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माटी से निखरे हीरों ने कबड्डी विश्व कप में बिखेरी चमक
देवेंद्र सैनी / अमर उजाला, गोहाना
Updated Mon, 24 Oct 2016 12:40 AM IST
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गांव रिंढ़ाना के लोग व प्रदीप नरवाल के परिजन।
- फोटो : sonipat
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कबड्डी में विश्व विजेता बने उपमंडल के तीन बेटों ने गोहाना का नाम पूरे विश्व में रोशन कर दिया। गांव रिंढ़ाना व कथूरा में जश्न का माहौल है तथा अपने होनहारों का स्वागत करने के लिए दोनों गांवों के लोग उन्हें सिर आंखों पर बैठाने को बेताब हैं। गांव की माटी से निकलकर विश्व विजेता बनने की कहानी गांव के लोग बड़े चाव से सुना रहे हैं। गांव रिंढ़ाना के प्रदीप नरवाल व कथूरा गांव के संदीप व सुरजीत नरवाल पहले भी कई प्रतिस्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं।
प्रदीप नरवाल के पिता धर्मबीर नरवाल, मां बीरमति, चाचा बिजेंद्र नरवाल, भाई प्रवीन, ग्रामीणों में पूर्व जिला पार्षद इंदूराज नरवाल, मास्टर सतीश, विनोद, श्रीकृष्ण लाल, रामकिशन, अजीत सिंह, पंच विनोद, सूबेदार प्रताप सिंह, पहलवान देवेंद्र, सूरजमल नरवाल, बलबीर, जगदीश और पवन नरवाल, गांव कथूरा में सुरजीत नरवाल के पिता जगदीश नरवाल, मां ऊषा देवी और कथूरा पंचायत समिति के वाइस चेयरमैन राजेश नरवाल ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई। संदीप नरवाल के पिता दिलबाग सिंह और मां कमलेश देवी ने कहा कि अपने बेटे पर गर्व है।
राष्ट्रीय स्तर पर मनवा चुके लोहा
गांव रिंढ़ाणा और कथूरा के ये तीनों नरवाल बंधु कई बार राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना दमखम दिखा चुके हैं। प्रदीप नरवाल गांव के ही खेल स्टेडियम में अपने कोच नरेश नरवाल के मार्गदर्शन में अभ्यास करते हैं। पिछले दिनों आयोजित प्रो-कबड्डी लीग में भी इस खिलाड़ी ने पटना और बेंगलुरू की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए बेस्ट रेडर का खिताब अपने नाम किया था। 2008 में स्कूल नेशनल में भी ये टॉप रहे थे। वहीं, सुरजीत नरवाल और संदीप नरवाल भी प्रो-कबड्डी लीग के अलावा हाल में वियतनाम में आयोजित 5वीं एशियन बीच गेम्स में शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं।
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गांव की माटी में ही पसीना बहाते हैं सुरजीत
खिलाड़ी सुरजीत नरवाल का कहना है कि वह मास्टर वजीर सिंह नरवाल की अथक मेहनत के कारण ही इस मुकाम पर पहुंचे हैं। वह इस क्षेत्र के ऋणी हैं और ग्रामीणों ने उन्हें हमेशा सिर आंखों पर बैठाया है। वह जब भी गांव में जाते हैं तो वहां खेलने वाले बच्चों को टिप्स देते हैं। वह चाहते हैं कि गांव के अन्य युवा भी इस खेल में आगे बढ़ें।
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प्रदीप का आरंभ से लंबा लक्ष्य रहा है
प्रदीप नरवाल के गुरु नरेश कुमार बताते हैं कि करीब आठ साल पहले कबड्डी में कॅरिअर शुरू करने वाले प्रदीप ने हमेशा से ऊंची सोच रखी। प्रदीप लंबी रेस का घोड़ा है, इसलिए हमेशा लंबा चलने की बात करता है। कबड्डी के दांव-पेच उसने गांव के ही स्टेडियम में सीखे हैं। वह चाहता है कि युवा उनका अनुसरण कर आगे बढ़ें।
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युवाओं में खेल का जुनून
गांव रिंढ़ाणा के ज्यादातर युवक कबड्डी में रुचि रखते हैं। गांव स्थित बारूराम स्टेडियम में प्रतिदिन 400-500 खिलाड़ी कबड्डी के अभ्यास में पसीना बहाते हैं। गांव के चार खिलाड़ी एशियन खेल और तीन खिलाड़ी वर्ल्ड कप में अपनी प्रतिभा की धाक जमा चुके हैं। करीब 150 युवा विभिन्न विभागों में नौकरी कर रहे हैं।
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गांव में नर्सरी विंग शुरू करने की मांग
गांव रिंढ़ाणा निवासी वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व जिला पार्षद इंदुराज नरवाल ने कहा कि कबड्डी खेल में गांव के युवाओं की खूब रुचि है, लेकिन स्टेडियम में मल्टीपर्पज हॉल सहित अन्य सुविधाओं का अभाव है। गांव में इस खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार मल्टीपर्पज हाल के निर्माण सहित नर्सरी विंग भी शुरू करे। गांव वासी रामभज नरवाल, कबड्डी कोच नरेश, कोच जगमाल सिंह, सतीश, नवीन, पंच राजेश, विनोद व पीटीआई सुमित भी सरकार की ओर से मिलने वाली मदद का इंतजार कर रहे हैं।
