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Sonipat News: भठगांव जलघर के टैंक की चार साल से नहीं हुई सफाई, जम चुकी काई
Fri, 22 May 2026 12:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 22 May 2026 12:45 AM IST
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फोटो: सोनीपत के गांव भठगांव के जलघर के टैंकों में जमा काई दिखाते ग्रामीण। स्रोत: पाठक
खरखौदा। गांव भठगांव में पेयजल व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। गांव के लोग इन दिनों खारा और दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जलघर के टैंकों की चार वर्ष से सफाई नहीं कराई गई है। इससे उसमें काई जम चुकी है। पानी पीने लायक नहीं रह गया है।
ग्रामीण आजाद, सुखबीर, रामनिवास, अशोक दहिया व बाला ने बताया कि जलघर से आने वाले पानी में बदबू और गंदगी रहती है। अधिकांश लोगों को मजबूरी में ट्यूबवेल का खारा पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर हो गई है।
खारा पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को शिकायत दी जा चुकी है। टैंकों की सफाई कराने और पेयजल व्यवस्था सुधारने की मांग भी उठाई गई लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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गांव के लोगों ने बताया कि तपती गर्मी में पूरे गांव को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। कई घरों में पीने के लिए अलग से पानी खरीदना पड़ रहा है। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द जलघर के टैंकों की सफाई कराई जाए और गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
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जलघर के टैंकों की सफाई न कराने के चलते काई जग चुकी है। यहां से गांव में दूषित पानी आपूर्ति हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए कई बार आवाज उठाई जा चुकी हैं, लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने टैंकों की सफाई कराने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदीप, ग्रामीण
गांव में प्रशासन की अनदेखी के कारण खारा पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। लोगों को पानी के कैंपर खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है। प्रशासन की नाकामी का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं।
राकेश, ग्रामीण
जलघरों के टैंकों की सफाई पहले मनरेगा के माध्यम से की जाती थी। अब मनरेगा के माध्यम से सफाई कार्य बंद हो चुका है। अब जल्द ही टैंकों का निरीक्षण करने के बाद सफाई शुरू करा दी जाएगी। इसके बाद लोगों को साफ पानी की आपूर्ति की जाएगी।
दलबीर सिंह, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग
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ग्रामीण आजाद, सुखबीर, रामनिवास, अशोक दहिया व बाला ने बताया कि जलघर से आने वाले पानी में बदबू और गंदगी रहती है। अधिकांश लोगों को मजबूरी में ट्यूबवेल का खारा पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर हो गई है।
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खारा पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को शिकायत दी जा चुकी है। टैंकों की सफाई कराने और पेयजल व्यवस्था सुधारने की मांग भी उठाई गई लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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गांव के लोगों ने बताया कि तपती गर्मी में पूरे गांव को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। कई घरों में पीने के लिए अलग से पानी खरीदना पड़ रहा है। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द जलघर के टैंकों की सफाई कराई जाए और गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
जलघर के टैंकों की सफाई न कराने के चलते काई जग चुकी है। यहां से गांव में दूषित पानी आपूर्ति हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए कई बार आवाज उठाई जा चुकी हैं, लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने टैंकों की सफाई कराने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदीप, ग्रामीण
गांव में प्रशासन की अनदेखी के कारण खारा पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। लोगों को पानी के कैंपर खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है। प्रशासन की नाकामी का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं।
राकेश, ग्रामीण
जलघरों के टैंकों की सफाई पहले मनरेगा के माध्यम से की जाती थी। अब मनरेगा के माध्यम से सफाई कार्य बंद हो चुका है। अब जल्द ही टैंकों का निरीक्षण करने के बाद सफाई शुरू करा दी जाएगी। इसके बाद लोगों को साफ पानी की आपूर्ति की जाएगी।
दलबीर सिंह, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग

फोटो: सोनीपत के गांव भठगांव के जलघर के टैंकों में जमा काई दिखाते ग्रामीण। स्रोत: पाठक

फोटो: सोनीपत के गांव भठगांव के जलघर के टैंकों में जमा काई दिखाते ग्रामीण। स्रोत: पाठक