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49 जगह अवशेष जलाने की आई लोकेशन, 17 स्थानों पर जले मिले
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों को उपमंडल क्षेत्र में इस सीजन के दौरान 49 जगह खेतों में अवशेष जलाने की हरसेक से लोकेशन मिली। अधिकारियों ने जांच की तो इनमें से 17 जगह अवशेष जले मिले हैं। इन जगहों पर अधिकारियों ने संबंधित किसानों पर प्रति एकड़ 2500 रुपये जुर्माना लगाया है। ऐसे में अब अधिकारी किसानों को अवशेष जलाने से रोकने के लिए विद्यार्थियों के माध्यम से जागरूक करेंगे।
कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेहरा ने बताया कि इस सीजन में हरसेक की सूचना के आधार पर 49 में से 17 जगह खेतों में अवशेष जले मिले। जिन किसानों के खेतों में अवशेष जल रहे थे, उन पर जुर्माना कर दिया गया है। इसके अलावा अन्य जगह कृषि भूमि से अलग मिली। उन्होंने कहा कि अब विभाग की ओर से खेतों में अवशेष जलाने से रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए उपमंडल व खंड स्तर पर जागरूकता रैली निकाली जाएगी। इसमें प्रगतिशील किसानों के साथ ही स्कूलों के विद्यार्थियों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा विभाग की टीमें भी लगातार खेतों में जाकर निरीक्षण कर रही हैं। वहीं सभी गठित टीमों को आदेश दिए गए हैं कि आगामी फसल की बिजाई तक किसानों के बीच रहें, ताकि खेतों में फसलों के अवशेष न जल सके। उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वह फसलों के अवशेष न जलाएं, बल्कि उनका प्रबंधन करें। इसके लिए किसान विभाग से डी-कंपोजर कैप्सूल लें और उसका घोल बनाकर खेतों में छिड़काव करें। इस विधि से अवशेष खाद बन जाएंगे और उससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी अच्छी होगी। यही नहीं ऐसा करने से पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं फैलेगा।
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कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेहरा ने बताया कि इस सीजन में हरसेक की सूचना के आधार पर 49 में से 17 जगह खेतों में अवशेष जले मिले। जिन किसानों के खेतों में अवशेष जल रहे थे, उन पर जुर्माना कर दिया गया है। इसके अलावा अन्य जगह कृषि भूमि से अलग मिली। उन्होंने कहा कि अब विभाग की ओर से खेतों में अवशेष जलाने से रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए उपमंडल व खंड स्तर पर जागरूकता रैली निकाली जाएगी। इसमें प्रगतिशील किसानों के साथ ही स्कूलों के विद्यार्थियों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा विभाग की टीमें भी लगातार खेतों में जाकर निरीक्षण कर रही हैं। वहीं सभी गठित टीमों को आदेश दिए गए हैं कि आगामी फसल की बिजाई तक किसानों के बीच रहें, ताकि खेतों में फसलों के अवशेष न जल सके। उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वह फसलों के अवशेष न जलाएं, बल्कि उनका प्रबंधन करें। इसके लिए किसान विभाग से डी-कंपोजर कैप्सूल लें और उसका घोल बनाकर खेतों में छिड़काव करें। इस विधि से अवशेष खाद बन जाएंगे और उससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी अच्छी होगी। यही नहीं ऐसा करने से पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं फैलेगा।
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