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हरियाणा-पंजाब के किसानों ने साफ कहा-मांगें पूरी होने से पहले नहीं जाएंगे वापस

Thu, 02 Dec 2021 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 02 Dec 2021 12:27 AM IST
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Haryana-Punjab farmers clearly said - will not go back before the demands are met
सोनीपत। कुंडली बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन में शामिल संगठनों की बैठक का दौर बुधवार को भी जारी रहा। बुधवार को हरियाणा किसान मोर्चा के बैनर तले 26 संगठनों ने बैठक की तो वहीं पंजाब की 32 जत्थेबंदियों ने भी अपनी बैठक की। दोनों ने एलान किया कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की जाती, तब तक आंदोलन वापसी पर उनकी मुहर नहीं लगेगी। सरकार के रवैये को देखते हुए 4 दिसंबर को होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में अहम फैसला लिया जा सकता है।
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किसान संगठनों ने बैठक करने के बाद अलग-अलग पत्रकार वार्ता कर एकमत होने का दावा किया। पंजाब की 32 जत्थेबंदियों ने घोषणा की है कि सभी मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा, लेकिन वह इसका तरीका बदलने पर विचार कर सकते हैं। साथ ही किसानों की मौत के आंकड़ों पर सरकार के जवाब को शर्मनाक बताते हुए कहा है कि शहीद किसानों का आंकड़ा सरकार किसानों से ले सकती है। पंजाब के जत्थेदारों ने साफ कहा है कि पंजाबियों को बदनाम करने की साजिश हो रही है, लेकिन वह आंदोलन छोड़कर जाने वाले नहीं हैं। बल्कि हरियाणा व अन्य राज्यों के किसानों के साथ यहां आखिरी समय तक डटे रहेंगे।
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उन्होंने कहा कि सरकार एमएसपी कमेटी बनाने की बात कह रही है। मुकदमे वापसी और शहीद किसानों को मुआवजा की जिम्मेदारी प्रदेश सरकारों को सौंपना चाहती है, लेकिन जब तक सरकार उनकी मांग लिखित में नहीं मानेगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई जा रही है कि पंजाब के किसान जा रहे हैं, लेकिन हम स्पष्ट बता रहे है कि देश का किसान पूरी तरह एकजुट है। वह संयुक्त किसान मोर्चा के साथ मजबूती से खड़ा है। सरकार उनकी सभी मांग मान लें। लखीमपुर खीरी घटना में आरोपी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री को बर्खास्त किया जाए। साथ ही कहा कि आंदोलन का खर्चा भी मीडिया के सामने रखा जाएगा। जत्थेबंदियों ने कहा कि मोर्चा के पास जो भी पैसा बकाया है वह उन परिवारों का है, जिनके सदस्य किसान आंदोलन में शहीद हो गए हैं, लेकिन पैसा उन्हें किस हिसाब से देना है, यह फैसला संयुक्त किसान मोर्चा करेगा। 3 दिसंबर को एक बार से 32 जत्थेबंदी अपनी बैठक करेंगी।
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वहीं वरिष्ठ नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने सोशल मीडिया पर आकर भी कहा कि पंजाब के किसान यहां से नहीं जा रहे, बल्कि राशन लेकर पहुंच रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि 26 नवंबर को किसानों के परिवार यहां खुशी बांटने आए थे, परिवार के सदस्य वापस गए हैं। किसान यहीं पर डटे हुए है। वहीं हरियाणा किसान मोर्चा ने कहा कि कोई दो मत नहीं है। सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं। मीडिया में जानबूझकर अफवाह फैलाई जा रही है। किसानों ने सरकार को 6 मुद्दे लिखकर दिए थे, जिनपर सभी किसान संगठन आज भी कायम हैं।
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