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Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   Nagar Nigam Highcourt Appeal

नगर निगम को हाईकोर्ट में देंगे चुनौती

Sat, 11 Jul 2015 01:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला सोनीपत Updated Sat, 11 Jul 2015 01:17 AM IST
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सोनीपत को नगर निगम बनाने की अधिसूचना के बाद शुक्रवार को नांगल खुर्द के पास एक ढाबे पर राई क्षेत्र के गांवों को शामिल करने वाली पंचायतों के ग्रामीण और नगर निगम का विरोध करने वाली समिति के पदाधिकारी एकत्र हुए और सरकार के निर्णय के खिलाफ रोष जताया। साथ में ऐलान किया कि सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। बैठक की अध्यक्षता विजयपाल आंतिल ने की।

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ग्रामीणों ने नगर निगम विरोध समिति बनाकर महापंचायत में कहा कि किसी भी कीमत पर अपने गांवों को नगर निगम में नहीं जाने देंगे। 

निगम बनने के विरोध में नांगल खुर्द में हुई बैठक में आगे की रणनीति के साथ विरोधी समिति का गठन किया। समिति का प्रधान नांगल कलां के बृजेंद्र को बनाया गया।
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उपप्रधान जेपी रेवली और बृजेश राई को बनाया गया। नवनियुक्त समिति के सदस्यों ने निर्णय लिया कि वे नगरनिगम के विरोध में कोई कसर नही छोड़ेंगे।

वे हाईकोर्ट की भी शरण में जाएंगे। बैठक को हवा सिंह पहलवान, नारायण पंडित, बृजेंद्र, नरेंद्र, दर्शन, बालकिशन राई, रमेश पहलवान, महेंद्र ठेकेदार, दयानंद कुराड़, हवा सिंह दीपालपुर, बृजेंद्र, हरिप्रकाश, दयानंद, महेंद्र धर्मसिंह, हरपाल, बहादुर सिंह, संजय, दयाचंद्र, सुरेश हरनारायण आदि मौजूद थे।
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गौरतलब है कि पंचायतों ने नगर निगम में शामिल करने के विरोध में एक समिति गठित की थी। जिसने मुख्यमंत्री से गांवों को निगम में शामिल नहीं करने का विरोध किया था।

हालांकि सरकार ने उनकी मांग को अनसुना कर दिया। ग्रामीण चाहते थे कि पंचायतों के पास विकास के करोड़ों रुपये जमा है। निगम बनने से उनका विकास अवरुद्ध होगा।

ऐसे में पंचायत की तरफ से कूड़ा डालने की जगह निर्धारित हो जाती है, लेकिन नगर निगम बनने के बाद ग्रामीणों के पास कूड़ा डालने के जगह भी नही बचेगी। उन्होंने कहा था कि नगर निगम बनाने के बाद उन पर हर तरह के टैक्स लगा करेेंगे।

ग्रामीण बोले, एसलिए नहीं चाहिए निगम
ग्रामीणों का कहना था कि जिन गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया है उन गांवों की कुल पंचायती जमीन 3748 एकड़ है जिस पर कृषि उत्पादन, पशु पालन और गरीब लोगों को प्लॉट अलॉट किए जाते हैं।

अगर नगर निगम बना तो यह सारी जमीन निगम में चली जाएगी और इस पर गांव के लोगों का कोई हक नहीं बचेगा। जिन गांवों को निगम में शामिल किया गया है उनमें से ज्यादातर गांवों की जमीन नेशनल हाईवे-1 पर है और किसी न किसी प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहीत होती रहती है।

इसीलिए ग्राम पंचायतों के पास 300 करोड़ से ज्यादा रुपया जमा है। अगर निगम बना तो वह पैसा भी ग्रामीण विकास में नहीं लगेगा। गांव में बिजली दर कम होती है।


निगम बनाए जाने पर बिजली दर बढे़गी और शुल्क भी लगेगा। कामर्शियल दुकानों का अलग से रेट लगेगा जबकि गांवों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

गांव में मकान या किसी निर्माण के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं होती है जबकि नगर निगम मेें किसी भी निर्माण के लिए नक्शा बनवाकर उसे पास कराना होगा।

गांवों में कोई भी प्रॉपर्टी टैक्स नहीं होता लेकिन निगम में शामिल किए जाने पर मकान और दुकान पर टैक्स देना पडे़गा।

मुख्यमंत्री से मंत्री तक नहीं मिला आश्वासन
महापंचायत में पहुंचे लोगों ने कहा कि उन्होंने अपनी बात डीसी के माध्यम से कैबिनेट मंत्री कविता जैन, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तक पहुंचाई, लेकिन अभी तक उन्हें कोई आश्वासन नहीं मिला। इसीलिए समिति कमेटी के नेतृत्व में कानूनी लड़ाई भी नगर निगम बनाए जाने के विरोध में लड़ेगी।

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