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सुमित बोला- देश के लिए पदक जीतने की खुशी, मां को पदक न पहना पाने का रहेगा दुख
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हॉकी खिलाड़ी सुमित को उसकी मां की तस्वीर भेंट करते गांव कुराड़ के पूर्व सरपंच बिजेंद्र आंतिल। सं?
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। टोक्यो ओलंपिक में अपने बेहतर प्रदर्शन से देशवासियों का दिल जीतकर लौटे हॉकी खिलाड़ी सुमित की झलक पाने को पूरा गांव उमड़ पड़ा। सुमित ने शानदार स्वागत के लिए सभी का आभार जताया और कहा कि-मेरा यह पदक मां दर्शना देवी को समर्पित है, जिन्होंने मेरी कामयाबी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। मां को याद कर सुमित भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि बीमार होते हुए भी उसकी मां ने काम किया और पैसे लाकर दिए, ताकि वह अपना हॉस्टल का खर्च उठा सके। मां उनके साथ होती तो बेहद खुश होती।
गांव के सहयोग व भाई की कुर्बानी से यहां तक पहुंचा
हॉकी खिलाड़ी सुमित ने कहा कि वह आज जिस मुकाम पर पहुंचा है, उसके पीछे पूरे गांव का हाथ व बड़े भाई अमित की कुर्बानी है। शुरुआती दौर से ही उनके गांव के लोगों ने उसकी खूब मदद की। गांव के बहुत से ग्रामीणों ने उस समय पर उनका साथ दिया था, जब उनका परिवार पूरी तरह से असहाय था। सुमित ने कहा कि उसकी कामयाबी में उसके भाई अमित का भी बड़ा हाथ है। अमित ने उसके लिए खुद खेलना बंद कर दिया था, जबकि अमित खुद हॉकी का बेहतर खिलाड़ी हैं।
पूर्व सरपंच ने भेंट की मां की फोटो
सुमित का बहालगढ़ से गांव कुराड़ तक जोरदार स्वागत किया गया। बहालगढ़ चौक पर गांव कुराड़ के पूर्व सरपंच बिजेंद्र आंतिल ने सुमित को तोहफे के रूप में उनकी मां की तस्वीर दी। जिसे देख सुमित भावुक हो उठे और मां की तस्वीर को चूम लिया।
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जूते व हॉकी स्टिक मिली तो हॉकी को ही बना लिया जीवन
सुमित ने कहा कि वह बचपन में गलियों में खेलता फिरता था। बड़ा भाई अमित पकड़कर हॉकी मैदान पर ले जाता, जो बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था, हॉकी खिलाड़ियों को खेलते हुए देखता था तो उनके जूते व हॉकी स्टिक अच्छी लगती थी। सुमित जब आठ वर्ष का था, तब उसके भाई अमित ने उसे लोभ देकर मैदान का रास्ता दिखाया। मैदान पर गया तो वहां कोच नरेश आंतिल ने हॉकी स्टिक व टी शर्ट दी। जिसके बाद लोभ में एचके वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्थापित हॉकी अकादमी की ओर दौड़ लिया। हॉकी स्टिक व टी शर्ट पाकर ऐसी खुशी मिली कि उन्होंने हॉकी को ही जीवन बना लिया। उसके बाद सुमित ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सुमित बताते हैं कि कोच नरेश आंतिल हमारे घर की आर्थिक स्थिति जानते थे, इसलिए उन्होंने कहा कि जब कभी भी पैसों या अन्य किसी चीज की जरूरत हो, घरवालों की बजाय मुझे बताना। कोच नरेश आंतिल ने हर कदम पर सहयोग किया।
हॉकी में स्कूल स्तर से ही शुरू कर दिया था नाम कमाना
सुमित ने स्कूल स्तर से ही हॉकी में नाम कमाना शुरू कर दिया था, जिसके बाद जिला स्तर, राज्य स्तर, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपना जलवा बिखेरा। बेहतरीन मिडफील्डर सुमित मलेशिया में हुए सुल्तान जौहर कप व वर्ष-2016 में हुए जूनियर वर्ल्ड कप में स्वर्णिम पदक हासिल किया। 2016 में हुई इंडियन हॉकी लीग में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार भी प्राप्त किया। वर्ष-2017 में मलेशिया में हुए सुल्तान अजलान शाह कप में कांस्य पदक, लंदन में हुई वर्ल्ड लीग में सेमीफाइनल तक का सफर तय करते हुए बांग्लादेश में हुए एशिया कप में स्वर्णिम पताका फहराई और इसी वर्ष वर्ल्ड हॉकी लीग में कांस्य पदक भी जीता। वर्ष-2018 में सुल्तान अजलान शाह कप तथा कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया।
