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सवा 400 स्कूल बंद, संचालक और स्टाफ सड़क पर
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Thu, 29 Oct 2015 12:02 AM IST
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नई शिक्षा नीति के कुछ नियमों और नियम 134-ए को लेकर जिले भर के लगभग सवा 400 निजी स्कूल संचालक और उनका स्टाफ बुधवार को सड़क पर उतर आया। गीता भवन चौक पर एकत्र हुआ स्टाफ पैदल ही जुलूस की शक्ल में लघु सचिवालय तक पहुंचा था। इस दौरान शहर में जाम की स्थिति बनी रही। दूसरी ओर लघु सचिवालय में स्कूल संचालकों के इस जुलूस को छात्र अभिभावक संघ के पदाधिकारियों ने काले झंडे और जूते दिखाए। जूते दिखाने से एकबारगी हालत बिगड़ भी गए थे। स्कूल के कुछ स्टाफ और अभिभावकों के बीच जमकर बहस हुई। हालांकि इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने बीचबचाव कर मामला शांत करा दिया। इसके बाद लघु सचिवालय में निजी स्कूल संचालकों ने जमकर प्रदर्शन किया। सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए नियमों के खिलाफ रोष व्यक्त किया। अंत में डीसी ने संघ के पदाधिकारियों की ओर से ज्ञापन लिया और आश्वासन दिया कि ज्ञापन की मांगों के संदर्भ में उच्चाधिकारियों से बातचीत की जाएगी। बता दें कि हड़ताल के चलते जिलेभर के लगभग सवा 400 निजी स्कूल बंद रहे। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व संघ के प्रदेश प्रधान बिजेंद्र मान ने किया। इस दौरान जिला प्रधान अजमेर सिंह, धर्मप्रकाश आर्य, आशीष आर्य, हिमांशु कुच्छल, एसके शर्मा, वीके मित्तल, मनोहर लाल चावला, दिनेश रोहिल्ला, राजेंद्र, आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।
9 की बजाय 10 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन
स्कूलों को एक दिन के लिए बंद रख करने का निर्णय 17 अक्टूबर को मीटिंग में हुआ था। मीटिंग में ही 9 बजे का समय तय किया गया था। इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन 10 बजे शुरू हो पाया। 10 बजे तक भी कई स्कूल संचालक मौके पर पहुंचे नहीं थे। जिन स्कूलों का स्टाफ देर से पहुंचा, वे चुपके से जुलूस में शामिल हुए। वहीं जो संचालक लेट थे, वे लघु सचिवालय पहुंचकर ही विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
पुरखास अड्डे से गीता भवन चौक तक दिखा सिर्फ निजी स्कूलों का स्टाफ
निजी स्कूलों की बसों से इतना जाम नहीं लगता, जितना कि आज स्कूल संचालकों और उनके स्टाफ के कारण लगा। गीता भवन चौक से जुलूस चलने से पहले ही स्टाफ को छोड़ने आए वाहनों से गीता भवन चौक पर जाम लग गया था। चाहे रेलवे रोड हो, गुरुद्वारा रोड या फिर कच्चे क्वार्टर वाला रोड सभी जगह लंबा जाम लगा था। लगभग 400 स्कूलों का स्टाफ सड़क पर था इसीलिए जुलूस भी काफी लंबा था। अंदाजा इसी से लगा लें कि जुलूस के आगे के लोग पुरखास अड्डा पहुंच गए थे, जबकि जुलूस का अंतिम हिस्सा गीता भवन चौक पर था। जहां-जहां से जुलूस निकला, वहां-वहां जाम की स्थिति बनती गई। दोपहर के समय जब डीसी को ज्ञापन देने के बाद स्कूल संचालक और स्टाफ को लेकर उनकी बसें रवाना हुईं तो उस दौरान भी छोटूराम चौक, शनि मंदिर आरयूबी, पुरखास अड्डा और गीता भवन चौक पर जाम लगा रहा।
