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Sonipat News: पुलिस की सख्ती से रामलला के दर्शनों की लालसा अधूरी रह गई थी

Mon, 15 Jan 2024 10:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Mon, 15 Jan 2024 10:56 PM IST
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The desire to see Ramlala remained unfulfilled due to the strictness of the police.
सुरेंद्र विश्वास, सामाजिक कार्यकर्ता, गोहाना।
गोहाना। अयोध्या में वर्ष 1990 में हुए आंदोलन के दौरान गोहाना से 90 कारसेवकों का दल अयोध्या के लिए रवाना हुआ था। यात्रा के दौरान मुसीबतें झेलते हुए जैसे-तैसे अयोध्या पहुंच गए, लेकिन विपरीत हालात और पुलिस की सख्ती के चलते रामलला के दर्शनों की लालसा अधूरी ही रह गई थी। गोहाना से सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र विश्वास ने अयोध्या आंदोलन के संस्मरण साझा किए।
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गोहाना निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र विश्वास ने बताया कि सभी कारसेवक अपने साथ गुड़-चना, लोटा व थाली लेकर दिल्ली से ट्रेन में सवार होकर लखनऊ स्टेशन पर पहुंच गए थे। जहां पुलिस ने कुछ कारसेवकों को गिरफ्तार कर लिया था। अन्य सदस्य पुलिस से बचते हुए दूसरी तरफ निकल गए और खेतों में छिपते-छिपाते पैदल चलते हुए अयोध्या पहुंचे। सभी दिन-रात पैदल चलते रहे। रास्ते में श्रीराम के नारे लगाने पर पुलिस कर्मियों ने कुछ कार सेवकों को गिरफ्तार कर लिया था। जो बचे थे, वह गांव के रास्ते पैदल चलते रहे और अपनी पहचान छिपाते रहे।
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30 अक्तूबर को अयोध्या पहुंचने का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन वह पुलिस प्रशासन की सख्ती के चलते तय समय से दो दिन देरी से पहुंचे। पुलिस की सख्ती को देखते हुए सभी वापस लौट आए। वह वर्ष 1992 में दोबारा अयोध्या गए और वहां से तीन ईंटें लेकर लौटे।
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स्थानीय लोगों ने बुझाई पेट की आग
सुरेंद्र विश्वास ने बताया कि वह जब वहां के गांवों से गुजरते तो स्थानीय लोग खूब आदर सत्कार करते थे। किसी ने अगर पानी मांगते थे तो वह खाना खाने तक का आग्रह करते थे। स्थानीय लोगों ने ही खाना देकर पेट की आग शांत की। जिस कारण सभी कार सेवक रामलला के दर्शनों की लालसा लेकर जोश के साथ आगे बढ़ते रहे।


ट्रेनों व बसों में की जाती थी कड़ी जांच
सुरेंद्र विश्वास ने बताया कि वह ट्रेन से जब लखनऊ पहुंचे तो पुलिस का कड़ा पहरा था। जो सदस्य पुलिस की पहचान में आए उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया। जो सदस्य बस में सवार हुए वहां भी उन्हें पुलिस की जांच से गुजरना पड़ा। जिनके पास गुड़-चना मिला या उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके चलते वह खेतों से होते हुए पैदल ही अयोध्या के लिए निकले थे। उन्होंने बताया कि वह कड़ाके की ठंड में पैदल व छिपते हुए पहुंचे। जिसकी वजह से वह दिए गए समय 30 अक्तूबर को नहीं पहुंच पाए।


पुलिस कर रही थी फायरिंग
सुरेंद्र विश्वास ने बताया कि वह जब एक नवंबर को अयोध्या पहुंचे तो पुलिस को प्रदर्शनकारियों को गोली मारने के निर्देश मिले हुए थे। जो भी अयोध्या में पहले ने भवन के पास पहुंचने का प्रयास कर रहा था, पुलिस गोली चला रही थी। ऐसे में संघ के निर्देश पर वह लौट आए। जबकि 1992 में वे तीन सदस्यों की टीम में अयोध्या पहुंचे और तीन ईंट लेकर आए।
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