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सोच व कार्य नैतिकता को करते हैं परिभाषित : डॉ. मणिभद्र
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सोनीपत। मानव मिलन के संस्थापक एवं नेपाल केसरी राष्ट्र संत डॉ. मणिभद्र मुनि महाराज ने कहा कि मनुष्य की सोच व कार्य उसकी नैतिकता को परिभाषित करते हैं। यदि मनुष्य दूसरों के प्रति सहानुभूति व प्रेम का भाव रखता है तो वह समाज में अच्छाई का प्रतीक बनता है।
डॉ. मणिभद्र महाराज गुड़ मंडी स्थित श्रीएसएस जैन सभा जैन स्थानक में चातुर्मास पर आयोजित धर्म सभा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आत्मीयता एक ऐसा गुण है, जो मनुष्य को उसके उच्चतम स्तर पर पहुंचाता है। तभी वह समाज में अच्छाई का प्रकाश फैला सकता है। सभा में पुनीत मुनि महाराज व महासाध्वी सृजना महाराज ने भी श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया।
डॉ. मणिभद्र महाराज गुड़ मंडी स्थित श्रीएसएस जैन सभा जैन स्थानक में चातुर्मास पर आयोजित धर्म सभा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आत्मीयता एक ऐसा गुण है, जो मनुष्य को उसके उच्चतम स्तर पर पहुंचाता है। तभी वह समाज में अच्छाई का प्रकाश फैला सकता है। सभा में पुनीत मुनि महाराज व महासाध्वी सृजना महाराज ने भी श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया।
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