सोनीपत। मुरथल रोड स्थित प्रधान कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास वैष्णव कुलभूषण संजय कृष्ण महाराज ने द्रौपदी की क्षमा, ठाकुरजी की कृपा व कुंती के भक्तिभाव का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार अश्वत्थामा ने प्रतिशोध की भावना से द्रौपदी के पांच पुत्रों का वध कर दिया।
संजय कृष्ण महाराज ने बताया कि जब अर्जुन को इस घटना का पता चला तो उन्होंने अश्वत्थामा को मारने की प्रतिज्ञा ली। इसी कठिन परिस्थिति में द्रौपदी ने अपने धैर्य व क्षमा भाव का परिचय देते हुए तर्क दिया कि वह गुरु पुत्र हैं, जिनसे हमने शिक्षा पाई है। इन्हें मारने से हमारे पुत्र वापस नहीं आ सकते। द्रौपदी की इस महानता से ठाकुरजी प्रसन्न हुए। उन्होंने द्रौपदी से अपना नाम जोड़ते हुए कृष्णम नाम दिया। संजय कृष्ण महाराज ने कहा कि जब जीवन में भयावह स्थितियां आए तो शांत रहकर धैर्य रखना चाहिए। भगवान हमेशा अपने भक्तों की प्रत्येक गतिविधि पर दृष्टि रखते हैं, उन्हें सही राह दिखाते हैं। कथा में शीला आंतिल, राजू सैनी, विनोद कौशिक, अनूप सिंह, साधुराम, भोला राठी, नीतीश, संजय मलिक व मनीष सैनी मौजूद रहे।