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रैली से दो घंटे पहले पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक ने छोड़ी भाजपा
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
Updated Sun, 09 Oct 2016 12:40 AM IST
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पूर्व सांसद
- फोटो : sonipat
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गन्नौर हलके में सांसद रमेश कौशिक व पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक के बीच वर्चस्व को लेकर चली रही खींचतान शनिवार को गन्नौर रैली में सीएम के पहुंचने से दो घंटे पहले उजागर हो गई, जब पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक ने भाजपा को अलविदा कह दिया। मलिक का कहना है कि वे किसी के नीचे रहकर काम नहीं कर सकते। वे अपने तरीके से राजनीति करते हैं। समर्थकों से बातचीत करके तय करेंगे कि किस पार्टी में जाएं या नहीं जाएं।
पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक हलके के गांव भिगान के रहने वाले हैं। उनके दादा चौधरी लहरी सिंह संयुक्त पंजाब सरकार में सिंचाई एवं विद्युत मंत्री रहे, जबकि उनके पिता राजेंद्र सिंह भी प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं नागरिक उड्डयन मंत्री रह चुके हैं। जितेंद्र मलिक ने 1995 से 2000 तक जिला परिषद सदस्य रहे, जबकि 2000 से 2009 तक लगातार दो बार गन्नौर हलके से कांग्रेस से विधायक बने। साल 2009 में मलिक सोनीपत से लोकसभा सांसद बने। हालांकि, 2014 में वे विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा को टिकट दे दी। नाराज जितेंद्र मलिक ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया और विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वे चुनाव हार गए।
हलके में सांसद व पूर्व सांसद के बीच वर्चस्व की लड़ाई
भाजपा सांसद रमेश कौशिक का पैतृक गांव समसपुर गामड़ा व पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक का पैतृक गांव भिवान गन्नौर हलके में हैं। सोनीपत में रहने के बावजूद दोनों नेता हलके की राजनीति में अहम स्थान रखते हैं। अब केंद्र व राज्य में भाजपा का शासन है, ऐसे में सांसद रमेश कौशिक का हलके के विकास कार्यों से लेकर योजनाओं में अहम रोल रहता है। सांसद होने के नाते शासन व प्रशासन पर भी प्रभाव रखते हैं। वहीं, पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक दो बार हलके के न विधायक रहे हैं, बल्कि उनके उनके दादा व पिता भी प्रदेश सरकार में मंत्री रहे चुके हैं। ऐसे में उनका भी हलके में पूरा रुतबा है।
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मंच के सामने होर्डिंग व स्टेज पर वर्चस्व को लेकर बिगड़ी बात
शुक्रवार की रात मंच तैयार हो गया। पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक के समर्थकों ने मंच के ठीक सामने अपने होर्डिंग लगा दिए। चर्चा है कि जब सांसद रमेश कौशिक को पता चला तो उन्होंने एतराज जताया और कहा कि उनके समर्थकों के भी तो होर्डिंग लगने हैं। वे 15 दिन से रैली के लिए गांव-गांव जाकर पसीना बहा रहे हैं। यह तो उनके लिए अन्याय है। यह विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि रैली में वीआईपी स्टेज के पास को लेकर बिगड़ गया। पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक ने प्रशासन के अधिकारियों से अपने समर्थकों के लिए वीआईपी पास मांगे तो उन्हें सांसद रमेश कौशिक से बात करने को कहा गया। जितेंद्र मलिक ने बात नहीं की और समर्थक अपने होर्डिंग उतारकर रात 10 बजे रैली स्थल से रवाना हो गए। साथ ही सुबह 10 बजे भाजपा छोड़ने का एलान कर दिया। खास बात यह है कि अचानक हुए घटनाक्रम पर दोनों पक्ष खुलकर खुलकर नहीं बोल रहे हैं।
किसी के नीचे रहकर राजनीति नहीं करता : मलिक
वे ऐसे परिवार से हैं, जिनके पूर्वज मंत्री रहे। अब वे किसी के नीचे या दबाव में रहकर राजनीति नहीं कर सकते। भाजपा में मान-सम्मान के लिए शामिल हुआ था, जहां सम्मान नहीं मिलेगा तो ऐसी पार्टी में रहने का क्या फायदा। अब किसी पार्टी को ज्वाइन करना है, यह तो समर्थकों के साथ बात करके फैसला करूंगा।
जितेंद्र मलिक, पूर्व सांसद
उनका जितेंद्र मलिक या किसी अन्य से होर्डिंग या वीआईपी पास को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ। पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक ने पहले ही भाजपा छोड़ने का मन बना रखा था और रैली को फ्लॉप करने के लिए एन वक्त पहले इसका एलान कर दिया। लेकिन रैली फिर भी कामयाब रही।
रमेश कौशिक, सांसद लोकसभा, सोनीपत
मलिक के पार्टी छोड़ने का सवाल टाल गए सीएम, कांग्रेस को नसीहत
