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Sonipat News: सफाई ठेके का समय पूरा होने पर अधिकतर कर्मियाें की नौकरी गई
Tue, 02 Sep 2025 02:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 02 Sep 2025 02:10 AM IST
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फोटो 26: साेनीपत नगर निगम पार्क में धरना पर बैठे संविदा सफाई कर्मी। संवाद
सोनीपत। सफाई कर्मचारियों ने सोमवार को नगर निगम पार्क में धरना दिया। उन्होंने सफाई ठेका अवधि बढ़ाने और जॉब सुरक्षा गारंटी देने की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
ठेका सफाई कर्मचारी एकता मंच के अध्यक्ष मुकेश टांक ने बताया कि जॉब सुरक्षा नीति लागू होने के बाद कर्मचारियों ने उम्मीद जताई थी कि उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलेगा। नीति के तहत वही कर्मचारी पात्र माने गए हैं जो 15 अगस्त 2024 तक सेवा में हो और जिन्होंने कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी की हो। साथ ही प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 240 दिन कार्यरत रहकर वेतन प्राप्त किया हो। नगर निगम प्रशासनिक स्तर पर अब तक स्पष्ट नहीं कर पाया है कि क्या ठेकेदारों के माध्यम से लगे कर्मचारी योग्य माने जाएंगे।
नगरपालिका कर्मचारी संघ के इकाई प्रधान भारत कंडेरा ने बताया कि नगर निगम की ओर से लगाया गया शॉर्ट टर्म टेंडर मात्र 90 लाख रुपये में सीमित कर दिया गया है और केवल 300 कर्मचारियों से पूरे शहर की सफाई कराने की योजना बनाई गई है। जब 1200 कर्मचारी भी पूरे शहर को साफ नहीं कर पा रहे, तो 300 कर्मचारी कैसे करेंगे।
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संविदा कर्मचारियों को स्थायी लाभ तभी दिए गए हैं जब उन्हें नियमितीकरण या निगम की ओर से सीधे मान्यता प्राप्त हो। यही कारण है कि सफाईकर्मी और ठेकेदार आधारित कर्मचारी अब निगम से औपचारिक आदेश जारी करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने कहा है कि यदि जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की तो वह अधिकारों के लिए आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि शहर में सफाई व्यवस्था तक इन्हीं कर्मचारियों पर निर्भर है, इसलिए सरकार और निगम को उनकी सेवाओं को सुरक्षित बनाना चाहिए।
शहर में सफाई व्यवस्था रही प्रभावित
सफाई कर्मचारियों के धरने पर बैठने से शहर में सफाई व्यवस्था प्रभावित रही है। हालांकि धरने का पहला दिन होने की वजह से स्थिति ज्यादा खराब नहीं हुई है। यदि यह धरना जारी रहा तो सफाई का संकट बन सकता है।
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ठेका सफाई कर्मचारी एकता मंच के अध्यक्ष मुकेश टांक ने बताया कि जॉब सुरक्षा नीति लागू होने के बाद कर्मचारियों ने उम्मीद जताई थी कि उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलेगा। नीति के तहत वही कर्मचारी पात्र माने गए हैं जो 15 अगस्त 2024 तक सेवा में हो और जिन्होंने कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी की हो। साथ ही प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 240 दिन कार्यरत रहकर वेतन प्राप्त किया हो। नगर निगम प्रशासनिक स्तर पर अब तक स्पष्ट नहीं कर पाया है कि क्या ठेकेदारों के माध्यम से लगे कर्मचारी योग्य माने जाएंगे।
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नगरपालिका कर्मचारी संघ के इकाई प्रधान भारत कंडेरा ने बताया कि नगर निगम की ओर से लगाया गया शॉर्ट टर्म टेंडर मात्र 90 लाख रुपये में सीमित कर दिया गया है और केवल 300 कर्मचारियों से पूरे शहर की सफाई कराने की योजना बनाई गई है। जब 1200 कर्मचारी भी पूरे शहर को साफ नहीं कर पा रहे, तो 300 कर्मचारी कैसे करेंगे।
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संविदा कर्मचारियों को स्थायी लाभ तभी दिए गए हैं जब उन्हें नियमितीकरण या निगम की ओर से सीधे मान्यता प्राप्त हो। यही कारण है कि सफाईकर्मी और ठेकेदार आधारित कर्मचारी अब निगम से औपचारिक आदेश जारी करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने कहा है कि यदि जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की तो वह अधिकारों के लिए आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि शहर में सफाई व्यवस्था तक इन्हीं कर्मचारियों पर निर्भर है, इसलिए सरकार और निगम को उनकी सेवाओं को सुरक्षित बनाना चाहिए।
शहर में सफाई व्यवस्था रही प्रभावित
सफाई कर्मचारियों के धरने पर बैठने से शहर में सफाई व्यवस्था प्रभावित रही है। हालांकि धरने का पहला दिन होने की वजह से स्थिति ज्यादा खराब नहीं हुई है। यदि यह धरना जारी रहा तो सफाई का संकट बन सकता है।