वर्ष-2018 में ओमान में हुई एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में स्वर्ण पदक जीता व सीनियर वर्ल्ड कप में प्रतिभागिता की। वर्ष-2019 में मलयेशिया में हुए सुल्तान अजलान शाह कप में रजत पदक प्राप्त करते हुए ओलंपिक क्वालीफाई किया। सुमित ने बेल्जियम, आस्ट्रेलिया, भारत, रशिया व इंग्लैंड में हुईं विभिन्न हॉकी प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया। अब ओलंपिक में पदक जीतने के बाद सुमित का सपना पूरा हुआ है।
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गांव के सहयोग व भाई की कुर्बानी से यहां तक पहुंचा
हॉकी खिलाड़ी सुमित ने कहा कि वह आज जिस मुकाम पर पहुंचा है, उसके पीछे पूरे गांव का हाथ व बड़े भाई अमित की कुर्बानी है। शुरुआती दौर से ही उनके गांव के लोगों ने उसकी खूब मदद की। गांव के बहुत से ग्रामीणों ने उस समय पर उनका साथ दिया था, जब उनका परिवार पूरी तरह से असहाय था। सुमित ने कहा कि उसकी कामयाबी में उसके भाई अमित का भी बड़ा हाथ है। अमित ने उसके लिए खुद खेलना बंद कर दिया था, जबकि अमित खुद हॉकी का बेहतर खिलाड़ी हैं।
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पूर्व सरपंच ने भेंट की मां की फोटो
सुमित का बहालगढ़ से गांव कुराड़ तक जोरदार स्वागत किया गया। बहालगढ़ चौक पर गांव कुराड़ के पूर्व सरपंच बिजेंद्र आंतिल ने सुमित को तोहफे के रूप में उनकी मां की तस्वीर दी। जिसे देख सुमित भावुक हो उठे और मां की तस्वीर को चूम लिया।
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जूते व हॉकी स्टिक मिली तो हॉकी को ही बना लिया जीवन
सुमित ने कहा कि वह बचपन में गलियों में खेलता फिरता था। बड़ा भाई अमित पकड़कर हॉकी मैदान पर ले जाता, जो बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था, हॉकी खिलाड़ियों को खेलते हुए देखता था तो उनके जूते व हॉकी स्टिक अच्छी लगती थी। सुमित जब आठ वर्ष का था, तब उसके भाई अमित ने उसे लोभ देकर मैदान का रास्ता दिखाया। मैदान पर गया तो वहां कोच नरेश आंतिल ने हॉकी स्टिक व टी शर्ट दी। जिसके बाद लोभ में एचके वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्थापित हॉकी अकादमी की ओर दौड़ लिया। हॉकी स्टिक व टी शर्ट पाकर ऐसी खुशी मिली कि उन्होंने हॉकी को ही जीवन बना लिया। उसके बाद सुमित ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सुमित बताते हैं कि कोच नरेश आंतिल हमारे घर की आर्थिक स्थिति जानते थे, इसलिए उन्होंने कहा कि जब कभी भी पैसों या अन्य किसी चीज की जरूरत हो, घरवालों की बजाय मुझे बताना। कोच नरेश आंतिल ने हर कदम पर सहयोग किया।
हॉकी में स्कूल स्तर से ही शुरू कर दिया था नाम कमाना
सुमित ने स्कूल स्तर से ही हॉकी में नाम कमाना शुरू कर दिया था, जिसके बाद जिला स्तर, राज्य स्तर, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपना जलवा बिखेरा। बेहतरीन मिडफील्डर सुमित मलेशिया में हुए सुल्तान जौहर कप व वर्ष-2016 में हुए जूनियर वर्ल्ड कप में स्वर्णिम पदक हासिल किया। 2016 में हुई इंडियन हॉकी लीग में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार भी प्राप्त किया। वर्ष-2017 में मलेशिया में हुए सुल्तान अजलान शाह कप में कांस्य पदक, लंदन में हुई वर्ल्ड लीग में सेमीफाइनल तक का सफर तय करते हुए बांग्लादेश में हुए एशिया कप में स्वर्णिम पताका फहराई और इसी वर्ष वर्ल्ड हॉकी लीग में कांस्य पदक भी जीता। वर्ष-2018 में सुल्तान अजलान शाह कप तथा कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया।
वर्ष-2018 में ओमान में हुई एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में स्वर्ण पदक जीता व सीनियर वर्ल्ड कप में प्रतिभागिता की। वर्ष-2019 में मलयेशिया में हुए सुल्तान अजलान शाह कप में रजत पदक प्राप्त करते हुए ओलंपिक क्वालीफाई किया। सुमित ने बेल्जियम, आस्ट्रेलिया, भारत, रशिया व इंग्लैंड में हुईं विभिन्न हॉकी प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया। अब ओलंपिक में पदक जीतने के बाद सुमित का सपना पूरा हुआ है।

स्वागत जुलूस के दौरान पदक दिखाते हॉकी खिलाड़ी सुमित। संवाद- फोटो : Sonipat