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Sonipat: आग की भेंट चढ़े बणी के औषधीय पेड़-पौधे, पशु-पक्षियों को नुकसान

Sun, 15 Oct 2023 09:47 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 15 Oct 2023 09:47 PM IST
सार

57 एकड़ में स्थित बणी में आग से दो एकड़ में पेड़-पौधे  जल गए। सूचना के बाद पहुंचे संत गोपालदास ने कहा कि गत दिनों गांव में पंचायत की आमदनी बढ़ाने के लिए पेड़ों की कटाई करवाने के लिए बोली निश्चित की गई थी, जिसका विरोध किया गया था।

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Sonipat: Medicinal plants of Bani burnt to ashes, animals and birds harmed
बणी में आग लगने से झुलसे पेड़ों व जले घोसलों को देखते संत गोपालदास व अन्य। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के सोनीपत के गन्नौर खंड के गांव मोई माजरी के प्राचीन बणी में आग लगने से दुर्लभ प्रजाति के औषधीय पौधे, जीव-जंतु, पक्षी और सांप झुलस गए। बणी में आग कैसे लगी इस बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है।

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दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ग्रैप लागू किया गया है। बावजूद इसके आगजनी की घटना सामने आ रही हैं। अब गांव मोई माजरी की प्राचीन बणी में आग लग गई है, जिससे दो एकड़ में खड़े प्राचीनतम औषधीय पेड़-पौधे जल गए।
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गांव मोई माजरी स्थित बणी में आग लगने से झुलसे प्राचीनतम पेड़ व औषधीय पौधे। स्रोत : ग्रामीण
बणी में आग लगने की सूचना के बाद पहुंचे संत गोपालदास ने कहा कि गत दिनों गांव में पंचायत की आमदनी बढ़ाने के लिए पेड़ों की कटाई करवाने के लिए बोली निश्चित की गई थी, जिसका विरोध किया गया था। उन्होंने कहा कि गांव में पंचायत की आमदनी अन्य तरीकों से भी बढ़ाई जा सकती है।
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थोड़ा सोचने की जरूरत है। बणी को पर्यटन स्थल बनाया जा सकता है। बणी में बने तालाब को और बेहतर किया जा सकता है, मगर आग कैसे लगी यह विचारणीय बात है। आग लगने से दुर्लभ प्रजाति के पेड़, पशु-पक्षियों और बणी को नुकसान पहुंचा है।
बणी का आग लगने से पहले का मनोरम दृश्य।


करीब 57 एकड़ में फैली बणी
गांव माजरी में करीब 57 एकड़ में प्राचीन बणी है। इसमें राज्य पक्षी तीतर को आश्रय मिला है। इसमें एक बड़ा और कई छोटे तालाब हैं। ग्रामीण यहां पर अपने पशुओं को चराने के अलावा लकड़ियां लेकर जाते हैं। संत गोपालदास ने कहा कि मोई माजरी में सोनीपत का यह एकमात्र अभयारण्य बचा है। सरकार इसे बचाने पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार से अपील है कि पहले से बने अभयारण्य को बचाने का प्रयास करे।

गांव माजरी की प्राचीन बणी में आग लगने की जानकारी नहीं है। दो-तीन दिन पहले बणी का दौरा किया था, उस समय तक सब ठीक था। आग लगने की कोई घटना हुई है तो मौके का मुआयना कर स्थिति का जायजा लूंगी। -पूनम चंदा, बीडीपीओ, गन्नौर।

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