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वाहन पंजीकरण में फर्जीवाड़ा, एसडीएम कार्यालय के दो क्लर्क नामजद
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सोनीपत। जिले में एसडीएम कार्यालयों में पंजीकृत कुछ वाहनों की आरसी संदेह के घेरे में आ गई है। वाहनों के पंजीकरण के दौरान गड़बड़ी किए जाने का आरोप है। कंप्यूटर में चेसिस नंबर की एंट्री करते हुए उसमें स्टार लगा दिया गया। पंजीकरण के बाद फाइलों में वाहन खरीद के एजेंसी व कंपनी के कागजात तथा बीमा जैसे जरूरी कागजात नहीं लगाए गए। ऐसा फर्जीवाड़ा करीब पांच महीने पहले यमुनानगर के जगाधरी व बिलासपुर में सामने आया था।
ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को यमुनानगर के जगाधरी व बिलासपुर में वाहन पंजीकरण में फर्जीवाड़ा होने की जानकारी मिली थी। जांच के बाद यमुनानगर के जगाधरी में 21 जनवरी और बिलासपुर में पहली फरवरी को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उस मामले की जांच में सोनीपत में भी फर्जीवाड़ा होने की जानकारी मिली थी। वाहन पोर्टल पर गड़बड़ी कर गलत चेसिस नंबर डालकर वाहनों का पंजीकरण कर दिया। इसके लिए अंकों के साथ स्टार लगा दिया गया। इन वाहनों के पंजीकरण के लिए कई जरूरी कागजात भी नहीं लगाए गए। इसमें चोरी के वाहनों और ऋण की किस्त जमा नहीं करने वाले वाहनों का दोबारा पंजीकरण करने का आरोप है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के आदेश पर एसपी ने एएसपी से जांच कराई। एएसपी के निर्देश पर दो तत्कालीन लिपिक अनिल और कृष्ण के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
23 वाहनों के पंजीकरण में मिली गड़बड़ी
एएसपी की आरंभिक जांच में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के विभिन्न जिलों के 23 वाहनों के पंजीकरण में गड़बड़ी मिली है। यह गड़बड़ी वर्ष 2018 में की गई। चार वाहनों का पंजीकरण बिना बीमा के कराया गया है। एएसपी के पत्राचार के बावजूद संबंधित कार्यालयों से जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। एसपी और एएसपी ने अब जांच का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस मामले की जानकारी डीजीपी हरियाणा, एडीजीपी सीआईडी और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को दे दी गई है। कई वाहन वर्ष 2012 में कंपनी द्वारा डीलर को दिए गए थे। इन वाहनों को संबंधित डीलर द्वारा उसी समय बिक्री कर दिया गया था। उसके छह साल बाद एसडीएम कार्यालयों में उन्हें नया दिखाकर उनका पंजीकरण किया गया है। इनमें वर्ष 2012 से 2017 तक के वाहन हैं। इस मामले की जांच उच्च अधिकारियों तक पहुंचेगी।
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वर्जन
वाहन पंजीकरण में गड़बड़ी हुई है। शुरुआती जांच के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की पूरी तरह जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-जश्नदीप सिंह रंधावा, पुलिस अधीक्षक सोनीपत।
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ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को यमुनानगर के जगाधरी व बिलासपुर में वाहन पंजीकरण में फर्जीवाड़ा होने की जानकारी मिली थी। जांच के बाद यमुनानगर के जगाधरी में 21 जनवरी और बिलासपुर में पहली फरवरी को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उस मामले की जांच में सोनीपत में भी फर्जीवाड़ा होने की जानकारी मिली थी। वाहन पोर्टल पर गड़बड़ी कर गलत चेसिस नंबर डालकर वाहनों का पंजीकरण कर दिया। इसके लिए अंकों के साथ स्टार लगा दिया गया। इन वाहनों के पंजीकरण के लिए कई जरूरी कागजात भी नहीं लगाए गए। इसमें चोरी के वाहनों और ऋण की किस्त जमा नहीं करने वाले वाहनों का दोबारा पंजीकरण करने का आरोप है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के आदेश पर एसपी ने एएसपी से जांच कराई। एएसपी के निर्देश पर दो तत्कालीन लिपिक अनिल और कृष्ण के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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23 वाहनों के पंजीकरण में मिली गड़बड़ी
एएसपी की आरंभिक जांच में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के विभिन्न जिलों के 23 वाहनों के पंजीकरण में गड़बड़ी मिली है। यह गड़बड़ी वर्ष 2018 में की गई। चार वाहनों का पंजीकरण बिना बीमा के कराया गया है। एएसपी के पत्राचार के बावजूद संबंधित कार्यालयों से जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। एसपी और एएसपी ने अब जांच का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस मामले की जानकारी डीजीपी हरियाणा, एडीजीपी सीआईडी और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को दे दी गई है। कई वाहन वर्ष 2012 में कंपनी द्वारा डीलर को दिए गए थे। इन वाहनों को संबंधित डीलर द्वारा उसी समय बिक्री कर दिया गया था। उसके छह साल बाद एसडीएम कार्यालयों में उन्हें नया दिखाकर उनका पंजीकरण किया गया है। इनमें वर्ष 2012 से 2017 तक के वाहन हैं। इस मामले की जांच उच्च अधिकारियों तक पहुंचेगी।
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वर्जन
वाहन पंजीकरण में गड़बड़ी हुई है। शुरुआती जांच के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की पूरी तरह जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-जश्नदीप सिंह रंधावा, पुलिस अधीक्षक सोनीपत।