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रोहतक के पंचायतों में नए साल से जनप्रतिनिधि राज खत्म, अब अफसरों का होगा जलवा
Tue, 29 Dec 2020 10:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 29 Dec 2020 10:47 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में पंचायतों से वीरवार को जनप्रतिनिधियों का राज खत्म हो जाएगा और अब वहां अफसरों का राज कायम होगा। क्योंकि सरपंच, ब्लॉक समिति सदस्य व चेयरमैन, जिला परिषद सदस्य व चेयरमैन का कार्यकाल 31 दिसंबर को खत्म हो रहा है। पंचायत चुनाव होने तक पंचायतों व ब्लॉक समिति के प्रशासक बीडीपीओ तो जिला परिषद के सीईओ रहेंगे। जिस तरह से पंचायत चुनाव की तैयारी चल रही है, उससे लग रहा है कि दो महीने तक अफसरों का राज कायम रहेगा।
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वहीं चुनाव से पहले पंचायतों में जांच की तैयारी हो रही है, जिससे किसी तरह का घपला सामने आने पर नया सरपंच बनने से पहले ही कार्रवाई हो सके। प्रदेश में दिसंबर 2015 और जनवरी 2016 में पंचायत चुनाव कराए गए थे। सरकार के नियम बदलने के बाद पहली बार यह चुनाव हुए थे, जिनमें अशिक्षित के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई गई थी। सरकारी बैंक, बिजली निगम समेत अन्य का बकाया भी नहीं होने पर ही चुनाव लड़ने की शर्त थी। यह केवल इसलिए किया गया था ताकि विकास कार्य बेहतर तरीके से कराए जा सकें और सरपंच व अन्य प्रतिनिधि पढ़े-लिखे होने से गड़बड़ी नहीं हो सके।
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इस तरह सरकार के नियम बदलने के बाद चुने गए जन प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 दिसंबर को खत्म हो जाएगा। जिसके बाद पंचायतों में सरपंच और ब्लॉक समिति में सदस्यों के साथ ही चेयरमैन की जगह बीडीपीओ को प्रशासक लगाया जाएगा। वहीं जिला परिषद सदस्यों व चेयरमैन की जगह सीईओ प्रशासक बनकर काम संभालेंगे। अब गांवों में कोई भी विकास कार्य बीडीपीओ की मंजूरी के बिना नहीं होगा, जबकि पहले ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पास कराना होता था। इस तरह ही जिला परिषद के बजट से कार्य कराने के लिए केवल सीईओ सक्षम होंगे।
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सरकार के नियम बदलने के बाद शिक्षा प्रमाण पत्रों का फर्जीवाड़ा भी खूब हुआ
सरकार ने वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव से पहले अचानक ही अशिक्षितों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई तो उसके बाद फर्जीवाड़े का खेल भी शुरू हुआ। पहले से पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी करने वालों के यहां सीट महिला आरक्षित हुई और घर में पढ़ी-लिखी महिला नहीं होने पर किसी ने बेटे की तुरंत ही शादी कर दी। वह बहू भी पढ़ी-लिखी लेकर आए तो किसी ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिए थे। उन फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने वालों की शिकायत हुई तो प्रदेश में ऐसे 100 से ज्यादा मामले पकड़ में आए और उन सरपंचों को जांच के बाद हटाया भी गया।
पंचायतों में खर्च की जांच कराई जाएगी
पंचायत चुनाव फरवरी 2021 में होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बीच पंचायतों व जिला परिषद में प्रशासक कार्यभार संभालेंगे। इस बीच ही पंचायतों में खर्च हुई राशि की जांच कराने की तैयारी की जा रही है। जिससे पंचायत में नए सरपंच आने से पहले किसी जगह गड़बड़ी मिलती है तो वहां घपला करने वालों पर कार्रवाई की जा सके। इस तरह से यह भी संदेश देने की तैयारी है कि पंचायतों में विकास कार्यों में भ्रष्टाचार नहीं होने दिया जाएगा और उन पर कार्यकाल खत्म होने के बाद भी शिकंजा कसा जा सकता है।
डीसी श्यामलाल पूनिया ने कहा कि सरपंच, ब्लॉक समिति सदस्य व चेयरमैन, जिला परिषद सदस्य व चेयरमैन का कार्यकाल वीरवार को खत्म हो जाएगा। उसके बाद बीडीपीओ व जिला परिषद के सीईओ यह जिम्मेदारी संभालेंगे, क्योंकि उनको प्रशासक बनाया जाएगा। किसी भी विकास कार्य कराने की जिम्मेदारी इनकी ही होगी और चुनाव होने तक वह कार्यभार संभालते रहेंगे।