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लघु सचिवालय के बाहर अभिभावक संघ ने दिखाए काले झंडे
निजी स्कूल संचालकों के इस प्रदर्शन के विरोध में छात्र अभिभावक संघ के पदाधिकारी भी उतर आए। संघ के पदाधिकारियों ने पहले तो शनि मंदिर आरयूबी पर जुलूस निकाल रहे स्कूल संचालकों को काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। इसके उपरांत यह सभी लघु सचिवालय के बाहर एकत्र हुए। यहां पर संघ के पदाधिकारियों ने जुलूस में शामिल प्रदर्शनकारियों को काले झंडे दिखाए। संघ की ओर से जुलूस को जूते भी दिखाए गए। अभिभावक संघ की ओर से संयोजक विमल किशोर, ओमप्रकाश, राहुल, प्रवीण कुमार, संदीप हुड्डा, सुमित, जसमेंद्र, शिव कुमार, रमन, चंद्रभान, पवन, दीपक, महेश, जगवंती, विमला, कमला, संजू, दयावंती, रूबी, भारती किरण आदि मौजूद रहे।
पुलिस ने संभाला विवाद
जिस समय अभिभावक संघ की ओर से जूते दिखाए जा रहे थे, उसके कुछ ही पल के बाद जुलूस में शामिल एक स्कूल के तीन-चार स्टाफ और संघ के पदाधिकारियों के बीच विवाद हो गया था। दोनों पक्षों में जमकर एक-दूसरे के खिलाफ हूटिंग की। धीरे-धीरे बात हाथापाई तक पहुंच गई थी। लेकिन उसी समय मूकदर्शक बनी पुलिस में जैसे जान आ गई और पुलिस कर्मी बीचबचाव में आ गए। इसके बाद भी दोनों पक्षों द्वारा हूटिंग जारी रही, लेकिन पुलिसकर्मियों के कारण विवाद बढ़ने न पाया।
5 मिनट का अल्टीमेटम, 14 मिनट में आए डीसी, 3 मिनट में चले भी गए
प्रदर्शनकारी स्कूल संचालक और स्कूल स्टाफ मुख्य सचिवालय के सामने प्रदर्शन कर रहा था। प्रदर्शनकारियों ने डीसी को नीचे आकर ज्ञापन लेने का संदेश भिजवाया। डीसी राजीव रतन की ओर से पहले संदेश मिला कि मीटिंग चल रही है, इसलिए एक प्रतिनिधिमंडल ऊपर आकर ज्ञापन दे जाए, लेकिन स्कूल संचालकों ने जिद कायम रखी और 5 मिनट का अल्टीमेटम दिया। प्रधान अजमेर सिंह ने इस दौरान कहा था कि अगर 5 मिनट में डीसी ज्ञापन लेने नीचे नहीं आएंगे तो सभी प्रदर्शनकारी ऊपर पहुंचकर डीसी को ज्ञापन देंगे। 11 बजकर 17 मिनट पर अजमेर सिंह ने अल्टीमेटम दिया था। हालांकि प्रदर्शनकारियों की जिद के आगे डीसी को झुकना पड़ा और डीसी मीटिंग छोड़कर नीचे आए, लेकिन पूरे 14 मिनट बाद 11 बजकर 31 मिनट पर। 3 मिनट तक प्रदर्शनकारियों के बीच में रहने के बाद 11 बजकर 34 मिनट पर डीसी वापस निकल लिए।
कुछ स्कूल काट गए कन्नी, कुछ ने बीच राह छोड़ा रास्ता
यूं तो स्कूल संचालकों के इस जुलूस में प्रदर्शनकारियों की संख्या बहुत अधिक थी, लेकिन सचिवालय पहुंचते-पहुंचते तक संख्या में थोड़ी गिरावट आ गई थी। प्रदर्शन के दौरान जब गीता भवन चौक से जुलूस निकाला गया तो कुछ महिला स्टाफ इधर-उधर से होते से बीच में ही प्रदर्शन छोड़ गए। वहीं कुछ स्कूल ऐसे भी रहे, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन से पूरी तरह से परहेज रखा। इसमें शंभूदयाल मॉडर्न स्कूल भी शामिल था।
ये रखी मांगें
1. नियम 134-ए के तहत मेधावी छात्र का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी विद्यालय को दी जाए, आरटीई के अनुसार बच्चे की फीस सरकार दे, यदि सरकार आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में बच्चे को प्रवेश नहीं देना चाहती तो 25 प्रतिशत सीट खाली करने की अनिवार्यता समाप्त करे
2. मान्यता के नियमों का सरलीकरण किया जाए।
