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आंदोलन को लंबा चलाने के लिए हर गांव से सप्ताह में 20 किसान जाएंगे तो उनकी जगह 20 आएंगे
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कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों ने आंदोलन को लंबा चलाने के लिए नई रणनीति बनाई है। जिससे दिल्ली की सीमाओं पर भीड़ भी कम नहीं हो और किसान हर सप्ताह अपने घर भी जा सकें। हर गांव से एक सप्ताह में 20 किसान बॉर्डर पर पहुंचेंगे और उस गांव के पहले से मौजूद 20 किसान वापस घर चले जाएंगे। उसके बाद इस तरह ही नए 20 किसान बॉर्डर पर आएंगे और पहले वाले वापस घर चले जाएंगे। यह सिलसिला लगातार चलता रहेगा।
जिस तरह से सरकार व किसानों के बीच गतिरोध कम होने की जगह बढ़ता जा रहा है, उससे लग रहा है कि यह आंदोलन लंबा चलने वाला है। उसके लिए ही हरियाणा व पंजाब के किसानों ने मिलकर आंदोलन लंबा चलाने में परेशानी नहीं हो, उसके लिए रणनीति बनाई है। उस रणनीति के तहत हर गांव के 20-20 किसानों को धरनास्थल पर बुलाया जाएगा और इस तरह बॉर्डर पर भारी भीड़ जमा हो जाएगी। वह 20 लोग ज्यादा दिन तक बॉर्डर पर नहीं रुकेंगे, बल्कि उनको केवल एक सप्ताह वहां रहना होगा। उसके बाद वह वापस अपने घर चले जाएंगे और उसी समय उस गांव के अन्य 20 किसान धरनास्थल पर पहुंच जाएंगे। किसान नेताओं ने यह अभियान शुरू कर दिया है। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने इस नई रणनीति के बारे में बताया है और इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
किसान नेताओं ने मांगा दलित समाज के लोगों से सहयोग
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि लगातार काफी वर्ग किसानों के साथ खड़े हो रहे हैं, लेकिन यह समझना चाहिए कि सरकार के तीन कृषि कानूनों का सबसे ज्यादा असर आम आदमी पर पड़ेगा। दलित व गरीब लोग इसका ज्यादा शिकार होंगे, क्योंकि खेती से जुड़ा हर उत्पाद ज्यादा दाम देकर खरीदना होगा। इसलिए अब दलित समाज को उनके साथ खड़ा होना चाहिए और देशभर के संगठनों को किसानों के साथ आना चाहिए।
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जिस तरह से सरकार व किसानों के बीच गतिरोध कम होने की जगह बढ़ता जा रहा है, उससे लग रहा है कि यह आंदोलन लंबा चलने वाला है। उसके लिए ही हरियाणा व पंजाब के किसानों ने मिलकर आंदोलन लंबा चलाने में परेशानी नहीं हो, उसके लिए रणनीति बनाई है। उस रणनीति के तहत हर गांव के 20-20 किसानों को धरनास्थल पर बुलाया जाएगा और इस तरह बॉर्डर पर भारी भीड़ जमा हो जाएगी। वह 20 लोग ज्यादा दिन तक बॉर्डर पर नहीं रुकेंगे, बल्कि उनको केवल एक सप्ताह वहां रहना होगा। उसके बाद वह वापस अपने घर चले जाएंगे और उसी समय उस गांव के अन्य 20 किसान धरनास्थल पर पहुंच जाएंगे। किसान नेताओं ने यह अभियान शुरू कर दिया है। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने इस नई रणनीति के बारे में बताया है और इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
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किसान नेताओं ने मांगा दलित समाज के लोगों से सहयोग
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि लगातार काफी वर्ग किसानों के साथ खड़े हो रहे हैं, लेकिन यह समझना चाहिए कि सरकार के तीन कृषि कानूनों का सबसे ज्यादा असर आम आदमी पर पड़ेगा। दलित व गरीब लोग इसका ज्यादा शिकार होंगे, क्योंकि खेती से जुड़ा हर उत्पाद ज्यादा दाम देकर खरीदना होगा। इसलिए अब दलित समाज को उनके साथ खड़ा होना चाहिए और देशभर के संगठनों को किसानों के साथ आना चाहिए।
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