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उम्मीद की मशाल: छह बेटियों को बेटे के समान दी शिक्षा, चार वैज्ञानिक बन बढ़ा रही देश का मान, दो बनीं प्रोफेसर

Mon, 04 Jul 2022 12:34 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 04 Jul 2022 12:34 AM IST
सार

गांव भदाना के मास्टर जगदेव सिंह की छह बेटियों में चार वैज्ञानिक तो दो प्रोफेसर बनीं हैं। मास्टर जगदेव ने बेटियों को उच्च शिक्षा देने के साथ ही किसानों को मशरूम उत्पादन से जोड़कर आत्मनिर्भर किया है। मास्टर जगदेव सोनीपत में मशरूम उत्पादन के जनक माने जाते हैं।

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Master Jagdev of Sonipat made his six daughters successful by getting them higher education
मास्टर जगदेव सिंह दहिया की बेटियां। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

वर्तमान समय में बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। हर क्षेत्र में बेटियां देश का नाम रोशन कर रही हैं। इसके बावजूद भी परिवारों में बेटों की चाह बेटियों पर भारी पड़ती है। इन सबके बीच हरियाणा के सोनीपत के गांव भदाना निवासी एक अध्यापक ने न सिर्फ बेटा-बेटी के फर्क को दूर किया, बल्कि समाज के सामने ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसका आज सभी लोहा मान रहे हैं।

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अध्यापक ने अपनी छह बेटियों को बेटों के समान लाड-प्यार करते हुए उन्हें उच्च शिक्षा दिलाई। सभी बेटियां आज पिता का नाम रोशन करने के साथ ही बेटों से भी कहीं आगे निकल गई हैं। अध्यापक की छह बेटियों में से चार वैज्ञानिक बन विदेश में रहकर देश का मान बढ़ा रही हैं। 
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सोनीपत के गांव भदाना निवासी मुख्याध्यापक पद से सेवानिवृत्त जगदेव सिंह दहिया ने बताया कि उनकी छह बेटियां व एक बेटा हैं। उस समय लोग बेटियों को बोझ समझकर पढ़ाते नहीं थे और उन पर चूल्हा-चौके का बोझ लाद देते थे। उन्होंने बेटियों को कभी बोझ नहीं समझा, उन्हें हमेशा पढ़ने के लिए प्रेरित किया। आज मेरी बेटियां समाज के लिए प्रेरणा हैं।
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चार विदेश में रहकर अपने परिवार व देश का नाम रोशन कर रही हैं। जगदेश सिंह ने बताया कि बेटियों ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के राजकीय स्कूल से प्राप्त की। उसके बाद सभी बेटियों ने सोनीपत के टीकाराम कन्या महाविद्यालय से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद हिंदू महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री ली।

चार बेटियों ने चंडीगढ़, पंजाब से एमएससी की। दो बेटियों ने आईआईटी मुंबई से पोस्ट ग्रेजुएट की। सभी बेटियां नेट जेआरएफ क्वालिफाई हैं। जगदेव दहिया ने बताया कि उनका बेटा योगेश दहिया एमबीए करने के बाद अपना कारोबार कर रहा है।

Master Jagdev of Sonipat made his six daughters successful by getting them higher education
मुख्याध्यापक पद से सेवानिवृत्त जगदेव सिंह दहिया अपनी पत्नी ओमपति दहिया के साथ। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

चार विदेश तो दो देश में रहकर बढ़ा रही मान
जगदेव सिंह दहिया बताते हैं कि बड़ी बेटी डॉ. संगीता शहर के जीवीएम कन्या महाविद्यालय में भौतिक विज्ञान की प्रोफेसर हैं। जबकि चौथे नंबर की बेटी डॉ. कल्पना दहिया पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में गणित की प्रोफेसर हैं। दूसरे नंबर की बेटी मोनिका ने बायोटेक से पीएचडी की है। वह कनाडा के टोरेंटो में वैज्ञानिक है। तीसरे नंबर की बेटी डॉ. नीतू ने भी बायोटेक में पीएचडी की है।

वह वाशिंगटन डीसी में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन) में वैज्ञानिक हैं। पांचवें नंबर की बेटी डॉ. डेजी दहिया ने गणित विषय में पीएचडी की है। वह वाशिंगटन डीसी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन (एनआईएच) में वैज्ञानिक हैं। जबकि सबसे छोटी बेटी रुचि दहिया यूएसए के यूनियन ऑफ एरिजोन में गणित विषय में शोध कर रही हैं। जगदेव बताते हैं कि उन्होंने अपनी बेटियों का बेटे की तरह पालन-पोषण किया है। उन्हें बेटियों पर नाज है।

किसानों को मशरूम से जोड़कर किया आत्मनिर्भर
सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक जगदेव सिंह दहिया को सोनीपत में मशरूम उत्पादन का जनक कहा जाता है। मास्टर जगदेव बताते हैं कि 1979 में उन्होंने मशरूम की खेती के बारे में पढ़ा। उसके बारे में जानकारी जुटाई। साथ ही हिमाचल प्रदेश में कृषि संस्थान में जाकर इस बारे में प्रशिक्षण भी लिया। उसके बाद 1980 में पहली बार सोनीपत में मशरूम की खेती शुरू की।

इससे अच्छी आमदनी होने लगी। वर्ष 2003 तक मशरूम की खेती की और अन्य किसानों को भी मशरूम की खेती करने के लिए जागरूक किया। वर्ष 2003 में पंचकूला तबादला हो गया। 31 दिसंबर 2006 को पंचकूला से बतौर मुख्याध्यापक सेवानिवृत्त हुए। वापस आने के बाद फिर मशरूम की खेती की और किसानों को भी जागरूक किया।

वे वर्ष 1992 से 1998 तक मशरूम सोसायटी ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने 1989 में सरकार से मुरथल में मशरूम रिसर्च सेंटर बनाने की मांग की थी। वे बताते हैं कि मशरूम उत्पादन से जुड़कर कई किसानों ने अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। 

बेटियों को आगे बढ़ने के लिए बेटे के समान दिए अवसर
मास्टर जगदेव सिंह बताते हैं कि हमने बेटियों को बेटा समझकर पढ़ाया और पालन-पोषण किया। बेटियों को बेटों के समान ही अवसर दिए। बेटियों ने भी खुद को साबित किया। आज उनकी प्रतिभा निखरकर सामने आई है। आज छह बेटियां देश-विदेश में नाम चमका रही हैं। मेरी बेटियां साक्षात देवी हैं, वह बेटों से बढ़कर हैं। जगदेव दहिया और उनकी पत्नी ओमवती दहिया बेटियों की प्रतिभा से गौरवान्वित हैं।

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