रैली के बाद मीडिया ने जब सीएम मनोहरलाल खट्टर से पूछा कि पूर्व सांसद व गन्नौर हलके के दो बार विधायक रहे जितेंद्र मलिक भाजपा छोड़ गए हैं। इस पर सीएम पहले तो चुप्पी साधे रहे। दोबारा पूछने पर कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। हालांकि, सीएम ने कांग्रेस को नसीहत दी कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अशोक तंवर खेमे की खींचतान कांग्रेस पार्टी का अंदरूनी मामला है, लेकिन संस्थाएं व राजनीतिक दल आपसी सामंजस्य व लोकतांत्रिक तरीके से चलने चाहिए। एक दूसरे के खिलाफ खड़े होकर डंडे चलाना सामाजिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।
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पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक हलके के गांव भिगान के रहने वाले हैं। उनके दादा चौधरी लहरी सिंह संयुक्त पंजाब सरकार में सिंचाई एवं विद्युत मंत्री रहे, जबकि उनके पिता राजेंद्र सिंह भी प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं नागरिक उड्डयन मंत्री रह चुके हैं। जितेंद्र मलिक ने 1995 से 2000 तक जिला परिषद सदस्य रहे, जबकि 2000 से 2009 तक लगातार दो बार गन्नौर हलके से कांग्रेस से विधायक बने। साल 2009 में मलिक सोनीपत से लोकसभा सांसद बने। हालांकि, 2014 में वे विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा को टिकट दे दी। नाराज जितेंद्र मलिक ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया और विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वे चुनाव हार गए।
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हलके में सांसद व पूर्व सांसद के बीच वर्चस्व की लड़ाई
भाजपा सांसद रमेश कौशिक का पैतृक गांव समसपुर गामड़ा व पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक का पैतृक गांव भिवान गन्नौर हलके में हैं। सोनीपत में रहने के बावजूद दोनों नेता हलके की राजनीति में अहम स्थान रखते हैं। अब केंद्र व राज्य में भाजपा का शासन है, ऐसे में सांसद रमेश कौशिक का हलके के विकास कार्यों से लेकर योजनाओं में अहम रोल रहता है। सांसद होने के नाते शासन व प्रशासन पर भी प्रभाव रखते हैं। वहीं, पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक दो बार हलके के न विधायक रहे हैं, बल्कि उनके उनके दादा व पिता भी प्रदेश सरकार में मंत्री रहे चुके हैं। ऐसे में उनका भी हलके में पूरा रुतबा है।
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मंच के सामने होर्डिंग व स्टेज पर वर्चस्व को लेकर बिगड़ी बात
शुक्रवार की रात मंच तैयार हो गया। पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक के समर्थकों ने मंच के ठीक सामने अपने होर्डिंग लगा दिए। चर्चा है कि जब सांसद रमेश कौशिक को पता चला तो उन्होंने एतराज जताया और कहा कि उनके समर्थकों के भी तो होर्डिंग लगने हैं। वे 15 दिन से रैली के लिए गांव-गांव जाकर पसीना बहा रहे हैं। यह तो उनके लिए अन्याय है। यह विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि रैली में वीआईपी स्टेज के पास को लेकर बिगड़ गया। पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक ने प्रशासन के अधिकारियों से अपने समर्थकों के लिए वीआईपी पास मांगे तो उन्हें सांसद रमेश कौशिक से बात करने को कहा गया। जितेंद्र मलिक ने बात नहीं की और समर्थक अपने होर्डिंग उतारकर रात 10 बजे रैली स्थल से रवाना हो गए। साथ ही सुबह 10 बजे भाजपा छोड़ने का एलान कर दिया। खास बात यह है कि अचानक हुए घटनाक्रम पर दोनों पक्ष खुलकर खुलकर नहीं बोल रहे हैं।
किसी के नीचे रहकर राजनीति नहीं करता : मलिक
वे ऐसे परिवार से हैं, जिनके पूर्वज मंत्री रहे। अब वे किसी के नीचे या दबाव में रहकर राजनीति नहीं कर सकते। भाजपा में मान-सम्मान के लिए शामिल हुआ था, जहां सम्मान नहीं मिलेगा तो ऐसी पार्टी में रहने का क्या फायदा। अब किसी पार्टी को ज्वाइन करना है, यह तो समर्थकों के साथ बात करके फैसला करूंगा।
जितेंद्र मलिक, पूर्व सांसद
उनका जितेंद्र मलिक या किसी अन्य से होर्डिंग या वीआईपी पास को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ। पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक ने पहले ही भाजपा छोड़ने का मन बना रखा था और रैली को फ्लॉप करने के लिए एन वक्त पहले इसका एलान कर दिया। लेकिन रैली फिर भी कामयाब रही।
रमेश कौशिक, सांसद लोकसभा, सोनीपत
मलिक के पार्टी छोड़ने का सवाल टाल गए सीएम, कांग्रेस को नसीहत
रैली के बाद मीडिया ने जब सीएम मनोहरलाल खट्टर से पूछा कि पूर्व सांसद व गन्नौर हलके के दो बार विधायक रहे जितेंद्र मलिक भाजपा छोड़ गए हैं। इस पर सीएम पहले तो चुप्पी साधे रहे। दोबारा पूछने पर कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। हालांकि, सीएम ने कांग्रेस को नसीहत दी कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अशोक तंवर खेमे की खींचतान कांग्रेस पार्टी का अंदरूनी मामला है, लेकिन संस्थाएं व राजनीतिक दल आपसी सामंजस्य व लोकतांत्रिक तरीके से चलने चाहिए। एक दूसरे के खिलाफ खड़े होकर डंडे चलाना सामाजिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।