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Sonipat News: बुजुर्ग के हत्या के दोषी दंपति और दो बेटों समेत 6 को उम्रकैद

Wed, 09 Sep 2026 02:11 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 09 Sep 2026 02:11 AM IST
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Six people, including a couple and their two sons, sentenced to life imprisonment for the murder of an elderly person.
फोटो :14: बुजुर्ग की हत्या के मामले में सजायाफ्ता दो भाई व उनके तीन बेटे। फाइल फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
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सोनीपत। उपलों को लेकर शुरू हुआ विवाद बुजुर्ग की हत्या तक पहुंच गया था। कालूपुर में आंधी के दौरान पड़ोसी के प्लॉट से उड़कर घर में गिरे उपले वापस लेने को कहने पर दो परिवारों में विवाद हुआ था। इसी रंजिश में जगदीश की हत्या कर दी गई थी। मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष चंदर सरोए ने एक ही परिवार के छह सदस्यों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषियों में दंपती, उनके दो बेटे, सगा भाई और भतीजा शामिल हैं। प्रत्येक दोषी पर 1,03,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजन के अनुसार 2 जून 2021 को सुरेश के प्लॉट में रखे उपले आंधी में उड़कर जगदीश के घर में जा गिरे थे। इसको लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया था। 3 जून को जगदीश और उनके परिवार के लोग थाने जा रहे थे। रास्ते में सुरेश, उसके भाई रमेश और परिवार के अन्य लोगों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला किया। इसमें जगदीश गंभीर रूप से घायल जगदीश की मौत हो गई थी।
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पत्नी ने 16 लोगों को कराया था नामजद
जगदीश की पत्नी संतरा ने 3 जून 2021 को सिटी थाना सोनीपत में शिकायत देकर 16 लोगों को नामजद कराया था। पुलिस ने जांच के बाद सुरेश, उसकी पत्नी संतरो, बेटे अमित व सुमित, भाई रमेश और रमेश के बेटे सिकंदर को गिरफ्तार किया। सुनवाई के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर छह आरोपियों को दोषी करार दिया गया। अदालत ने सुरेश, संतरो, अमित, सुमित, रमेश और सिकंदर उर्फ शौकी को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 148, 302 और 323 सहपठित धारा 149 के तहत दोषी ठहराया।
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बचाव पक्ष के नरमी की मांग ठुकराई
सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने दोषियों की पारिवारिक परिस्थितियों और पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने का हवाला देकर नरमी की अपील की। लेकिन जज ने इसे ठुकरा दिया। वहीं लोक अभियोजक ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा देने की मांग की।


षड्यंत्र और हत्या के लिए अलग-अलग उम्रकैद
अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह मृत्युदंड का मामला नहीं है। छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। षड्यंत्र और हत्या के लिए अलग-अलग उम्रकैद व 50-50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। धारा 148 के तहत एक साल का कठोर कारावास व 2,500 रुपये तथा धारा 323 के तहत छह माह का कठोर कारावास व एक हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।1.50 लाख रुपये मृतक के परिवार को मुआवजे के रूप में देने के आदेश दिए गए हैं।
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