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तीनों को डीएसपी बनाए सरकार
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के तीनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन की बदौलत देश और प्रदेश का नाम रोश किया है। उसे देखते हुए सरकार को तीनों को डीएसपी के पद पर भर्ती करना चाहिए। इससे अन्य खिलाड़ियों का हौसला भी बुलंद होगा।
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प्रदीप नरवाल के पिता धर्मबीर नरवाल, मां बीरमति, चाचा बिजेंद्र नरवाल, भाई प्रवीन, ग्रामीणों में पूर्व जिला पार्षद इंदूराज नरवाल, मास्टर सतीश, विनोद, श्रीकृष्ण लाल, रामकिशन, अजीत सिंह, पंच विनोद, सूबेदार प्रताप सिंह, पहलवान देवेंद्र, सूरजमल नरवाल, बलबीर, जगदीश और पवन नरवाल, गांव कथूरा में सुरजीत नरवाल के पिता जगदीश नरवाल, मां ऊषा देवी और कथूरा पंचायत समिति के वाइस चेयरमैन राजेश नरवाल ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई। संदीप नरवाल के पिता दिलबाग सिंह और मां कमलेश देवी ने कहा कि अपने बेटे पर गर्व है।
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राष्ट्रीय स्तर पर मनवा चुके लोहा
गांव रिंढ़ाणा और कथूरा के ये तीनों नरवाल बंधु कई बार राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना दमखम दिखा चुके हैं। प्रदीप नरवाल गांव के ही खेल स्टेडियम में अपने कोच नरेश नरवाल के मार्गदर्शन में अभ्यास करते हैं। पिछले दिनों आयोजित प्रो-कबड्डी लीग में भी इस खिलाड़ी ने पटना और बेंगलुरू की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए बेस्ट रेडर का खिताब अपने नाम किया था। 2008 में स्कूल नेशनल में भी ये टॉप रहे थे। वहीं, सुरजीत नरवाल और संदीप नरवाल भी प्रो-कबड्डी लीग के अलावा हाल में वियतनाम में आयोजित 5वीं एशियन बीच गेम्स में शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं।
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गांव की माटी में ही पसीना बहाते हैं सुरजीत
खिलाड़ी सुरजीत नरवाल का कहना है कि वह मास्टर वजीर सिंह नरवाल की अथक मेहनत के कारण ही इस मुकाम पर पहुंचे हैं। वह इस क्षेत्र के ऋणी हैं और ग्रामीणों ने उन्हें हमेशा सिर आंखों पर बैठाया है। वह जब भी गांव में जाते हैं तो वहां खेलने वाले बच्चों को टिप्स देते हैं। वह चाहते हैं कि गांव के अन्य युवा भी इस खेल में आगे बढ़ें।
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प्रदीप का आरंभ से लंबा लक्ष्य रहा है
प्रदीप नरवाल के गुरु नरेश कुमार बताते हैं कि करीब आठ साल पहले कबड्डी में कॅरिअर शुरू करने वाले प्रदीप ने हमेशा से ऊंची सोच रखी। प्रदीप लंबी रेस का घोड़ा है, इसलिए हमेशा लंबा चलने की बात करता है। कबड्डी के दांव-पेच उसने गांव के ही स्टेडियम में सीखे हैं। वह चाहता है कि युवा उनका अनुसरण कर आगे बढ़ें।
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युवाओं में खेल का जुनून
गांव रिंढ़ाणा के ज्यादातर युवक कबड्डी में रुचि रखते हैं। गांव स्थित बारूराम स्टेडियम में प्रतिदिन 400-500 खिलाड़ी कबड्डी के अभ्यास में पसीना बहाते हैं। गांव के चार खिलाड़ी एशियन खेल और तीन खिलाड़ी वर्ल्ड कप में अपनी प्रतिभा की धाक जमा चुके हैं। करीब 150 युवा विभिन्न विभागों में नौकरी कर रहे हैं।
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गांव में नर्सरी विंग शुरू करने की मांग
गांव रिंढ़ाणा निवासी वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व जिला पार्षद इंदुराज नरवाल ने कहा कि कबड्डी खेल में गांव के युवाओं की खूब रुचि है, लेकिन स्टेडियम में मल्टीपर्पज हॉल सहित अन्य सुविधाओं का अभाव है। गांव में इस खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार मल्टीपर्पज हाल के निर्माण सहित नर्सरी विंग भी शुरू करे। गांव वासी रामभज नरवाल, कबड्डी कोच नरेश, कोच जगमाल सिंह, सतीश, नवीन, पंच राजेश, विनोद व पीटीआई सुमित भी सरकार की ओर से मिलने वाली मदद का इंतजार कर रहे हैं।
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तीनों को डीएसपी बनाए सरकार
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के तीनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन की बदौलत देश और प्रदेश का नाम रोश किया है। उसे देखते हुए सरकार को तीनों को डीएसपी के पद पर भर्ती करना चाहिए। इससे अन्य खिलाड़ियों का हौसला भी बुलंद होगा।