3. शिक्षण संस्थानों पर लगाए गए प्रॉपर्टी टैक्स को निरस्त किया जाए।
4. बसों में पीटीजेड कैमरे एक बस में लगाना महंगा पड़ेगा, भारी होने के कारण दुघर्टना भी संभव है, इसीलिए उनकी जगह वैब कैमरे लगवाए जा सकते हैं।
5. लेडी कंडक्टर का बसों में रखना संभव नहीं। बच्चों को छोड़ने के बाद उसके साथ भी दुर्व्यवहार हो सकता है। इसके अलावा बस में पंचर या अन्य कोई खराबी होने पर पुरुष कंडक्टर ड्राइवर की मदद कर सकता है। महिला कंडक्टर ऐसे मौके पर खुद भी परेशान होगी।
6. ट्रासजेंडर को बस में परिचालक लगाना अनुचित होगा क्योंकि सामान्यता इनका व्यवहार स्कूल के माहौल से मेल नहीं खाता।
7. बसों में जीपीएस लगवाने की अनिवार्यता गलत है। स्कूल बसें निर्धारित रूट पर निर्धारित समय पर ही चलती हैं।
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9 की बजाय 10 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन
स्कूलों को एक दिन के लिए बंद रख करने का निर्णय 17 अक्टूबर को मीटिंग में हुआ था। मीटिंग में ही 9 बजे का समय तय किया गया था। इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन 10 बजे शुरू हो पाया। 10 बजे तक भी कई स्कूल संचालक मौके पर पहुंचे नहीं थे। जिन स्कूलों का स्टाफ देर से पहुंचा, वे चुपके से जुलूस में शामिल हुए। वहीं जो संचालक लेट थे, वे लघु सचिवालय पहुंचकर ही विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
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पुरखास अड्डे से गीता भवन चौक तक दिखा सिर्फ निजी स्कूलों का स्टाफ
निजी स्कूलों की बसों से इतना जाम नहीं लगता, जितना कि आज स्कूल संचालकों और उनके स्टाफ के कारण लगा। गीता भवन चौक से जुलूस चलने से पहले ही स्टाफ को छोड़ने आए वाहनों से गीता भवन चौक पर जाम लग गया था। चाहे रेलवे रोड हो, गुरुद्वारा रोड या फिर कच्चे क्वार्टर वाला रोड सभी जगह लंबा जाम लगा था। लगभग 400 स्कूलों का स्टाफ सड़क पर था इसीलिए जुलूस भी काफी लंबा था। अंदाजा इसी से लगा लें कि जुलूस के आगे के लोग पुरखास अड्डा पहुंच गए थे, जबकि जुलूस का अंतिम हिस्सा गीता भवन चौक पर था। जहां-जहां से जुलूस निकला, वहां-वहां जाम की स्थिति बनती गई। दोपहर के समय जब डीसी को ज्ञापन देने के बाद स्कूल संचालक और स्टाफ को लेकर उनकी बसें रवाना हुईं तो उस दौरान भी छोटूराम चौक, शनि मंदिर आरयूबी, पुरखास अड्डा और गीता भवन चौक पर जाम लगा रहा।
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लघु सचिवालय के बाहर अभिभावक संघ ने दिखाए काले झंडे
निजी स्कूल संचालकों के इस प्रदर्शन के विरोध में छात्र अभिभावक संघ के पदाधिकारी भी उतर आए। संघ के पदाधिकारियों ने पहले तो शनि मंदिर आरयूबी पर जुलूस निकाल रहे स्कूल संचालकों को काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। इसके उपरांत यह सभी लघु सचिवालय के बाहर एकत्र हुए। यहां पर संघ के पदाधिकारियों ने जुलूस में शामिल प्रदर्शनकारियों को काले झंडे दिखाए। संघ की ओर से जुलूस को जूते भी दिखाए गए। अभिभावक संघ की ओर से संयोजक विमल किशोर, ओमप्रकाश, राहुल, प्रवीण कुमार, संदीप हुड्डा, सुमित, जसमेंद्र, शिव कुमार, रमन, चंद्रभान, पवन, दीपक, महेश, जगवंती, विमला, कमला, संजू, दयावंती, रूबी, भारती किरण आदि मौजूद रहे।
