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Sonipat News: रामभरोसे चल रहे तरणताल, टूटते नियम ले रहे युवाओं की जान

Fri, 22 May 2026 09:09 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Fri, 22 May 2026 09:09 PM IST
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Swimming Pools Running on Luck; Broken Rules Claiming the Lives of Youth
फोटो :: सोनीपत के राई विवि में स्थित तरणताल जिसे बंद किया गया है। संवाद
सोनीपत। तरणतालों की सुरक्षा व्यवस्था अब गंभीर सवालों के घेरे में है। करीब तीन वर्ष से प्रदेश में 1500 से अधिक स्विमिंग पूल बिना प्रभावी निगरानी और सख्त नियंत्रण के संचालित हो रहे हैं।
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वर्ष 2023 में खेल विभाग ने पूलों के पंजीकरण, नवीनीकरण और नियमित निरीक्षण की प्रक्रिया से हाथ पीछे खींच लेने के बाद निजी पूल संचालकों की मनमानी बढ़ गई है। सुरक्षा नियमों की अनदेखी का खामियाजा अब युवाओं को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है। हाल के दिनों में सामने आए हादसों ने पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
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जींद के सरकारी स्टेडियम और माहरा गांव स्थित निजी स्विमिंग पूल में डूबने से दो युवकों की मौत ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी। आरोप हैं कि कई पूलों पर न तो प्रशिक्षित लाइफगार्ड मौजूद हैं और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए लाइफब्वाय, रेस्क्यू उपकरण और प्राथमिक चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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पिछले वर्ष नाहरी स्थित एक निजी पूल में युवक की मौत के बाद खेल विभाग ने दोबारा निगरानी व्यवस्था लागू करने की कवायद शुरू की थी। पूलों की जांच और सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाने के लिए फाइल भी तैयार की गई लेकिन मामला प्रशासनिक स्तर पर आगे नहीं बढ़ सका और योजना ठंडे बस्ते में चली गई।

उधर, माहरा गांव में हुए हालिया हादसे के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए पूल संचालक, प्रबंधक और कोच के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बावजूद सवाल कायम हैं कि आखिर बिना सुरक्षा मानकों के पूलों को संचालन की अनुमति कैसे मिल रही है और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदकर क्यों बैठा है।


विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी के दौरान स्विमिंग पूलों में युवाओं और बच्चों की भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। इसके बावजूद अधिकांश पूलों में निगरानी तंत्र केवल कागजों तक सीमित दिखाई देता है।
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