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दुर्दांत की मौत की खबर भी कम न कर सकी गांव में उसकी दहशत
अमर उजाला, सोनीपत
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:02 AM IST
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kannu
- फोटो : sonepat
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मुठभेड़ में अजय उर्फ कन्नू की मौत की खबर मिलने के बाद भी गांव का माहौल सामान्य नहीं है। गांव में एक अजीब सी खामोशी बनी हुई थी। सरपंच के घर पर ग्रामीण एकत्र थे। वह खबर की पुष्टि के लिए न्यूज चैनल से चिपके हुए थे। वहीं कुछ बुजुर्ग जगबीर के घर पर थे, उनके बीच भी सिर्फ कन्नू की चर्चा थी। इन सबसे इतर अजय उर्फ कन्नू का घर ही नहीं बल्कि गली भी सुनसान पड़ी थी। खौफजदा लोगों को कुछ राहत तो मिली, लेकिन लोगों के बीच एक ही चर्चा थी कि अजय का पूरा गैंग जब तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आता, तब तक कोई भी बड़ी वारदात हो सकती है। गांव में गुरुवार दोपहर के समय अमर उजाला की टीम पहुंची तथा गांव की स्थिति जानी।
समय 12:30 बजे
गांव का मुख्य द्वार जिस पर आज भी पुरानी सरपंच का नाम लिखा है। गांव की नई सरकार बने तीन माह से अधिक हो गया है, इसके बावजूद बोर्ड पर पूर्व सरपंच सुखबाला का नाम ही लिखा है। बता दें कि सरपंच चुनावों के बाद ही रंजिश के तहत अजय उर्फ कन्नू ने हत्याएं शुरू की थी। गांव का यह मुख्य मार्ग पूरी तरह से सुनसान है।
समय 12:45 बजे
सरपंच नरेश के घर के पास पुलिस की एक गाड़ी खड़ी है। आसपास कोई भी हलचल नहीं है। सरपंच के घर की बैठक में कुछ लोग जरूर हैं। बात की तो पता चला कि सरपंच तो बाहर गए हैं और ये लोग न्यूज चैनल पर कन्नू से जुड़े समाचार देखने के इंतजार में बैठे हैं। यहां पर कन्नू को लेकर बातचीत हुई तो इन्होंने माना कि पूरे गांव में उसके नाम की दहशत थी।
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समय 1:20 बजे
सरपंच के घर से कुछ ही दूरी पर अजय उर्फ कन्नू का घर है। बंद गली में उसका मकान काफी टूटा-फूटा है। मकान पर पुता सफेद रंग पीला पड़ चुका है। आसपास पता करने पर ज्ञात हुआ कि यहां इस समय कोई नहीं है। हत्याओं की वारदात के बाद से अजय की मां कहीं चली गई, अब केवल उसका दादा ही यहां रहता है। हालांकि वह भी इस समय कहीं गया है। गली पूरी तरह से सुनसान पड़ी थी। अजय के घर के पास ही पुलिस की एक जिप्सी भी खड़ी थी। जिसके पास एक पुलिसकर्मी भी दिखाई दिया।
समय 1:30 बजे
अब टीम उस घर में पहुंची थी, जिसका चिराग और मुखिया दोनों को ही अजय ने 12 मई को हुल्लाहेड़ी के पास गोलियां से भून दिया था। बैंक में कर्मचारी रहे जगबीर के घर में कुछ बुजुर्ग हैं, जिनके बीच चर्चा सिर्फ कन्नू की ही थी। बुजुर्गों ने बताया कि अगर कन्नू मर चुका है तो राहत की बात है, लेकिन पूरी शांति तभी होगी जब उसके साथियों को भी पुलिस पकड़ ले।
समय 12:30 बजे
गांव का मुख्य द्वार जिस पर आज भी पुरानी सरपंच का नाम लिखा है। गांव की नई सरकार बने तीन माह से अधिक हो गया है, इसके बावजूद बोर्ड पर पूर्व सरपंच सुखबाला का नाम ही लिखा है। बता दें कि सरपंच चुनावों के बाद ही रंजिश के तहत अजय उर्फ कन्नू ने हत्याएं शुरू की थी। गांव का यह मुख्य मार्ग पूरी तरह से सुनसान है।
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समय 12:45 बजे
सरपंच नरेश के घर के पास पुलिस की एक गाड़ी खड़ी है। आसपास कोई भी हलचल नहीं है। सरपंच के घर की बैठक में कुछ लोग जरूर हैं। बात की तो पता चला कि सरपंच तो बाहर गए हैं और ये लोग न्यूज चैनल पर कन्नू से जुड़े समाचार देखने के इंतजार में बैठे हैं। यहां पर कन्नू को लेकर बातचीत हुई तो इन्होंने माना कि पूरे गांव में उसके नाम की दहशत थी।
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समय 1:20 बजे
सरपंच के घर से कुछ ही दूरी पर अजय उर्फ कन्नू का घर है। बंद गली में उसका मकान काफी टूटा-फूटा है। मकान पर पुता सफेद रंग पीला पड़ चुका है। आसपास पता करने पर ज्ञात हुआ कि यहां इस समय कोई नहीं है। हत्याओं की वारदात के बाद से अजय की मां कहीं चली गई, अब केवल उसका दादा ही यहां रहता है। हालांकि वह भी इस समय कहीं गया है। गली पूरी तरह से सुनसान पड़ी थी। अजय के घर के पास ही पुलिस की एक जिप्सी भी खड़ी थी। जिसके पास एक पुलिसकर्मी भी दिखाई दिया।
समय 1:30 बजे
अब टीम उस घर में पहुंची थी, जिसका चिराग और मुखिया दोनों को ही अजय ने 12 मई को हुल्लाहेड़ी के पास गोलियां से भून दिया था। बैंक में कर्मचारी रहे जगबीर के घर में कुछ बुजुर्ग हैं, जिनके बीच चर्चा सिर्फ कन्नू की ही थी। बुजुर्गों ने बताया कि अगर कन्नू मर चुका है तो राहत की बात है, लेकिन पूरी शांति तभी होगी जब उसके साथियों को भी पुलिस पकड़ ले।