पुलिस ने संभाला विवाद
जिस समय अभिभावक संघ की ओर से जूते दिखाए जा रहे थे, उसके कुछ ही पल के बाद जुलूस में शामिल एक स्कूल के तीन-चार स्टाफ और संघ के पदाधिकारियों के बीच विवाद हो गया था। दोनों पक्षों में जमकर एक-दूसरे के खिलाफ हूटिंग की। धीरे-धीरे बात हाथापाई तक पहुंच गई थी। लेकिन उसी समय मूकदर्शक बनी पुलिस में जैसे जान आ गई और पुलिस कर्मी बीचबचाव में आ गए। इसके बाद भी दोनों पक्षों द्वारा हूटिंग जारी रही, लेकिन पुलिसकर्मियों के कारण विवाद बढ़ने न पाया।
5 मिनट का अल्टीमेटम, 14 मिनट में आए डीसी, 3 मिनट में चले भी गए
प्रदर्शनकारी स्कूल संचालक और स्कूल स्टाफ मुख्य सचिवालय के सामने प्रदर्शन कर रहा था। प्रदर्शनकारियों ने डीसी को नीचे आकर ज्ञापन लेने का संदेश भिजवाया। डीसी राजीव रतन की ओर से पहले संदेश मिला कि मीटिंग चल रही है, इसलिए एक प्रतिनिधिमंडल ऊपर आकर ज्ञापन दे जाए, लेकिन स्कूल संचालकों ने जिद कायम रखी और 5 मिनट का अल्टीमेटम दिया। प्रधान अजमेर सिंह ने इस दौरान कहा था कि अगर 5 मिनट में डीसी ज्ञापन लेने नीचे नहीं आएंगे तो सभी प्रदर्शनकारी ऊपर पहुंचकर डीसी को ज्ञापन देंगे। 11 बजकर 17 मिनट पर अजमेर सिंह ने अल्टीमेटम दिया था। हालांकि प्रदर्शनकारियों की जिद के आगे डीसी को झुकना पड़ा और डीसी मीटिंग छोड़कर नीचे आए, लेकिन पूरे 14 मिनट बाद 11 बजकर 31 मिनट पर। 3 मिनट तक प्रदर्शनकारियों के बीच में रहने के बाद 11 बजकर 34 मिनट पर डीसी वापस निकल लिए।
कुछ स्कूल काट गए कन्नी, कुछ ने बीच राह छोड़ा रास्ता
यूं तो स्कूल संचालकों के इस जुलूस में प्रदर्शनकारियों की संख्या बहुत अधिक थी, लेकिन सचिवालय पहुंचते-पहुंचते तक संख्या में थोड़ी गिरावट आ गई थी। प्रदर्शन के दौरान जब गीता भवन चौक से जुलूस निकाला गया तो कुछ महिला स्टाफ इधर-उधर से होते से बीच में ही प्रदर्शन छोड़ गए। वहीं कुछ स्कूल ऐसे भी रहे, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन से पूरी तरह से परहेज रखा। इसमें शंभूदयाल मॉडर्न स्कूल भी शामिल था।
ये रखी मांगें
1. नियम 134-ए के तहत मेधावी छात्र का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी विद्यालय को दी जाए, आरटीई के अनुसार बच्चे की फीस सरकार दे, यदि सरकार आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में बच्चे को प्रवेश नहीं देना चाहती तो 25 प्रतिशत सीट खाली करने की अनिवार्यता समाप्त करे
2. मान्यता के नियमों का सरलीकरण किया जाए।
3. शिक्षण संस्थानों पर लगाए गए प्रॉपर्टी टैक्स को निरस्त किया जाए।
4. बसों में पीटीजेड कैमरे एक बस में लगाना महंगा पड़ेगा, भारी होने के कारण दुघर्टना भी संभव है, इसीलिए उनकी जगह वैब कैमरे लगवाए जा सकते हैं।
5. लेडी कंडक्टर का बसों में रखना संभव नहीं। बच्चों को छोड़ने के बाद उसके साथ भी दुर्व्यवहार हो सकता है। इसके अलावा बस में पंचर या अन्य कोई खराबी होने पर पुरुष कंडक्टर ड्राइवर की मदद कर सकता है। महिला कंडक्टर ऐसे मौके पर खुद भी परेशान होगी।
6. ट्रासजेंडर को बस में परिचालक लगाना अनुचित होगा क्योंकि सामान्यता इनका व्यवहार स्कूल के माहौल से मेल नहीं खाता।
7. बसों में जीपीएस लगवाने की अनिवार्यता गलत है। स्कूल बसें निर्धारित रूट पर निर्धारित समय पर ही चलती हैं।