोटो : Sonipat