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Sonipat News: 2000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क की तैयारी, दुकानदारों में नाराजगी
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-फोटो 87 : पवन वर्मा
- फोटो : samvad
बहादुरगढ़। 15 अक्तूबर से 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने की चर्चा के बीच बहादुरगढ़ के दुकानदारों में नाराजगी है। शहर के दुकानदारों का कहना है कि लंबे समय से ग्राहकों को डिजिटल भुगतान की आदत डलाने के बाद अब इस तरह का शुल्क लगाया गया तो इसका सीधा असर व्यापार और डिजिटल लेन-देन पर पड़ेगा। हालांकि 2000 रुपये तक के भुगतान पर इसका असर नहीं होगा।
बहादुरगढ़ के मुख्य बाजार, झज्जर रोड, रेलवे रोड और एमआईई क्षेत्र के दुकानदारों से बातचीत में सामने आया कि बड़ी राशि के भुगतान में यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ऐसे में शुल्क लागू होने पर व्यापारी या तो यह राशि खुद वहन करेंगे या फिर ग्राहकों पर इसका बोझ डालने की स्थिति बन सकती है।
रेलवे रोड के ज्वेलर्स पवन वर्मा ने कहा कि ग्राहक अब नकदी रखने के बजाय मोबाइल से भुगतान करना पसंद करते हैं। यदि बड़े भुगतान पर शुल्क कटने लगा तो दुकानदारों के लिए हर लेन-देन पर अतिरिक्त लागत जुड़ जाएगी। खासकर कम मार्जिन वाले कारोबार में इसका असर अधिक होगा।
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इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी गौरव गर्ग के अनुसार, कई ग्राहक मोबाइल, टीवी, फ्रिज और अन्य महंगे सामान की खरीदारी में यूपीआई से भुगतान करते हैं। ऐसे लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क भी व्यापारी के लिए मामूली नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की दिशा में शुल्क बढ़ाने के बजाय कारोबारियों को राहत देने पर विचार करना चाहिए।
किराना दुकानदार शंकर बंसल ने कहा कि उनका मुनाफा पहले ही सीमित है। यदि ग्राहक से हजारों रुपये का यूपीआई भुगतान लिया और उसमें से शुल्क कट गया तो महीने के अंत में यह राशि काफी बड़ी हो सकती है। वहीं ग्राहकों से अतिरिक्त रकम लेने पर उन्हें भी परेशानी होगी।
दुकानदारों की मांग- शुल्क वापस लिया जाए
दुकानदारों का कहना है कि यूपीआई भुगतान ने बाजार में लेन-देन को आसान और पारदर्शी बनाया है। नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में व्यापारियों ने भी सहयोग किया। ऐसे में अब बड़े यूपीआई लेन-देन पर टैक्स लगाने से डिजिटल अभियान को झटका लगने की आशंका है। व्यापारियों ने सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर 2000 से अधिक के भुगतान पर भी शुल्क नहीं लगाने की मांग की है।
-फोटो 87 : पवन वर्मा
-फोटो 88 : गौरव गर्ग
-फोटो 89 : शंकर बंसल
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बहादुरगढ़ के मुख्य बाजार, झज्जर रोड, रेलवे रोड और एमआईई क्षेत्र के दुकानदारों से बातचीत में सामने आया कि बड़ी राशि के भुगतान में यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ऐसे में शुल्क लागू होने पर व्यापारी या तो यह राशि खुद वहन करेंगे या फिर ग्राहकों पर इसका बोझ डालने की स्थिति बन सकती है।
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रेलवे रोड के ज्वेलर्स पवन वर्मा ने कहा कि ग्राहक अब नकदी रखने के बजाय मोबाइल से भुगतान करना पसंद करते हैं। यदि बड़े भुगतान पर शुल्क कटने लगा तो दुकानदारों के लिए हर लेन-देन पर अतिरिक्त लागत जुड़ जाएगी। खासकर कम मार्जिन वाले कारोबार में इसका असर अधिक होगा।
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इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी गौरव गर्ग के अनुसार, कई ग्राहक मोबाइल, टीवी, फ्रिज और अन्य महंगे सामान की खरीदारी में यूपीआई से भुगतान करते हैं। ऐसे लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क भी व्यापारी के लिए मामूली नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की दिशा में शुल्क बढ़ाने के बजाय कारोबारियों को राहत देने पर विचार करना चाहिए।
किराना दुकानदार शंकर बंसल ने कहा कि उनका मुनाफा पहले ही सीमित है। यदि ग्राहक से हजारों रुपये का यूपीआई भुगतान लिया और उसमें से शुल्क कट गया तो महीने के अंत में यह राशि काफी बड़ी हो सकती है। वहीं ग्राहकों से अतिरिक्त रकम लेने पर उन्हें भी परेशानी होगी।
दुकानदारों की मांग- शुल्क वापस लिया जाए
दुकानदारों का कहना है कि यूपीआई भुगतान ने बाजार में लेन-देन को आसान और पारदर्शी बनाया है। नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में व्यापारियों ने भी सहयोग किया। ऐसे में अब बड़े यूपीआई लेन-देन पर टैक्स लगाने से डिजिटल अभियान को झटका लगने की आशंका है। व्यापारियों ने सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर 2000 से अधिक के भुगतान पर भी शुल्क नहीं लगाने की मांग की है।
-फोटो 87 : पवन वर्मा
-फोटो 88 : गौरव गर्ग
-फोटो 89 : शंकर बंसल

-फोटो 87 : पवन वर्मा- फोटो : samvad

-फोटो 87 : पवन वर्मा- फोटो : samvad