फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   Stayed in jail for nine days, helped in escaping 70 kar sevaks.

Sonipat News: नौ दिन जेल में रहे, 70 कार सेवकों को भगाने में की मदद

Thu, 18 Jan 2024 11:06 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Thu, 18 Jan 2024 11:06 PM IST
विज्ञापन
Stayed in jail for nine days, helped in escaping 70 kar sevaks.
सत्यनारायण गोयल, गोहाना।
संदीप कुमार
विज्ञापन

गोहाना (सोनीपत)। 24 अक्तूबर, 1990 को मैं गोहाना से अयोध्या के लिए अपने छह अन्य साथियों के साथ रवाना हुआ था। पहले दिल्ली गए और वहां से ट्रेन में बैठकर लखनऊ के लिए रवाना हुए। मुरादाबाद से एक स्टेशन पहले ही पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया था। उस समय मेरे पास लखनऊ के एक लकड़ी व्यापारी का कार्ड था। पुलिस को वह कार्ड दिखाया और कहा कि व्यापार के सिलसिले में लखनऊ जा रहे हैं। इसके बाद सभी को बैलगाड़ी में बैठाकर मुरादाबाद तक भेज दिया गया।
25 अक्तूबर को मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर जब लखनऊ के लिए ट्रेन में बैठे तो वहां की पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया। मुरादाबाद के जिला कारागार में जगह नहीं होने के चलते राजकीय महाविद्यालय में बनाई गई अस्थायी जेल में 9 दिन तक बंदी बनाकर रखा। 2 नवंबर को पुलिस ने रिहा कर दिया, लेकिन पुलिस ने जब जाने के लिए कहा तो सभी ने मना कर दिया और कहा कि जो पैसे थे वो सारे पुलिस ने ले लिए, अब कैसे जाएं। इस पर पुलिस ने सभी साथियों की मुरादाबाद से सोनीपत तक की टिकट बुक कराई तब सभी घर वापस पहुंचे थे। गोहाना पहुंचने पर उन सभी का भव्य स्वागत किया गया था। उन्हें रामलला के दर्शन नहीं करने का मलाल रहा, लेकिन इस बात की संतुष्टि रही कि जिस उद्देश्य को लेकर गए थे, उसमें अपना पूर्ण योगदान देने में कामयाब रहे।
विज्ञापन

- जैैसा 80 वर्षीय सत्यनारायण गोयल ने बताया

जेल के रजिस्टर में नाम दर्ज होने से पहले कारसेवकों को भगाया
मुरादाबाद महाविद्यालय में बंदी रहने के दौरान मैंने 70 कारसेवकों को भगाने में मदद की थी। महाविद्यालय की दीवार के साथ ही जलापूर्ति विभाग का कार्यालय था जहां पाइप लगे हुए थे। जब भी कोई नया कारसेवक गिरफ्तार कर लाया जाता तो मैं उसे जेल के रजिस्टर में नाम दर्ज होने से पहले ही महाविद्यालय की दीवार पार कराकर भगा देता। कारसेवकों की मदद करते हुए अयोध्या जाने के अपने मकसद को जेल में रहते हुए भी साकार किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाजार के खाने का बहिष्कार कर जेल में खाना बनवाया
जेल में ग्रामीणों व बाजार से खाना लाया जाता था जिसका मैंने व मेरे साथियों ने बहिष्कार कर दिया था तब थाना प्रभारी ने जेल में ही खाना बनवाया। 9 दिन जेल में शाखा प्रशिक्षण की तरह व्यतीत किए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed