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Sonipat News: अखाड़े की मिट्टी से विश्व मंच तक पहुंची लाठ की काजल

Tue, 15 Sep 2026 02:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2026 02:03 AM IST
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From the soil of the arena, the stick's kajal reached the world stage.
फोटो : पहलवान काजल प्र​​शिक्षक अजय मलिक, चाचा कृष्ण पहलवान व मां बबीता के साथ। स्रोत प्र​शिक्षक - फोटो : Archive
सोनीपत। लाठ गांव की बेटी और अंतरराष्ट्रीय पहलवान काजल ने सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के ट्रायल में शानदार प्रदर्शन करते हुए 76 किलोग्राम भारवर्ग में भारतीय टीम में जगह बनाई। भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की ओर से नई दिल्ली के आईजी स्टेडियम में आयोजित ट्रायल में उन्होंने हरियाणा की पहलवान किरण हुड्डा और शिक्षा को हराया।
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काजल अब कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में 24 अक्तूबर से 1 नवंबर तक होने वाली प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। चयन की सूचना मिलते ही बड़वासनी स्थित कुलदीप मलिक अकादमी में खुशी का माहौल है। भारतीय महिला कुश्ती टीम के पूर्व मुख्य प्रशिक्षक कुलदीप मलिक के मार्गदर्शन में अभ्यास करने वाली पहलवान को प्रशिक्षकों और साथी खिलाड़ियों ने बधाई दी।
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मुख्य प्रशिक्षक कुलदीप मलिक और प्रशिक्षक अजय मलिक ने कहा कि उनका अनुशासन, मेहनत और लगातार बेहतर प्रदर्शन उन्हें विश्व कुश्ती के शीर्ष खिलाड़ियों की कतार में पहुंचा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह आगे भी देश के लिए बड़े पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाएंगी।
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विश्व चैंपियनशिप में जीता था स्वर्ण पदक
हाल ही में उन्होंने स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। इससे पहले अगस्त के पहले सप्ताह में हंगरी के बुडापेस्ट में हुई चौथी सीनियर रैंकिंग सीरीज के 76 किलो भारवर्ग में भी स्वर्ण अपने नाम किया। मई के अंतिम सप्ताह में एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने के साथ ही वह मुंबई में हुए प्रतिष्ठित भारत केसरी दंगल की विजेता भी रही थीं। वह अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।

टैक्सी चलाते हैं काजल के पिता
काजल की सफलता के पीछे कड़ा संघर्ष और परिवार का अटूट सहयोग रहा है। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली पहलवान के पिता टैक्सी चलाते हैं। उनके चाचा और गुरु कृष्ण पहलवान ने बचपन से ही उन्हें अखाड़े की बारीकियां सिखाईं और कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत के लिए प्रेरित किया। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनके सपनों को पूरा करने में साथ दिया। अब वह वर्ष 2028 के ओलंपिक को अगला बड़ा लक्ष्य मानकर तैयारी कर रही हैं।
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