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पायलट प्रोजेक्ट : पहले दिन 629 बच्चों की हीमोग्लोबिन जांच हुई, पांच बच्चों में कम मिला खून
Mon, 13 May 2024 09:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 13 May 2024 09:54 PM IST
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सोनीपत। बच्चों को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से हीमोग्लोबिन जांच शुरू कर दी गई है। फिरोजपुर बांगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के तहत आने वाले गांवों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच अभियान पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया गया है। इसका शुभारंभ उप सिविल सर्जन डाॅ. स्वराज चौधरी, डॉ. अनविता कौशिक व खंड शिक्षा अधिकारी सुजाता खत्री ने किया। इस दौरान सीएचसी के अंतर्गत आने वाले गांवों के स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीमें बच्चों के हीमोग्लोबिन की जांच करेंगी।
पहले दिन सोमवार को 629 बच्चों की हीमोग्लोबिन जांच की गई। जांच के बाद बच्चे की शारीरिक स्थिति का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। माइल्ड यानी मामूली, मोड्रेट यानी कमी के अनुकूल और सीवियर यानी अत्यधिक खून की कमी का पता लगाने के लिए टेस्ट किए जा रहे है। उप सिविल सर्जन डॉ. स्वराज चौधरी ने कहा कि छह माह से 5 साल तक के बच्चों में 7 ग्राम, 6 से 11 साल के बच्चों में 8 ग्राम और 12 से 14 साल तक के बच्चों में 8 ग्राम खून की मात्रा होनी चाहिए। जांच के दौरान पांच बच्चों में सबसे ज्यादा खून की कमी थी। उन बच्चों का स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपचार किया जाएगा। साथ ही बच्चों को आयरन फोलिक एसिड की गोलियां वितरित की गई।
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पहले दिन सोमवार को 629 बच्चों की हीमोग्लोबिन जांच की गई। जांच के बाद बच्चे की शारीरिक स्थिति का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। माइल्ड यानी मामूली, मोड्रेट यानी कमी के अनुकूल और सीवियर यानी अत्यधिक खून की कमी का पता लगाने के लिए टेस्ट किए जा रहे है। उप सिविल सर्जन डॉ. स्वराज चौधरी ने कहा कि छह माह से 5 साल तक के बच्चों में 7 ग्राम, 6 से 11 साल के बच्चों में 8 ग्राम और 12 से 14 साल तक के बच्चों में 8 ग्राम खून की मात्रा होनी चाहिए। जांच के दौरान पांच बच्चों में सबसे ज्यादा खून की कमी थी। उन बच्चों का स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपचार किया जाएगा। साथ ही बच्चों को आयरन फोलिक एसिड की गोलियां वितरित की गई।
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