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पांच सदस्यीय कमेटी से गुप्त बातचीत के बाद सहमति तक पहुंची बात

Fri, 10 Dec 2021 01:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 10 Dec 2021 01:45 AM IST
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the matter reached the consensus after secret talks with the 5 member committee
कुंडली बॉर्डर पर मुख्य मंच से फतेह अरदास करते किसान नेता। संवाद - फोटो : Sonipat
सोनीपत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से तीन कृषि कानून वापसी की घोषणा व बाद में लोकसभा व राज्यसभा में उन्हें रद्द किए जाने के बावजूद किसानों के तेवर तीखे रहे। वह बाकी मांगों को लेकर मुखर बने रहे। सरकार के लगातार सकारात्मक रवैये के बावजूद बात नहीं बन रही थी, लेकिन 4 दिसंबर की बैठक में किसान मोर्चा ने अहम फैसला लेते हुए एक कमेटी का गठन किया, जिसमें 5 सदस्यों को शामिल किया और इसी कमेटी को सरकार से बातचीत के लिए अधिकृत किया गया। जिसके बाद बात बनती चली गई।
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पांच सदस्यीय कमेटी में गुरनाम सिंह चढूनी, युद्धवीर सिंह, अशोक धवले, शिवकुमार कक्का, बलबीर सिंह राजेवाल को शामिल किया गया। कमेटी बनाने के बाद भी उसे बातचीत के लिए नहीं बुलाने पर आक्रोशित मोर्चा ने 7 दिसंबर को फिर से बैठक कर कड़े निर्णय के संकेत दिए। यहां तक की दिल्ली कूच तक की बात कही गई। लेकिन तभी सरकार ने कमेटी को मांगों को स्वीकार किए जाने से संबंधित प्रस्ताव भेज दिया। हालांकि, कमेटी ने प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई लेकिन यहीं से सहमति का मार्ग खुल गया और दोनों पक्षों के सकारात्मक रवैये के कारण आखिर वीरवार को मोर्चा ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी। एक तरफ जहां सरकार ने किसानों की कई मांगों पर हामी भरी है तो वहीं किसानों ने भी अपनी दो मांगों को सूची से बाहर कर दिया।
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भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से वीरवार को कुंडली बॉर्डर मोर्चा पर आधिकारिक पत्र के पहुंचते ही सालभर से अधिक समय से चले आ रहे किसान आंदोलन का पटाक्षेप हो गया। एसकेएम की बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से सचिव संजय अग्रवाल का हस्ताक्षरित पत्र मिलते ही मोर्चों को उठाने पर एलान हो गया।
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9 दिसंबर को जारी पत्र में कहा गया है कि एमएसपी पर प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की है। कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, किसान संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह स्पष्ट किया जाता है किसान प्रतिनिधि में एसकेएम के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। कमेटी का एक मैनडेट यह होगा कि देश के किसानों को एमएसपी मिलना किस तरह सुनिश्चित किया जाए। सरकार वार्ता के दौरान पहले से ही आश्वासन दे चुकी है कि देश में एमएसपी पर खरीद की स्थिति को जारी रखा जाए।
आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा सरकार ने इसके लिए पूर्णतया सहमति दी है कि तत्काल प्रभाव से सभी केस वापस लिया जाएगा। किसान आंदोलन के दौरान भारत सरकार के संबंधित विभाग और एजेंसियों तथा दिल्ली सहित सभी संघ शासित क्षेत्र में आंदोलनकारियों और समर्थकों पर बनाए गए सभी केस भी तत्काल प्रभाव से वापस लेने की सहमति है। अन्य राज्यों से अपील करेगी कि इस किसान आंदोलन से संबंधित केसों को वे भी वापस लेने की कार्रवाई करें। पत्र में लिखा है कि मुआवजे पर हरियाणा और यूपी सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। उपरोक्त दोनों विषयों के संबंध में पंजाब सरकार ने भी सार्वजनिक घोषणा की है।
इसके अलावा पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बिजली बिल में किसान पर असर डालने वाले प्रावधानों पर पहले सभी स्टेकहोल्डर्स/संयुक्त किसान मोर्चा से चर्चा होगी। उससे पहले इसे संसद में पेश नहीं किया जाएगा।

पराली के मुद्दे पर भारत सरकार ने जो कानून पारित किया है उसकी धारा में क्रिमिनल लायबिलिटी से किसानों को मुक्ति दी है। उपरोक्त प्रस्ताव से लंबित पांचों मांगों का समाधान हो जाता है। अब किसान आंदोलन को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं रहता है। अत: अनुरोध है कि किसान आंदोलन को समाप्त करें।
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