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इतिहास का सबसे क्रूर नरसंहार था जलियांवाला बाग हत्याकांड : सुभाष
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जलियांवाला बाग की बरसी पर गोहाना में श्रद्धांजलि कार्यक्रम। स्रोत : संस्था
गोहाना। पुराना बस स्टैंड स्थित शहीद स्मारक पर आजाद हिंद देशभक्त मोर्चा के सदस्यों ने जलियांवाला बाग हत्याकांड की 107वीं बरसी पर श्रद्धांजलि समारोह किया। इस दौरान वक्ताओं ने शहीदों को याद करते हुए इस घटना को देश के इतिहास का सबसे दर्दनाक और क्रूर नरसंहार बताया।
मोर्चा की शहरी इकाई के अध्यक्ष सुभाष वर्मा ने कहा कि 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में बैसाखी के दिन हजारों लोग शांतिपूर्वक इकट्ठा हुए थे। वे अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और रोलेट एक्ट के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उस समय वहां मौजूद सभी लोग निहत्थे थे।
समारोह की अध्यक्षता मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की। उन्होंने कहा कि ब्रिगेडियर जनरल डायर ने बाग के एकमात्र रास्ते को बंद करवा दिया और सैनिकों को अंधाधुंध गोली चलाने का आदेश दे दिया।
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करीब 10 मिनट तक चली गोलीबारी में सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों घायल हुए। जान बचाने के लिए कई लोग बाग के कुएं में कूद गए थे, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।
इस मौके पर रामनिवास पांचाल, अनिल वाल्मीकि, मुख्तार सिंह दांगी, विनोद रंगा, सुरेश पांचाल, श्रीभगवान कलसन, अंकित और अंकुश समेत कई लोग मौजूद
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मोर्चा की शहरी इकाई के अध्यक्ष सुभाष वर्मा ने कहा कि 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में बैसाखी के दिन हजारों लोग शांतिपूर्वक इकट्ठा हुए थे। वे अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और रोलेट एक्ट के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उस समय वहां मौजूद सभी लोग निहत्थे थे।
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समारोह की अध्यक्षता मुख्य संरक्षक आजाद सिंह दांगी ने की। उन्होंने कहा कि ब्रिगेडियर जनरल डायर ने बाग के एकमात्र रास्ते को बंद करवा दिया और सैनिकों को अंधाधुंध गोली चलाने का आदेश दे दिया।
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करीब 10 मिनट तक चली गोलीबारी में सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों घायल हुए। जान बचाने के लिए कई लोग बाग के कुएं में कूद गए थे, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।
इस मौके पर रामनिवास पांचाल, अनिल वाल्मीकि, मुख्तार सिंह दांगी, विनोद रंगा, सुरेश पांचाल, श्रीभगवान कलसन, अंकित और अंकुश समेत कई लोग मौजूद