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Sonipat News: नई शिक्षा नीति लागू करने को बीपीएस महिला विश्वविद्यालय में पांच दिन का एफडीपी शुरू
Mon, 13 Apr 2026 11:27 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 13 Apr 2026 11:27 PM IST
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गोहाना। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति 2020 को सही तरीके से लागू करने के लिए पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) शुरू हुआ। यह कार्यक्रम 17 अप्रैल तक चलेगा।
यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के स्वावलंबन केंद्र और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज-बीपीएसएमवी अकादमिक व प्रशासनिक विकास केंद्र के सहयोग से करवाई जा रही है। इसका मकसद शिक्षकों को नई शिक्षा नीति की खास बातें और उसे कक्षा में कैसे लागू करें, इसकी जानकारी देना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सुदेश ने की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति से शिक्षा व्यवस्था और बेहतर, लचीली और कौशल आधारित बनेगी। अब शिक्षक सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि बच्चों के मार्गदर्शक बनेंगे। उन्होंने कहा कि कक्षा में बातचीत, प्रयोग और छात्र केंद्रित पढ़ाई जरूरी है।
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उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम से शिक्षकों को नई तकनीक, फ्लिप्ड क्लासरूम और अनुभव से सीखने जैसे तरीके अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। साथ ही भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक तकनीक को साथ लेकर चलना भी जरूरी है।
ऑनलाइन जुड़ीं एआईयू की संयुक्त सचिव रंजना परिहार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों को नई शिक्षा नीति को लागू करने में मदद करते हैं और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाते हैं। स्वावलंबन केंद्र की निदेशक प्रो. अंशु भारद्वाज ने बताया कि इस कार्यशाला में देश के कई शिक्षाविद अपने विचार रखेंगे। इनमें प्रो. परलोक गुप्ता, प्रो. मंजुला चौधरी और प्रो. दुर्गेश त्रिपाठी शामिल हैं।
कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. रवि भूषण ने कहा कि इस पहल से शिक्षकों की क्षमता बढ़ेगी और कक्षा पढ़ाई ज्यादा रोचक व असरदार बनेगी।
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यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के स्वावलंबन केंद्र और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज-बीपीएसएमवी अकादमिक व प्रशासनिक विकास केंद्र के सहयोग से करवाई जा रही है। इसका मकसद शिक्षकों को नई शिक्षा नीति की खास बातें और उसे कक्षा में कैसे लागू करें, इसकी जानकारी देना है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सुदेश ने की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति से शिक्षा व्यवस्था और बेहतर, लचीली और कौशल आधारित बनेगी। अब शिक्षक सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि बच्चों के मार्गदर्शक बनेंगे। उन्होंने कहा कि कक्षा में बातचीत, प्रयोग और छात्र केंद्रित पढ़ाई जरूरी है।
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उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम से शिक्षकों को नई तकनीक, फ्लिप्ड क्लासरूम और अनुभव से सीखने जैसे तरीके अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। साथ ही भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक तकनीक को साथ लेकर चलना भी जरूरी है।
ऑनलाइन जुड़ीं एआईयू की संयुक्त सचिव रंजना परिहार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों को नई शिक्षा नीति को लागू करने में मदद करते हैं और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाते हैं। स्वावलंबन केंद्र की निदेशक प्रो. अंशु भारद्वाज ने बताया कि इस कार्यशाला में देश के कई शिक्षाविद अपने विचार रखेंगे। इनमें प्रो. परलोक गुप्ता, प्रो. मंजुला चौधरी और प्रो. दुर्गेश त्रिपाठी शामिल हैं।
कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. रवि भूषण ने कहा कि इस पहल से शिक्षकों की क्षमता बढ़ेगी और कक्षा पढ़ाई ज्यादा रोचक व असरदार बनेगी।