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ऊपर से शांत, अंदर से बेचैन नजर आए लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Sat, 19 Mar 2016 12:03 AM IST
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सोनीपत रेलवे स्टेशन पर गाडिय़ों के आने का इंतजार में बैठे रेलयात्री
- फोटो : bureau
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भले ही जाट आरक्षण आंदोलन 31 मार्च तक टल गया, लेकिन शुक्रवार को दिनभर आंदोलन के दोबारा शुरू होने की आशंका से शहरवासी बाहर से शांत, लेकिन अंदर बेचैन नजर आए। खुलकर कोई बोलने के लिए तैयार नहीं था, लेकिन हालात को लेकर हर किसी ने चिंता जरूर जताई। लघु सचिवालय से लेकर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सरकारी कार्यालय में प्रतिदिन की अपेक्षा आधी से कम भीड़ नजर आई। प्रशासन चाहे सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंधों का दावा कर रहा हो, लेकिन लोगों के अंदर से हिंसा और आगजनी की दहशत बाहर नहीं निकल पा रही है।
नहीं दिखे बाजार में ग्राहक
शहर के कच्चे क्वार्टर ,गीता भवन चौक मार्केट में जहां एक टाइम में सभी दुकानों पर भीड़ लगी रहती थी। वहां शुक्रवार चार बजे तक ग्राहक न के बराबर दिखे। रेलवे स्टेशन पर भी सन्नाटा पसरा मिला। लघु सचिवालय पर भी तहसील कार्यालय को छोड़कर डीसी कार्यालय, एसपी कार्यालय पर खामोशी नजर आई। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक तो न के बराबर आ ही रहे हैं, वहीं पहले जैसे हालात होने के डर से दुकानों को भी जल्द बंद करना पड़ रहा है।
कार्यालय नजर आए खाली-खाली
आंदोलन के दोबारा शुरू होने की आहट से ही लोग में डर देखने को मिला। लघु सचिवालय में बने तहसील कार्यालय पर लोगों की भीड़ देखने को मिली, लेकिन एक समय जहां डीसी व एसपी के आफिस के सामने भीड़ देखी जाती थी। वहां सन्नाटा पसरा था।
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रेलवे स्टेशन पर भी कम नजर आए यात्री
एक समय जहां टिकट लेने के लिए यात्रियों की लंबी -लंबी लाइन लगती थी, वहां एक-दो यात्री ही टिकट खरीदते दिखाई दिए। इतना ही नहीं स्टेशन पर भी यात्रियों की भीड़ नहीं दिखाई दी।
दुकानदारों से बातचीत
कच्चे क्वार्टर में दुकानें तो सभी खुली रहीं, लेकिन दोपहर बाद चार बजे तक ग्राहक कम ही नजर आए। हालांकि शाम को पता लगा कि आंदोलन 31 मार्च तक टल गया है तो लोगों ने राहत की सांस ली। शाम को बाजारों में भीड़ देखी गई।
-जवाहर लाल चादना, प्रधान, कच्चे क्वार्टर बाजार
प्रशासन ने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन कुछ समय पहले जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जो कुछ देखा, उसने डर का माहौल बना दिया है। कब क्या हो जाए कुछ नहीं कह सकते।
राजीव दुकानदार
आंदोलन की सुगबुगाहट के चलते सड़क के साथ-साथ दुकानों पर भी इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आए। वहीं वीरवार शाम से कई फोन आ चुके हैं कि क्या होगा। इतना ही नहीं मार्केट के दुकानदार भी आकर पूछ रहे हैं कि क्या होगा। हालांकि सभी से एक ही बात कही जा रही है कि अफवाहों पर ध्यान ना दें और अपना काम करें।
-दिव्या लाल, प्रधान, गीता भवन मार्केट
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नहीं दिखे बाजार में ग्राहक
शहर के कच्चे क्वार्टर ,गीता भवन चौक मार्केट में जहां एक टाइम में सभी दुकानों पर भीड़ लगी रहती थी। वहां शुक्रवार चार बजे तक ग्राहक न के बराबर दिखे। रेलवे स्टेशन पर भी सन्नाटा पसरा मिला। लघु सचिवालय पर भी तहसील कार्यालय को छोड़कर डीसी कार्यालय, एसपी कार्यालय पर खामोशी नजर आई। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक तो न के बराबर आ ही रहे हैं, वहीं पहले जैसे हालात होने के डर से दुकानों को भी जल्द बंद करना पड़ रहा है।
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कार्यालय नजर आए खाली-खाली
आंदोलन के दोबारा शुरू होने की आहट से ही लोग में डर देखने को मिला। लघु सचिवालय में बने तहसील कार्यालय पर लोगों की भीड़ देखने को मिली, लेकिन एक समय जहां डीसी व एसपी के आफिस के सामने भीड़ देखी जाती थी। वहां सन्नाटा पसरा था।
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रेलवे स्टेशन पर भी कम नजर आए यात्री
एक समय जहां टिकट लेने के लिए यात्रियों की लंबी -लंबी लाइन लगती थी, वहां एक-दो यात्री ही टिकट खरीदते दिखाई दिए। इतना ही नहीं स्टेशन पर भी यात्रियों की भीड़ नहीं दिखाई दी।
दुकानदारों से बातचीत
कच्चे क्वार्टर में दुकानें तो सभी खुली रहीं, लेकिन दोपहर बाद चार बजे तक ग्राहक कम ही नजर आए। हालांकि शाम को पता लगा कि आंदोलन 31 मार्च तक टल गया है तो लोगों ने राहत की सांस ली। शाम को बाजारों में भीड़ देखी गई।
-जवाहर लाल चादना, प्रधान, कच्चे क्वार्टर बाजार
प्रशासन ने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन कुछ समय पहले जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जो कुछ देखा, उसने डर का माहौल बना दिया है। कब क्या हो जाए कुछ नहीं कह सकते।
राजीव दुकानदार
आंदोलन की सुगबुगाहट के चलते सड़क के साथ-साथ दुकानों पर भी इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आए। वहीं वीरवार शाम से कई फोन आ चुके हैं कि क्या होगा। इतना ही नहीं मार्केट के दुकानदार भी आकर पूछ रहे हैं कि क्या होगा। हालांकि सभी से एक ही बात कही जा रही है कि अफवाहों पर ध्यान ना दें और अपना काम करें।
-दिव्या लाल, प्रधान, गीता भवन मार्केट