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Sonipat News: कैकेयी ने राजा दशरथ से मांगे दो वचन, भरत को राजगद्दी और राम को वनवास

Fri, 20 Oct 2023 01:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Fri, 20 Oct 2023 01:44 AM IST
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Kaikeyi asked for two promises from King Dasharatha, throne for Bharat and exile for Ram.
सेक्टर-12 स्थित श्याम पार्क में शिव ड्रामेटिक क्लब, राई की तरफ से आयोजित रामलीला में मंचन करते
संवाद न्यूज एजेंसी
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सोनीपत। कामी रोड स्थित रामलीला मैदान में श्री रामलीला सभा के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन के पांचवें दिन दशरथ-कैकेयी संवाद, श्री राम वन गमन, केवट प्रसंग की लीलाओं का भव्य मंचन किया गया। आचार्य सौरभ द्विवेदी के निर्देशन में वृंदावन से आए कलाकारों ने सभी पात्रों का किरदार बखूबी निभाया।
श्री राम ज्योतिष पीठ के प्रधान एवं पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन कर मंचन प्रारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा के जिला महामंत्री योगेश पाल अरोड़ा ने की। मुख्यातिथि के रूप में भाजपा जिला कार्यकारिणी सदस्य पंडित अमित शोनक, मुकेश माथुर व सामाजिक कार्यकर्ता पोखरमल नेहरू ने शिरकत की।
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मंचन में महाराज दशरथ अपनी बढ़ती अवस्था को देखते हुए मंत्री परिषद से विचार-विमर्श कर श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा करते हैं, जिसे सुनकर अयोध्यावासियों में खुशी की लहर दौड़ जाती है। सभी श्रीराम के राजतिलक की तैयारियों में लग जाते हैं। श्रीराम के राजतिलक का समाचार सुनते ही दासी मंथरा महारानी कैकेयी को भड़काती है और भरत को राजगद्दी पर बैठाने के लिए उकसाती है। महारानी कैकेयी उसकी बातों में आकर कोप भवन में चली जाती है, जहां वह महाराज दशरथ से दिए हुए दो वचन मांगती है, पहला भरत को राजगद्दी और दूसरे वचन में श्री राम को 14 वर्षों का वनवास, जिसे महाराज दशरथ अस्वीकार कर देते हैं।
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जब श्री राम को पता चलता है तो अपने पिता के वचनों की लाज रखने के लिए खुशी-खुशी 14 वर्षों के लिए वन में जाने के लिए सहर्ष तैयार हो जाते हैं। यह समाचार सुनकर लक्ष्मण और माता सीता भी श्री राम के साथ वन में जाने की जिद करते हैं। जब श्री राम मां जानकी तथा लक्ष्मण के साथ महाराज दशरथ से वन जाने की आज्ञा लेकर वन में चले जाते हैं तब उनके साथ काफी संख्या में अयोध्यावासी भी वन में चले जाते हैं। रात्रि में अयोध्यावासियों को सोता छोड़ कर श्री राम मां जानकी और लक्ष्मण के साथ आगे बढ़ गए। गंगा पार करवाने के लिए केवट पांव धोकर भगवान राम को नाव में बैठकर गंगा पार करवाई। वृंदावन से आए कलाकारों ने बहुत ही मार्मिक मंचन प्रस्तुत किया।
मंच संचालक एवं प्रेस प्रवक्ता गजेंद्र मंगला ने बताया कि मंचन का प्रतिदिन यू ट्यूब पर सीधा प्रसारण दिखाया जा रहा है। प्रधान महेन्द्र मंगला ने दर्शकों का अभिनंदन किया। इस दौरान कोषाध्यक्ष अमित कुच्छल, राजकुमार गोयल, महेंद्र वर्मा, अरुण जैन, प्रवीण गोयल, अनिल जैन, बीएम कुच्छल, रणवीर सिंह खत्री, विजय गौतम, वीरेंद्र कटारिया, राहुल अग्रवाल, नितिन कुच्छल, दीपक कुच्छल, तरुण शर्मा, डॉ. दिनेश वशिष्ठ, जितेन्द्र कटारिया मौजूद रहे।
वनवास व भरत मिलाप का हुआ मंचन
सेक्टर-12 स्थित श्याम पार्क में वीरवार को शिव ड्रामेटिक क्लब, राई की तरफ से आयोजित हो रही रामलीला में वनवास व भरत मिलाप का मंचन किया गया। इससे पहले भगवान शिव शंकर, माता दुर्गा, श्रीराम, सीता और हनुमान की आराधना की गई। कथा वाचक ने कहा कि रामलीला में परशुराम व लक्ष्मण के बीच हुए संवाद का मंचन हुआ।
उसके बाद भगवान राम का विवाह हुआ। वह अयोध्या पहुंचे तो वहां खुशियां मनाई गई। इसके बाद कैकेयी-दशरथ संवाद का मंचन हुआ। मंचन में पहुंचे भाजपा नेता तरुण देवीदास का स्मृति चिह्न दिया गया। इस मौके पर विक्की कौशिक, सामाजिक कार्यकर्ता मनीष राई, अधिवक्ता मोहन कौशिक, लीलू कौशिक, रामलाल, अधिवक्ता अमित कौशिक, मनीष त्यागी, राजू कौशिक, मंजीत तिहाड़, भूषण, रमेश जांगड़ा, प्रमोद कौशिक आदि मौजूद रहे।
भरत मिलाप देखकर श्रद्धालुओं की आंखों में आए आंसू
गोहाना। श्री रामलीला कमेटी की तरफ से मुगलपुरा रोड पर स्थित टीटू धर्मशाला में आयोजित रामलीला में कलाकारों ने दशरथ मरण, भरत कैकेयी संवाद एवं भरत मिलाप की लीलाओं का मंचन किया। जिसका श्रद्धालुओं ने लुत्फ उठाया और कई दृश्य पर तो श्रद्धालु भावुक हो गए। राम की चरण पादुका अपने शीश पर रखकर विराट प्रेम की मिसाल भरत ने प्रस्तुत की।

इस प्रसंग का मंचन देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। चरण पादुका लेकर भरत वापस अयोध्या गए और उन्हें सिंहासन पर आसीन कर धरती पर अपना बिछौना बिछाकर राम के सेवक के रूप में अयोध्या का राज चलाने लगे। कलाकारों के अभिनय ने सभी को प्रभावित किया।
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