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Sonipat News: शिवरात्रि आज...जलाभिषेक के साथ बोल बम के जयघोष से गूंजेंगे शिवालय
Thu, 01 Aug 2024 10:29 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 01 Aug 2024 10:29 PM IST
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सोनीपत की कैलाश कॉलोनी स्थित ओम शिव धाम मंदिर में शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करते श्रद्धालु। संवाद
सोनीपत। आज शिवरात्रि है। जिले के शिवालय बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजेंगे। सुबह 3:46 बजे शिवलिंग पर जलाभिषेक प्रारंभ होगा। हरिद्वार, गंगोत्री व गोमुख से कांवड़ लाने वाले शिव भक्त शिवालय की ओर पहुंचने लगे हैं। जिनकी सेवा के लिए शहरभर में जगह-जगह शिविर लगाए गए हैं।
कैलाश कॉलोनी स्थित ओम शिव धाम मंदिर के पुजारी पंडित जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि शिवरात्रि के दिन भगवान शंकर शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए यह दिन भोलेनाथ के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है। जो श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की उपासना करते हैं, उन पर सदैव भोलेनाथ की कृपा बनी रहती है।
शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन सुबह जल्दी स्नान कर साफ सुथरे वस्त्र धारण कर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी व शहद से जलाभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, भांग व नारियल अर्पित करें। शिव चालीसा व शिव स्तुति कर भगवान को दूध से बनी चीजों का भोग लगाएं। ऐसा करने से भगवान भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। साथ ही रुद्राभिषेक मंगलकारी है। शिव वास की तिथियों पर किया गया रुद्राभिषेक मंगल फल देता है, लेकिन जिन तिथियों में शिव का वास नहीं होता है, उस समय किया गया रुद्राभिषेक शुभकारी नहीं माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। जो श्रद्धालु सच्चे मन से व्रत रखकर भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
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यह रहेगा शुभ मुहूर्त
शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है। सावन माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 अगस्त को शाम 3:27 से प्रारंभ होकर अगले दिन शाम 3:50 तक रहेगी। त्रयोदशी का समय वीरवार दोपहर 3:28 से शुक्रवार शाम 3:26 बजे तक रहेगा। कांवड़िये और श्रद्धालु शुक्रवार को पूरा दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ व्रत का पालन कर सकते हैं।
चार पहर में होगी भगवान शिव की पूजा-अर्चना
जलाभिषेक के लिए वीरवार शाम 03:55 बजे से रात 7:56 तक प्रथम पहर, शुक्रवार प्रात:कालीन 3:46 से 9:35 बजे तक दूसरा पहर, तीसरे पहर में शाम 4:02 से 07:50 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। चौथे पहर के तहत रात 7:50 से अगले दिन सुबह 9:30 बजे तक भी शुभ मुहूर्त माना गया है। हरिद्वार सहित विभिन्न स्थानों से गंगाजल लाने वाले शिव भक्त व श्रद्धालु इन शुभ मुहूर्त में भगवान शिव को जल अर्पित कर सकते हैं। शिवरात्रि का व्रत 2 अगस्त को ही रखा जाएगा। चतुर्दशी तिथि 3 अगस्त को दोपहर शाम 3:50 बजे तक रहेगी।
इन उपायों से जीवन में आएगी सुख-समृद्धि
-मोक्ष प्राप्ति के लिए तीर्थ के जल से, संतान सुख के लिए गाय के दूध से जलाभिषेक करें।
-ज्ञान प्राप्ति के लिए शक्कर व तपेदिक दूर करने शहद से जलाभिषेक करें।
-मनोकामना पूर्ति व सुख-समृद्धि के लिए पंचामृत से जलाभिषेक करें।
-रोगों से मुक्ति पाने के लिए जलाभिषेक से एकत्रित जल का घर में छिड़काव करें।
-असाध्य रोगों से मुक्ति पाने के लिए इत्र के जल से शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
-भूमि व मकान के लिए दही, धन प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से जलाभिषेक करें।
-धन वृद्धि की कामना के लिए शहद व घी और ज्वर शांति के लिए गंगाजल से जलाभिषेक करें।
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कैलाश कॉलोनी स्थित ओम शिव धाम मंदिर के पुजारी पंडित जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि शिवरात्रि के दिन भगवान शंकर शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए यह दिन भोलेनाथ के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है। जो श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की उपासना करते हैं, उन पर सदैव भोलेनाथ की कृपा बनी रहती है।
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शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन सुबह जल्दी स्नान कर साफ सुथरे वस्त्र धारण कर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी व शहद से जलाभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, भांग व नारियल अर्पित करें। शिव चालीसा व शिव स्तुति कर भगवान को दूध से बनी चीजों का भोग लगाएं। ऐसा करने से भगवान भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। साथ ही रुद्राभिषेक मंगलकारी है। शिव वास की तिथियों पर किया गया रुद्राभिषेक मंगल फल देता है, लेकिन जिन तिथियों में शिव का वास नहीं होता है, उस समय किया गया रुद्राभिषेक शुभकारी नहीं माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। जो श्रद्धालु सच्चे मन से व्रत रखकर भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
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यह रहेगा शुभ मुहूर्त
शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है। सावन माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 अगस्त को शाम 3:27 से प्रारंभ होकर अगले दिन शाम 3:50 तक रहेगी। त्रयोदशी का समय वीरवार दोपहर 3:28 से शुक्रवार शाम 3:26 बजे तक रहेगा। कांवड़िये और श्रद्धालु शुक्रवार को पूरा दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ व्रत का पालन कर सकते हैं।
चार पहर में होगी भगवान शिव की पूजा-अर्चना
जलाभिषेक के लिए वीरवार शाम 03:55 बजे से रात 7:56 तक प्रथम पहर, शुक्रवार प्रात:कालीन 3:46 से 9:35 बजे तक दूसरा पहर, तीसरे पहर में शाम 4:02 से 07:50 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। चौथे पहर के तहत रात 7:50 से अगले दिन सुबह 9:30 बजे तक भी शुभ मुहूर्त माना गया है। हरिद्वार सहित विभिन्न स्थानों से गंगाजल लाने वाले शिव भक्त व श्रद्धालु इन शुभ मुहूर्त में भगवान शिव को जल अर्पित कर सकते हैं। शिवरात्रि का व्रत 2 अगस्त को ही रखा जाएगा। चतुर्दशी तिथि 3 अगस्त को दोपहर शाम 3:50 बजे तक रहेगी।
इन उपायों से जीवन में आएगी सुख-समृद्धि
-मोक्ष प्राप्ति के लिए तीर्थ के जल से, संतान सुख के लिए गाय के दूध से जलाभिषेक करें।
-ज्ञान प्राप्ति के लिए शक्कर व तपेदिक दूर करने शहद से जलाभिषेक करें।
-मनोकामना पूर्ति व सुख-समृद्धि के लिए पंचामृत से जलाभिषेक करें।
-रोगों से मुक्ति पाने के लिए जलाभिषेक से एकत्रित जल का घर में छिड़काव करें।
-असाध्य रोगों से मुक्ति पाने के लिए इत्र के जल से शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
-भूमि व मकान के लिए दही, धन प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से जलाभिषेक करें।
-धन वृद्धि की कामना के लिए शहद व घी और ज्वर शांति के लिए गंगाजल से जलाभिषेक करें।