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ऑनलाइन परीक्षा : कैमरे से दूर होने और बोलने पर 40 विद्यार्थियों के बने यूएमसी
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कोरोनाकाल में विद्यार्थियों को संक्रमण से बचाने के लिए ऑनलाइन परीक्षा कराई गई तो विद्यार्थी नकल करने से पीछे नहीं रहे। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल की ऑनलाइन परीक्षा में ऐसे ही 40 विद्यार्थी नकल करते हुए मिले। इनमें कोई ऑनलाइन परीक्षा के दौरान कैमरे से दूर हो गया तो किसी ने प्रश्नपत्र को बोलकर पढ़ना शुरू कर दिया। ऐसा करने वाले सभी विद्यार्थियों के यूएमसी बना दिए गए। कोई विद्यार्थी पहले से तय नियम के अनुसार मोबाइल के आगे नहीं बैठा तो उसका भी यूएमसी बना दिया गया। यह जरूर है कि अब इन विद्यार्थियों को कमेटी के सामने अपना पत्र रखने का एक मौका दिया जाएगा और उसके आधार पर उनकी आगे की सजा पर फैसला होगा।
संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इस बार अंतिम वर्ष और अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के अलावा सभी को पिछले वर्ष व सेमेस्टर के अंक के आधार पर औसत अंक देकर उत्तीर्ण कर दिया गया था, जबकि अंतिम वर्ष और अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए यूजीसी के साथ ही कोर्ट ने परीक्षा कराने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल ने अपने अंतिम वर्ष व अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों तरह से परीक्षा देने का विकल्प दिया था। विद्यार्थियों ने खुद ही ऑनलाइन आवेदन किया था। ऑफलाइन का विकल्प चुनने वाले विद्यार्थियों को यूनिवर्सिटी व कॉलेज में बुलाकर परीक्षा कराई गई थी, जबकि ऑनलाइन का विकल्प चुनने वाले विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिका घर तक भेजी गई थी। इस पर यूनिवर्सिटी ने अपनी सील लगाई थी और वह सील यूनिवर्सिटी के सॉफ्टवेयर को शुरू करने के बाद कैमरे के सामने खोलनी थी।
यूनिवर्सिटी ने तय किया था कैमरे के सामने बैठने का तरीका
यह साफ किया गया था कि परीक्षा देते समय कोई भी विद्यार्थी कैमरे के सामने से नहीं हटेगा और वह किसी से बात भी नहीं करेगा। साथ ही कैमरे के सामने बैठने का तरीका भी यूनिवर्सिटी ने तय किया था। इस तरह सभी नियम तय किए गए थे, लेकिन विद्यार्थी अपनी हरकत से बाज नहीं आए। इनका पालन नहीं करने के अलावा नकल करने के कारण करीब 40 विद्यार्थियों के यूएमसी बने, जबकि ऑफलाइन परीक्षा में केवल छह यूएमसी बने हैं।
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वर्जन
जिन विद्यार्थियों के यूएमसी बनाए गए हैं, उन सभी को कमेटी के सामने पेश होना होगा। इसके लिए कमेटी का जल्द ही गठन किया जाएगा और उनके पेश होने की तारीख भी तय होगी। जहां विद्यार्थियों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। उनके जवाब से कमेटी संतुष्ट नहीं होती है तो उनका एक पेपर या परीक्षा निरस्त हो सकती है। एक साल या तीन साल तक परीक्षा देने पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।
- डॉ. एमएस धनखड़, परीक्षा नियंत्रक मुरथल यूनिवर्सिटी
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संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए इस बार अंतिम वर्ष और अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के अलावा सभी को पिछले वर्ष व सेमेस्टर के अंक के आधार पर औसत अंक देकर उत्तीर्ण कर दिया गया था, जबकि अंतिम वर्ष और अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए यूजीसी के साथ ही कोर्ट ने परीक्षा कराने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल ने अपने अंतिम वर्ष व अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों तरह से परीक्षा देने का विकल्प दिया था। विद्यार्थियों ने खुद ही ऑनलाइन आवेदन किया था। ऑफलाइन का विकल्प चुनने वाले विद्यार्थियों को यूनिवर्सिटी व कॉलेज में बुलाकर परीक्षा कराई गई थी, जबकि ऑनलाइन का विकल्प चुनने वाले विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिका घर तक भेजी गई थी। इस पर यूनिवर्सिटी ने अपनी सील लगाई थी और वह सील यूनिवर्सिटी के सॉफ्टवेयर को शुरू करने के बाद कैमरे के सामने खोलनी थी।
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यूनिवर्सिटी ने तय किया था कैमरे के सामने बैठने का तरीका
यह साफ किया गया था कि परीक्षा देते समय कोई भी विद्यार्थी कैमरे के सामने से नहीं हटेगा और वह किसी से बात भी नहीं करेगा। साथ ही कैमरे के सामने बैठने का तरीका भी यूनिवर्सिटी ने तय किया था। इस तरह सभी नियम तय किए गए थे, लेकिन विद्यार्थी अपनी हरकत से बाज नहीं आए। इनका पालन नहीं करने के अलावा नकल करने के कारण करीब 40 विद्यार्थियों के यूएमसी बने, जबकि ऑफलाइन परीक्षा में केवल छह यूएमसी बने हैं।
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जिन विद्यार्थियों के यूएमसी बनाए गए हैं, उन सभी को कमेटी के सामने पेश होना होगा। इसके लिए कमेटी का जल्द ही गठन किया जाएगा और उनके पेश होने की तारीख भी तय होगी। जहां विद्यार्थियों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। उनके जवाब से कमेटी संतुष्ट नहीं होती है तो उनका एक पेपर या परीक्षा निरस्त हो सकती है। एक साल या तीन साल तक परीक्षा देने पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।
- डॉ. एमएस धनखड़, परीक्षा नियंत्रक मुरथल यूनिवर्सिटी